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Jind News: हमेटी में किसानों ने सीखे जैविक खाद व कीटनाशक बनाने की विधि
Wed, 28 Feb 2024 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 28 Feb 2024 11:36 PM IST
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28जेएनडी22: किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देते हुए डॉ. सुभाष। विज्ञप्ति।
जींद। हमेटी में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण लेने आए विभिन्न जिलों के किसानों ने बुधवार को गोमूत्र व गाय के गोबर से जैविक खाद व विभिन्न वनस्पतियों से जैविक कीटनाशक बनाने की विधी सिखी। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को नीम, आक, धतूरा व बकैन जैसे पेड़ों के पत्तों से जैविक कीटनाशक और देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से जीवाणु खाद बनाना सिखाया।
डॉक्टर सुभाष ने बताया कि किसान अपनी फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जिन जहरीले रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, उनके अवशेष अनाज, फल व सब्जियों में रह जाते हैं जो हमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करते हैं। नीम, आक, धतूरा जैसी वनस्पतियों से बनाए गए कीटनाशक न केवल जहर मुक्त होते हैं, बल्कि इनमें किसानों का कोई खर्चा भी नहीं होता। इसी प्रकार से गाय के गोमूत्र व गोबर से बनाए जाने वाले जीवामृत व घनजीवामृत जैसे जीवाणुओं के खाद से न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है बल्कि किसान के फ सल उत्पादन में होने वाले खर्चे में भी कटौती होती है। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह वातावरण व प्रकृति के हर जीव के लिए हितकारी हैं।
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डॉक्टर सुभाष ने बताया कि किसान अपनी फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जिन जहरीले रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं, उनके अवशेष अनाज, फल व सब्जियों में रह जाते हैं जो हमारी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म करते हैं। नीम, आक, धतूरा जैसी वनस्पतियों से बनाए गए कीटनाशक न केवल जहर मुक्त होते हैं, बल्कि इनमें किसानों का कोई खर्चा भी नहीं होता। इसी प्रकार से गाय के गोमूत्र व गोबर से बनाए जाने वाले जीवामृत व घनजीवामृत जैसे जीवाणुओं के खाद से न केवल भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है बल्कि किसान के फ सल उत्पादन में होने वाले खर्चे में भी कटौती होती है। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह वातावरण व प्रकृति के हर जीव के लिए हितकारी हैं।
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28जेएनडी22: किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देते हुए डॉ. सुभाष। विज्ञप्ति।
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