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हीमोफीलिया में खून बहना न बंद होने से रहता है जान का खतरा : डॉ. शिप्रा
Wed, 23 Apr 2025 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 23 Apr 2025 01:28 AM IST
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22जेएनडी19-नागरिक अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को हीमोफीलिया की जानकारी देती
जींद। जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में हीमोफीलिया रोग को लेकर फैक्टर डिस्ट्रीब्यूटर कैंप और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने हीमोफीलिया मरीजों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। अस्पताल की ओर से हीमोफीलिया मरीजों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
हीमोफीलिया की नोडल अधिकारी डॉ. शिप्रा ने कहा कि शरीर में थोड़ा कट लगने के बाद थोड़ा खून बहना के बाद बंद हो जाता है, लेकिन कई लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है। हीमोफीलिया में खून बहना बंद नहीं होता है और इसमें जान जाने का भी खतरा होता है। यह बीमारी अधिकतर आनुवांशिक कारणों से होती है। माता-पिता में से किसी को ये बीमारी होने पर बच्चे को भी हो सकती है। बहुत कम ऐसा होता है कि किसी और कारण से बीमारी हो। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया दो तरह का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती और हीमोफीलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। यह एक दुर्लभ बीमारी है। उन्होंने बताया कि एक समय पहले हीमोफीलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिए डाला जा सकता है। अगर बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से भी इलाज हो सकता है। सिर में बहुत तेज दर्द होना, बार-बार उल्टी आना, गर्दन में दर्द होना, धुंधला या दोहरा दिखना, बहुत ज्यादा नींद आना, चोट से लगातार खून बहना आदि लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए और परामर्श लेना चाहिए। जिले में अब तक 39 के करीब हीमोफीलिया के मरीज हैं, जिसका रजिस्ट्रेशन जिला जींद अस्पताल में किया जा चुका है और इनको एक विशेष पहचान पत्र भी दिया जा चुका है। इससे इसका इलाज में सुगमता और हरियाणा रोडवेज में निशुल्क सेवाएं प्राप्त होती हैं। इस अवसर पर आशुतोष, एमएस डॉ. अरविंद, डॉ. जितेंद्र, डॉ. संकल्प और डॉ. चंद्रमोहन भी मौजूद रहे।
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हीमोफीलिया की नोडल अधिकारी डॉ. शिप्रा ने कहा कि शरीर में थोड़ा कट लगने के बाद थोड़ा खून बहना के बाद बंद हो जाता है, लेकिन कई लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है। हीमोफीलिया में खून बहना बंद नहीं होता है और इसमें जान जाने का भी खतरा होता है। यह बीमारी अधिकतर आनुवांशिक कारणों से होती है। माता-पिता में से किसी को ये बीमारी होने पर बच्चे को भी हो सकती है। बहुत कम ऐसा होता है कि किसी और कारण से बीमारी हो। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया दो तरह का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर 8 की कमी होती और हीमोफीलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। यह एक दुर्लभ बीमारी है। उन्होंने बताया कि एक समय पहले हीमोफीलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिए डाला जा सकता है। अगर बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से भी इलाज हो सकता है। सिर में बहुत तेज दर्द होना, बार-बार उल्टी आना, गर्दन में दर्द होना, धुंधला या दोहरा दिखना, बहुत ज्यादा नींद आना, चोट से लगातार खून बहना आदि लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए और परामर्श लेना चाहिए। जिले में अब तक 39 के करीब हीमोफीलिया के मरीज हैं, जिसका रजिस्ट्रेशन जिला जींद अस्पताल में किया जा चुका है और इनको एक विशेष पहचान पत्र भी दिया जा चुका है। इससे इसका इलाज में सुगमता और हरियाणा रोडवेज में निशुल्क सेवाएं प्राप्त होती हैं। इस अवसर पर आशुतोष, एमएस डॉ. अरविंद, डॉ. जितेंद्र, डॉ. संकल्प और डॉ. चंद्रमोहन भी मौजूद रहे।
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