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1967 में नरवाना विस से सबसे कम तीन उम्मीदवारों ने लड़ा था चुनाव
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कभी हॉट सीट रहे नरवाना विधानसभा क्षेत्र से इस बार चुनाव मैदान में 12 प्रत्याशी हैं। यहां अब तक 12 विधानसभा चुनाव हुए हैं। यहां पर सबसे पहले जहां 1967 में हुए चुनाव में केवल तीन प्रत्याशी मैदान में थे तो वही 1991 में सबसे अधिक 36 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।
1967 में नरवाना से आरपीआई के शमशेर सिंह तथा कांग्रेस के कलीराम के बीच मुकाबला हुआ था। इसमें शमशेर सिंह सुरजेवाला ने चुनाव जीता था। इस चुनाव में केवल तीन प्रत्याशी ही अपना भाग्य आजमाए थे। यह चुनाव काफी रोचक हुआ था। इसमें शमशेर सिंह सुरजेवाला केवल 1519 वोटों से जीते थे। 1968 में इस विधानसभा क्षेत्र से 7 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें कांग्रेस के नेकीराम ने जीत हासिल की थी। इसी प्रकार 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में नरवाना से 7 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें से कांग्रेस एस के गौरी शंकर ने जीत हासिल की थी। 1977 में इस विधानसभा क्षेत्र से 13 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इनमें कांग्रेस के शमशेर सिंह सुरजेवाला विरोधी को मात दी थी। 1982 में फिर इस विधानसभा चुना वमें 13 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें शमशेर सिंह सुरजेवाला ने फिर एक बार विधायक की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। 1987 में हुए विधानसभा चुनाव में 9 लोगों ने चुनावी समर में छलांग लगाई थी। इनमें से लोकदल के टेकचंद ने आठ लोगों को पीछे छोड़ते हुए सीट पर कब्जा कर लिया था। 1991 में इस विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 36 उम्मीदवार मैदान में अपना भाग्य आजमाने के लिए कूदे। इनमें कांग्रेस के शमशेर सिंह सुरजेवाला ने सबको चित कर दिया। 1996 में फिर इस विधानसभा क्षेत्र से 34 उम्मीदवार मैदान में कूदे मगर कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सबको पटकनी दे दी। 2000 में नरवाना विधानसभा क्षेत्र से 9 लोगों ने किस्मत आजमाई। इस चुनाव में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला भी थे। ओपी चौटाला के मैदान में कूदने से सीट हॉट हो गई। यहां से ओमप्रकाश चौटाला जीते तथा सीएम बने। 2005 मेें फिर इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वालों की संख्या 13 थी। इस बार भी ओमप्रकाश चौटाला मैदान में आए। इस बार कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें मात दी। इसके बाद नरवाना सीट को आरक्षित कर दिया। 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से 9 लोगों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें पिरथी सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में 14 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। यहां से फिर इनेलो के पिरथी सिंह विधायक बने।
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इस बार 12 उम्मीदवार मैदान में
नरवाना विधानसभा क्षेत्र से कुल 14 लोगों ने नामांकन किया था। इनमें से दो ने अपना नामांकन वापस ले लिया। अब चुनाव मैदान में 12 प्रत्याशी रह गए हैं, जिसमें बसपा के धर्मबीर, कांग्रेस की विद्या रानी, भाजपा की संतोष रानी, इनेलो के सुशील, जजपा के रामनिवास सुरजाखेड़ा, सर्वहित पार्टी के कपिल, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के नरेश कुमार, लोसुपा के वकील रसीला, स्वराज इंडिया पार्टी के हरदीप सिंह धरोदी, निर्दलीय मिथुन, विकास, सुरेश शामिल हैं।
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1967 में नरवाना से आरपीआई के शमशेर सिंह तथा कांग्रेस के कलीराम के बीच मुकाबला हुआ था। इसमें शमशेर सिंह सुरजेवाला ने चुनाव जीता था। इस चुनाव में केवल तीन प्रत्याशी ही अपना भाग्य आजमाए थे। यह चुनाव काफी रोचक हुआ था। इसमें शमशेर सिंह सुरजेवाला केवल 1519 वोटों से जीते थे। 1968 में इस विधानसभा क्षेत्र से 7 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें कांग्रेस के नेकीराम ने जीत हासिल की थी। इसी प्रकार 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में नरवाना से 7 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें से कांग्रेस एस के गौरी शंकर ने जीत हासिल की थी। 1977 में इस विधानसभा क्षेत्र से 13 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इनमें कांग्रेस के शमशेर सिंह सुरजेवाला विरोधी को मात दी थी। 1982 में फिर इस विधानसभा चुना वमें 13 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें शमशेर सिंह सुरजेवाला ने फिर एक बार विधायक की कुर्सी पर कब्जा कर लिया। 1987 में हुए विधानसभा चुनाव में 9 लोगों ने चुनावी समर में छलांग लगाई थी। इनमें से लोकदल के टेकचंद ने आठ लोगों को पीछे छोड़ते हुए सीट पर कब्जा कर लिया था। 1991 में इस विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 36 उम्मीदवार मैदान में अपना भाग्य आजमाने के लिए कूदे। इनमें कांग्रेस के शमशेर सिंह सुरजेवाला ने सबको चित कर दिया। 1996 में फिर इस विधानसभा क्षेत्र से 34 उम्मीदवार मैदान में कूदे मगर कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सबको पटकनी दे दी। 2000 में नरवाना विधानसभा क्षेत्र से 9 लोगों ने किस्मत आजमाई। इस चुनाव में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला भी थे। ओपी चौटाला के मैदान में कूदने से सीट हॉट हो गई। यहां से ओमप्रकाश चौटाला जीते तथा सीएम बने। 2005 मेें फिर इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वालों की संख्या 13 थी। इस बार भी ओमप्रकाश चौटाला मैदान में आए। इस बार कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें मात दी। इसके बाद नरवाना सीट को आरक्षित कर दिया। 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से 9 लोगों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें पिरथी सिंह ने जीत हासिल की। इसके बाद 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में 14 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। यहां से फिर इनेलो के पिरथी सिंह विधायक बने।
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इस बार 12 उम्मीदवार मैदान में
नरवाना विधानसभा क्षेत्र से कुल 14 लोगों ने नामांकन किया था। इनमें से दो ने अपना नामांकन वापस ले लिया। अब चुनाव मैदान में 12 प्रत्याशी रह गए हैं, जिसमें बसपा के धर्मबीर, कांग्रेस की विद्या रानी, भाजपा की संतोष रानी, इनेलो के सुशील, जजपा के रामनिवास सुरजाखेड़ा, सर्वहित पार्टी के कपिल, पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक के नरेश कुमार, लोसुपा के वकील रसीला, स्वराज इंडिया पार्टी के हरदीप सिंह धरोदी, निर्दलीय मिथुन, विकास, सुरेश शामिल हैं।
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