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Jind News: हाइड्रोजन ट्रेन ने बिना बाधा पूरी की 1000 किलोमीटर यात्रा, रेल मंत्री बोले-यह बड़ी उपलब्धि
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फोटो 25जेएनडी02-रेलवे जंक्शन के प्लेटफार्म-3 पर खड़ी हाइड्रोजन ट्रेन। संवाद
जींद। भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ने 1000 किलोमीटर की दूरी पूरी कर भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह ट्रेन छह दिनों से जींद-सोनीपत रेलखंड पर बिना किसी तकनीकी बाधा के नियमित रूप से दौड़ रही है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। कहा, हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है और अब देश के अन्य रेल मार्गों पर भी इस अत्याधुनिक तकनीक के ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
ट्रेन का सोनीपत, पानीपत और नई दिल्ली रेलखंड पर भी परीक्षण किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान ट्रेन की अधिकतम गति, सुरक्षा मानकों, ब्रेकिंग सिस्टम, हाइड्रोजन फ्यूल सेल की कार्यक्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार अब तक सभी परीक्षण संतोषजनक रहे हैं और ट्रेन ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया है।
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कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और ध्वनि प्रदूषण भी कम रहेगा
हाइड्रोजन आधारित यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जा रही है। इसके संचालन से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जबकि ध्वनि प्रदूषण भी बेहद कम रहेगा। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को नई दिशा देगी।
दूसरे मार्गों पर भी ट्रायल की चल रही है योजना
सफल परीक्षण के बाद रेलवे अब अन्य उपयुक्त रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन की योजना बना रहा है। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारियां और आधारभूत ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। भविष्य में ऐसे रेलखंडों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां वर्तमान में डीजल ट्रेनों का संचालन अधिक होता है।
प्रदूषण रहित है ट्रेन का सफर
ट्रेन मैनेजर कुलदीप मल्होत्रा ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच नियमित रूप से चल रही है। यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से सोनीपत से जींद की ओर अधिक यात्री सफर कर रहे हैं। ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रदूषणरहित और शांत सफर है। साथ ही जींद से सोनीपत के बीच मात्र 25 रुपये किराया होने के कारण यात्रियों को किफायती और आधुनिक यात्रा का विकल्प भी मिल रहा है।
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। कहा, हाइड्रोजन ट्रेन का परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है और अब देश के अन्य रेल मार्गों पर भी इस अत्याधुनिक तकनीक के ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
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ट्रेन का सोनीपत, पानीपत और नई दिल्ली रेलखंड पर भी परीक्षण किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान ट्रेन की अधिकतम गति, सुरक्षा मानकों, ब्रेकिंग सिस्टम, हाइड्रोजन फ्यूल सेल की कार्यक्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार अब तक सभी परीक्षण संतोषजनक रहे हैं और ट्रेन ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया है।
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कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और ध्वनि प्रदूषण भी कम रहेगा
हाइड्रोजन आधारित यह ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जा रही है। इसके संचालन से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जबकि ध्वनि प्रदूषण भी बेहद कम रहेगा। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को नई दिशा देगी।
दूसरे मार्गों पर भी ट्रायल की चल रही है योजना
सफल परीक्षण के बाद रेलवे अब अन्य उपयुक्त रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन की योजना बना रहा है। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारियां और आधारभूत ढांचे को विकसित करने की प्रक्रिया जारी है। भविष्य में ऐसे रेलखंडों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां वर्तमान में डीजल ट्रेनों का संचालन अधिक होता है।
प्रदूषण रहित है ट्रेन का सफर
ट्रेन मैनेजर कुलदीप मल्होत्रा ने बताया कि हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच नियमित रूप से चल रही है। यात्रियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से सोनीपत से जींद की ओर अधिक यात्री सफर कर रहे हैं। ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रदूषणरहित और शांत सफर है। साथ ही जींद से सोनीपत के बीच मात्र 25 रुपये किराया होने के कारण यात्रियों को किफायती और आधुनिक यात्रा का विकल्प भी मिल रहा है।