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15 दिन में नागरिक अस्पताल में बनकर तैयार हो जाएगा आईसीयू
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नागरिक अस्पताल का फाइल फोटो।
- फोटो : Jind
कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से पहले जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि नागरिक अस्पताल में अगले 15 दिन में दस बेड का आईसीयू बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसमें वेंटिलेटर तथा बेड लगाए जाएंगे। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से निपटने के लिए आईसीयू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा था। प्रतिदिन 200 सिलिंडर की खपत होती थी लेकिन अब नागरिक अस्पताल में एक लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता का प्लांट लग चुका है। इस बार अस्पताल प्रशासन को न तो सिलिंडरों की जरूरत पड़ेगी और न ही ऑक्सीजन की किल्लत से जूझना पड़ेगा। ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास 33 वेंटिलेटर तथा 80 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध हैं। इसके अलावा कोराना मरीजों के लिए फिलहाल 80 बेड की व्यवस्था तथा जरूरत पड़ी तो इसे 200 तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं नरवाना के नागरिक अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो चुका है।
राष्ट्रीय कोविड सुपर मॉडल समिति ने 2022 में कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी संभावना जताई है। फरवरी माह में इस लहर का पीक होगा। इसके लिए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी कर रहा है। कोरोना वायरस का नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के फैलने की दर अधिक है। फिलहाल जींद के पड़ोसी जिले करनाल व पानीपत में ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। बुधवार को जींद में भी एक कोरोना पॉजिटिव मिला है लेकिन अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह ओमिक्रॉन है या अन्य कोई वैरिएंट। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए पूरी तरह तैयार है। नागरिक अस्पताल में इस समय 23 वेंटिलेटर हैं तथा 80 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी हैं ताकि जरूरत पड़ने पर इनसे मरीज को ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सके। नागरिक अस्पताल जींद तथा नरवाना में ऑक्सीजन के प्लांट लग चुके हैं। शहर की किसी भी निजी अस्पताल में कोई ऑक्सीजन प्लांट नहीं है।
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नहीं होगी ऑक्सीजन की परेशानी
दूसरी लहर के समय प्रतिदिन नागरिक अस्पताल में 200 सिलिंडर ऑक्सीजन लगती थी। इसके अलावा तीन टन का ऑक्सीजन टेंक भी यहां लगा हुआ था जिसको हर दूसरे दिन ऑक्सीजन से भरवाया जाता था। दूसरी लहर में हालांकि ऑक्सीजन की कमी से जिले में किसी मरीज की मौत नहीं हुई लेकिन हालात कई बार ऐसे हुए, जब नागरिक अस्पताल में खत्म होने से एक घंटा पहले ही ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंची। इस बार हालातों में काफी सुधार हुआ है। नागरिक अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट से पूरे अस्पताल में सप्लाई शुरू हो चुकी है। इस प्लांट से पूरे अस्पताल को 24 घंटे चलाया जा सकता है।
नागरिक अस्पताल में कोरोना से निपटने के लिए फिलहाल हर प्रकार की सुविधा है। इस बार बेड की संख्या भी जरूरत पडने पर बढ़ाई जा सकेगी। राजकीय कॉलेज में 50 बेड की व्यवस्था को स्टेंड बाई पर रखा गया, जरूरत पडने पर इनका प्रयोग किया जा सकेगा। ऑक्सीजन की भी कोई कमी नहीं है। दूसरे लहर के दौरान जो हालात बने थे, उस प्रकार के हालात से आसानी से निपटा जा सकेगा।
-डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग को ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ा था। प्रतिदिन 200 सिलिंडर की खपत होती थी लेकिन अब नागरिक अस्पताल में एक लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता का प्लांट लग चुका है। इस बार अस्पताल प्रशासन को न तो सिलिंडरों की जरूरत पड़ेगी और न ही ऑक्सीजन की किल्लत से जूझना पड़ेगा। ओमिक्रॉन से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास 33 वेंटिलेटर तथा 80 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध हैं। इसके अलावा कोराना मरीजों के लिए फिलहाल 80 बेड की व्यवस्था तथा जरूरत पड़ी तो इसे 200 तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं नरवाना के नागरिक अस्पताल में भी ऑक्सीजन प्लांट शुरू हो चुका है।
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राष्ट्रीय कोविड सुपर मॉडल समिति ने 2022 में कोरोना की तीसरी लहर आने की पूरी संभावना जताई है। फरवरी माह में इस लहर का पीक होगा। इसके लिए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी कर रहा है। कोरोना वायरस का नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के फैलने की दर अधिक है। फिलहाल जींद के पड़ोसी जिले करनाल व पानीपत में ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। बुधवार को जींद में भी एक कोरोना पॉजिटिव मिला है लेकिन अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह ओमिक्रॉन है या अन्य कोई वैरिएंट। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए पूरी तरह तैयार है। नागरिक अस्पताल में इस समय 23 वेंटिलेटर हैं तथा 80 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी हैं ताकि जरूरत पड़ने पर इनसे मरीज को ऑक्सीजन की सप्लाई की जा सके। नागरिक अस्पताल जींद तथा नरवाना में ऑक्सीजन के प्लांट लग चुके हैं। शहर की किसी भी निजी अस्पताल में कोई ऑक्सीजन प्लांट नहीं है।
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नहीं होगी ऑक्सीजन की परेशानी
दूसरी लहर के समय प्रतिदिन नागरिक अस्पताल में 200 सिलिंडर ऑक्सीजन लगती थी। इसके अलावा तीन टन का ऑक्सीजन टेंक भी यहां लगा हुआ था जिसको हर दूसरे दिन ऑक्सीजन से भरवाया जाता था। दूसरी लहर में हालांकि ऑक्सीजन की कमी से जिले में किसी मरीज की मौत नहीं हुई लेकिन हालात कई बार ऐसे हुए, जब नागरिक अस्पताल में खत्म होने से एक घंटा पहले ही ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंची। इस बार हालातों में काफी सुधार हुआ है। नागरिक अस्पताल में लगे ऑक्सीजन प्लांट से पूरे अस्पताल में सप्लाई शुरू हो चुकी है। इस प्लांट से पूरे अस्पताल को 24 घंटे चलाया जा सकता है।
नागरिक अस्पताल में कोरोना से निपटने के लिए फिलहाल हर प्रकार की सुविधा है। इस बार बेड की संख्या भी जरूरत पडने पर बढ़ाई जा सकेगी। राजकीय कॉलेज में 50 बेड की व्यवस्था को स्टेंड बाई पर रखा गया, जरूरत पडने पर इनका प्रयोग किया जा सकेगा। ऑक्सीजन की भी कोई कमी नहीं है। दूसरे लहर के दौरान जो हालात बने थे, उस प्रकार के हालात से आसानी से निपटा जा सकेगा।
-डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।