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Jind News: शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के साथ दौड़ रही हाइड्रोजन ट्रेन
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फोटो 29जेएनडी03-हाइड्रोजन ट्रेन, जिसके संचालन पर शून्य प्रदूषण होता है। संवाद
- फोटो : सांकेतिक
जींद। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन जारी है। बुधवार सुबह निर्धारित समय पर जींद जंक्शन से रवाना हुई ट्रेन में 42 यात्रियों ने सफर किया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का शून्य उत्सर्जन करती है जिससे यह पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में पर्यावरण के लिए कहीं अधिक अनुकूल साबित हो रही है।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सामान्य डीजल डीएमयू एक लीटर डीजल जलाने पर लगभग 2,680 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। जींद–सोनीपत रेलखंड पर नियमित संचालन के दौरान एक डीजल डीएमयू प्रतिदिन करीब 1,500 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में छोड़ती है। इसके विपरीत हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के दौरान धुआं नहीं निकलता बल्कि केवल पानी और जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। इससे वायु प्रदूषण में कमी आने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
रेलवे का मानना है कि भविष्य में चरणबद्ध तरीके से डीजल ट्रेनों के स्थान पर हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जाएगा। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और रेलवे का संचालन अधिक टिकाऊ बनेगा।
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फिलहाल ट्रेन का नियमित परीक्षण जारी है और यात्रियों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि परीक्षण पूरी तरह सफल रहता है तो इस तकनीक का विस्तार अन्य रेल मार्गों पर भी किया जाएगा। इससे देश में स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सामान्य डीजल डीएमयू एक लीटर डीजल जलाने पर लगभग 2,680 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करती है। जींद–सोनीपत रेलखंड पर नियमित संचालन के दौरान एक डीजल डीएमयू प्रतिदिन करीब 1,500 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में छोड़ती है। इसके विपरीत हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के दौरान धुआं नहीं निकलता बल्कि केवल पानी और जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। इससे वायु प्रदूषण में कमी आने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
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रेलवे का मानना है कि भविष्य में चरणबद्ध तरीके से डीजल ट्रेनों के स्थान पर हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जाएगा। इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी और रेलवे का संचालन अधिक टिकाऊ बनेगा।
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फिलहाल ट्रेन का नियमित परीक्षण जारी है और यात्रियों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि परीक्षण पूरी तरह सफल रहता है तो इस तकनीक का विस्तार अन्य रेल मार्गों पर भी किया जाएगा। इससे देश में स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल रेल परिवहन को नई गति मिलने की उम्मीद है।