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Jind News: बिना आईडी और नंबर के अल्ट्रासाउंड किया तो होगी कार्रवाई

Fri, 31 Jan 2025 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Fri, 31 Jan 2025 11:51 PM IST
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If ultrasound is done without ID and number then action will be taken
जींद। जिला में अब प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) आईडी और मां, शिशु ट्रैकिंग प्रणाली (एमसीटीएस) नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड करना गैरकानूनी होगा। ऐसे में अब अल्ट्रासाउंड केंद्रों को किसी भी गर्भवती का अल्ट्रासाउंड करने से पहले आरसीएच व एमसीटीएस नंबर लेना अनिवार्य किया गया है। यह नियम सरकारी और निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू होगा। इसको लेकर जल्द ही निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालकों के साथ स्वास्थ्य विभाग बैठक करेगा और नियम की पालना करवाएगा। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
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आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण से गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग आसानी से हो सकेगी। अक्सर तीन महीने तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। इसलिए महिलाएं पंजीकरण करवाने से बचती हैं, लेकिन अब यह पंजीकरण अनिवार्य होगा। इससे गर्भवती और शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहेगी। जिले में जो गर्भवती महिलाएं नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिये उपचार करवा रही है, उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है, लेकिन निजी अस्पतालों में उपचार करवाने वाली गर्भवती पंजीकृत नहीं हो पाती है। ऐसे में यह निर्देश जारी किए गए हैं ताकि माताओं और शिशु की मृत्यु दर को कम करने के लिए मदद मिलेगी। यह नियम सरकारी व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू होंगे।
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इसके लिए महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं की ओर से प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया गया है। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। नियमानुसार गर्भवतियों का 16 से 20 सप्ताह के अंदर अल्ट्रासाउंड होना अनिवार्य है।
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शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए उठाया कदम

पिछले दिनों भ्रूण हत्या के तीन मामले सामने आए थे, जिनमें आज तक न तो यह पता चल पाया है कि यह कृत्य किसने किया था। हालांकि पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामले भी दर्ज किए हुए हैं। बावजूद इसके आज तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। जींद अस्पताल में ही औसतन प्रतिदिन 30 से 40 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड चिकित्सकों के द्वारा लिखे जाते हैं जबकि प्रतिदिन आठ से दस डिलीवरी होती हैं। ऐसे में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए अब यह कदम उठाया गया है। नियम के तहत महिलाओं को गर्भवती होने पर तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर पंजीकरण करवाना होगा। यह पंजीकरण गर्भावस्था की पहली तिमाही में करवाना अनिवार्य कर दिया है।

नागरिक अस्पताल में 16 साल से नहीं रेडियोलॉजिस्ट

जिला नागरिक अस्पताल में पिछले 16 साल से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसके कारण नागरिक अस्पताल में अल्ट्रासांउड नहीं हो पा रहे हैं। हालांकि अस्पताल में अल्ट्रासांउड मशीन है लेकिन बिना रेडियोलॉजिस्ट के धूल फांक रही हैं। अस्पताल में रोजाना दस से 15 गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासांउड करवाने के लिए आती हैं लेकिन उनको बाहर से अल्ट्रासांउड करवाने के लिए भेज दिया जाता है।



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गर्भवती महिलाओं की प्रजनन व बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) आईडी और मां व शिशु ट्रैकिंग प्रणाली (एमसीटीएस) नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड किया गया तो अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कार्रवाई की जाएगी। गर्भवती को गर्भधारण के तीन माह के भीतर आरसीएच आईडी और मां व एमसीटीएस में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण कराना होगा ताकि स्वास्थ्य विभाग उन्हें ट्रैक कर उनकी संस्थानों में डिलीवरी करवा सके।

--डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सीएमओ, नागरिक अस्पताल जींद
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