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Jind News: मैं हरियाणा की नार सूं ना समझिये अणजान मनै...

Sat, 14 Sep 2024 01:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sat, 14 Sep 2024 01:31 AM IST
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I heard the slogan of Haryana, don't think I am an unknown person...
जींद। अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई की तरफ से हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को सीआरएसयू में हिंदी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
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इसकी अध्यक्षता करते हुए इकाई अध्यक्ष डॉ. मंजूलता ने कहा कि किसी भी भाषा का विकास में जनसंचार माध्यमों की महत्वपूर्ण होती है। इस दृष्टि से हिंदी भाषा के विकास में आधुनिक जनसंचार माध्यमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस समय ई-जर्नलिज्म, ई-ट्रेनिंग, ई-एजुकेशन, ई-गवर्नेंस आदि के कारण ई युग का प्रारंभ हो चुका है। ऐसी स्थिति में हिंदी को विकसित कर विश्व भाषा बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका इंटरनेट निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी साइबर युग का है। कोई भी काम अब इंटरनेट के बिना अधूरा लगता है और यही इंटरनेट विश्वभर में घर-घर तक पहुंच चुका है। ऐसे में हिंदी अगर तकनीक की भाषा बन जाए, तो विश्व भाषा बनने में देर नहीं लगेगी। हिंदी को विश्व भाषा बनाने में इंटरनेट इसलिए भी लाभप्रद है कि हिंदी भाषी भारतीय भूल के लोग कई देशों में बसे हुए हैं, जो अपने देश से जुड़े रहना चाहते हैं। आज हिंदी का प्रयोग भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में बल्कि विश्व के अनेक देशों में हो रहा है। विदेशों में भी हिंदी अध्ययन-अध्यापन बल पकड़ रहा है। विश्व के 44 से अधिक देशों में बोली और समझी जाने वाली भाषा है। महामंत्री वरिष्ठ साहित्यकार मंजू मानव ने बहुत ही भावपूर्ण लहजे में हिंदी के प्रति अपने भावों अभिव्यक्त करते हुए काव्य पाठ किया।
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डॉ. ब्रजपाल ने कहा कि हिंदी दिवस की अग्रिम बधाई देते कहा कि सभी भाषाओं का अपना महत्व है, लेकिन उन सबमें हिंदी भाषा का अपना विशेष स्थान है। प्रांतीय संचार मंत्री डॉ. शिवनीत सिंह ने कहा कि हिंदी भविष्य की भाषा है। हिंदी कोमलता और सौम्यता की बात की कुछ और है। डॉ. पूनम पूजित ने कहा कि खेत माट्टी त जुड़ी हुई मैं हरियाणा की नार सूं ना समझिये अणजान मनै मैं सृष्टि का सार सूं पेट पाड़क जन्म देऊ जब, मैं ब्रम्हा त कम कोन्या। गिल्ये मै भी गेल सो जावै, नर मै इतना दम कोन्या। मैं ठयरी घर-बारण निराली घर की देशी खार सूं। डॉ. सुमन एनसीसी अधिकारी और योग साइंस विभाग की प्रभारी ने कहा कि हिंदी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आधुनिक समय तक, समाज को एकजुट करने और विचारों का आदान-प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई है। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, डॉ. पूनम बिडान भी मौजूद रहीं।
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