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दो सप्ताह से ज्यादा खांसी रहने पर टीबी जांच करवाएं : सुशील
Sat, 28 Dec 2024 01:38 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:38 AM IST
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27जेएनडी01: ग्रामीणों को टीबी बीमारी को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।
जींद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दरियावाला के तहत गांव ढांडाखेड़ी में एमपीएचडब्ल्यू सुशील शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मियों ने जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को टीबी से बचाव के बारे में जागरूक किया। इसके साथ-साथ मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के बारे में व स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान टीबी व मच्छरजनित बीमारियों की जानकारी से संबंधित पंफलेट भी बांटे गए।
सुशील शर्मा ने बताया कि टीबी बीमारी किसी भी आयु वर्ग को हो सकती है। यह एक संक्रामक रोग है। कीटाणु मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिसके कारण फेफड़ों की टीबी होती है। कभी-कभी यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करती है। टीबी के संभावित मरीजों में मुख्य तौर पर दो सप्ताह से ज्यादा लगातार खांसी रहना, शाम के समय बुखार रहना, छाती में दर्द रहना, भूख न लगना, बलगम में खून आना और लगातार वजन कम होना होता है। अगर इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपने बलगम की जांच करवानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच व इलाज बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। स्वास्थ्य कर्मी सुनीता कुमारी ने बताया कि टीबी के मरीज को इलाज की पूरी अवधि के दौरान पौष्टिक आहार भत्ता भी दिया जाता है। टीबी से ग्रसित मरीज को चाहिए कि अपने खानपान का विशेष ध्यान रखे, संतुलित आहार का सेवन करे, नियमित रूप से दवाई ले। धूम्रपान व शराब का सेवन बंद करे, बलगम को मिट्टी में दबा दें, जब खांसना हो तो मुंह पर कपड़ा अवश्य लगाएं ताकि टीबी के मरीजों को बढ़ने से रोका जा सके। इस अवसर पर अंजू, कविता, आशा वर्कर ममता, निशु, भंति, संदीप, सुरेश, मेशो और सुनहरी मौजूद थी।
फोटो कैप्शन
27जेएनडी01: ग्रामीणों को टीबी बीमारी को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।
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सुशील शर्मा ने बताया कि टीबी बीमारी किसी भी आयु वर्ग को हो सकती है। यह एक संक्रामक रोग है। कीटाणु मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिसके कारण फेफड़ों की टीबी होती है। कभी-कभी यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करती है। टीबी के संभावित मरीजों में मुख्य तौर पर दो सप्ताह से ज्यादा लगातार खांसी रहना, शाम के समय बुखार रहना, छाती में दर्द रहना, भूख न लगना, बलगम में खून आना और लगातार वजन कम होना होता है। अगर इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अपने बलगम की जांच करवानी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच व इलाज बिल्कुल मुफ्त दिया जाता है। स्वास्थ्य कर्मी सुनीता कुमारी ने बताया कि टीबी के मरीज को इलाज की पूरी अवधि के दौरान पौष्टिक आहार भत्ता भी दिया जाता है। टीबी से ग्रसित मरीज को चाहिए कि अपने खानपान का विशेष ध्यान रखे, संतुलित आहार का सेवन करे, नियमित रूप से दवाई ले। धूम्रपान व शराब का सेवन बंद करे, बलगम को मिट्टी में दबा दें, जब खांसना हो तो मुंह पर कपड़ा अवश्य लगाएं ताकि टीबी के मरीजों को बढ़ने से रोका जा सके। इस अवसर पर अंजू, कविता, आशा वर्कर ममता, निशु, भंति, संदीप, सुरेश, मेशो और सुनहरी मौजूद थी।
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27जेएनडी01: ग्रामीणों को टीबी बीमारी को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।