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चिंता नहीं चिंतन करेंगे तो मिलेगा समस्या का समाधान : साध्वी लब्धि प्रभा
Sat, 30 Sep 2023 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 30 Sep 2023 11:56 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
उचाना। साध्वी लब्धि प्रभा ने कहा कि चिंता एक जहर है। चिता तो सिर्फ तन को जलाती है लेकिन चिंता तन-मन दोनों को जलाती है। चिंता नहीं चिंतन कीजिए, समस्या का समाधान जरूर मिलेगा। जीवन में कुछ अच्छे दोस्त जरूर बनाइए और अपने मन की सारी बातें उनसे कह डालिए। नहीं तो गुरू, ईश्वर को अपना सब कुछ मानकर सारी बातें कहते रहिए। वह शनिवार को तेरापंथ भवन उचाना मंडी में चल रहे ठाणे-3 के चातुर्मास में धर्मसभा में को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि अगर आराम चाहते हो तो भगवान की भक्ति, गुरु की ओर आओ। अमीर आदमी को आज नींद लेने के लिए गोली खानी पड़ती है वही गरीब व्यक्ति अखबार बिछाकर फर्श पर भी सो जाता है। आज जितने सुख सुविधा के साधन बढ़े है उतनी ही मानव की चिंता बढ़ी है। आज इंसान अपने आप से ही दूर हो गया है। एक मछली है जो नदी में रहती है तो खुश रहती है। एक दिन नदी से बाहर आ जाती है तो तड़पती है, परेशानी होती है। कहा, रूप नश्वर है स्वरूप शाश्वत है। रूप बाहरी है स्वरूप अंदरूनी है। रूप अनेक हो सकते है लेकिन स्वरूप तो एक ही होगा। व्यक्ति को अपने रूप की चिंता न कर स्वरुप की चिंता करनी चाहिए।
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उचाना। साध्वी लब्धि प्रभा ने कहा कि चिंता एक जहर है। चिता तो सिर्फ तन को जलाती है लेकिन चिंता तन-मन दोनों को जलाती है। चिंता नहीं चिंतन कीजिए, समस्या का समाधान जरूर मिलेगा। जीवन में कुछ अच्छे दोस्त जरूर बनाइए और अपने मन की सारी बातें उनसे कह डालिए। नहीं तो गुरू, ईश्वर को अपना सब कुछ मानकर सारी बातें कहते रहिए। वह शनिवार को तेरापंथ भवन उचाना मंडी में चल रहे ठाणे-3 के चातुर्मास में धर्मसभा में को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि अगर आराम चाहते हो तो भगवान की भक्ति, गुरु की ओर आओ। अमीर आदमी को आज नींद लेने के लिए गोली खानी पड़ती है वही गरीब व्यक्ति अखबार बिछाकर फर्श पर भी सो जाता है। आज जितने सुख सुविधा के साधन बढ़े है उतनी ही मानव की चिंता बढ़ी है। आज इंसान अपने आप से ही दूर हो गया है। एक मछली है जो नदी में रहती है तो खुश रहती है। एक दिन नदी से बाहर आ जाती है तो तड़पती है, परेशानी होती है। कहा, रूप नश्वर है स्वरूप शाश्वत है। रूप बाहरी है स्वरूप अंदरूनी है। रूप अनेक हो सकते है लेकिन स्वरूप तो एक ही होगा। व्यक्ति को अपने रूप की चिंता न कर स्वरुप की चिंता करनी चाहिए।
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