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Jind News: चिकित्सकों के बिना अस्पताल बीमार, कैसे मिले उपचार
Wed, 14 Feb 2024 02:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 14 Feb 2024 02:03 AM IST
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13जेएनडी09 : नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन। संवाद
जींद। जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी की वजह से स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करना बेमानी होगा। वर्तमान में नागरिक पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा था। वहीं अब तीन चिकित्सकों का तबादला होने के कारण उनको रिलीव कर दिया गया है। इसके अलावा एक चिकित्सक ने वीआरएस के लिए अप्लाई किया हुआ है। एक चिकित्सक ने तबादले के लिए आवेदन किया है। इन चिकित्सकों में तीन स्पेशलिस्ट चिकित्सक शामिल हैं। ऐसे में अस्पताल में आईसीयू को शुरू करने की बात भी बेमानी साबित हो रही है।
जिला मुख्यालय पर 1975 में नागरिक अस्पताल की शुरुआत हुई थी। उस समय से लेकर आजतक जिले में चिकित्सकों की कमी कभी भी दूर नहीं हुई। जींद अस्पताल की बात की जाए तो यहां 55 चिकित्सकों की आवश्यकता है, लेकिन इस समय 27 ही नियमित काम कर रहे हैं। पांच चिकित्सक एनएचएम के तहत कार्यरत हैं। तीन चिकित्सक अब अस्पताल को छोड़ गए हैं। इनमें एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. गितांशु, इमरजेंसी से डाॅ. पूनम व बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. सीमा वशिष्ठ का यहां से तबादला हो चुका है। मुख्यालय पर 200 बेड का अस्पताल बना हुआ है। वहीं, सफीदों, नरवाना तथा उचाना सब डिविजन पर 100-100 बेड के अस्पताल हैं।
उधर, जुलाना, पिल्लूखेडा, अलेवा, उझाना समेत आठ स्थानों पर सीएचसी बनाए गए हैं। वहीं जिले में 26 पीएचसी बनाई गई हैं। 185 हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं, जिन पर लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने का जिम्मा है। ऐसे में स्वत: अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना चिकित्सकों के मरीजों को कैसे स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
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बिना चिकित्सकों के कैसे चलेगा आईसीयू
नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में आईसीयू बनकर तैयार है, लेकिन चिकित्सकों के बिना इसे शुरू कर पाना मुश्किल है। आईसीयू के लिए 20 स्टाफ नर्स की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी। अस्पताल में पहले ही स्टाफ की कमी है। नागरिक अस्पताल में 151 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 99 ही कार्यरत हैं। आईसीयू चलाने के लिए हर समय कम से कम चार स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी चाहिए।
विशेषज्ञों चिकित्सकों की कमी के बावजूद भी उपचार की बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। तीन चिकित्सकों का तबादला हुआ है। उन्हें रिलीव किया जा चुका है। स्वास्थ्य निदेशालय से समय-समय पर चिकित्सकों तथा अन्य कर्मचारियों की मांग की जाती है। -डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।
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जिला मुख्यालय पर 1975 में नागरिक अस्पताल की शुरुआत हुई थी। उस समय से लेकर आजतक जिले में चिकित्सकों की कमी कभी भी दूर नहीं हुई। जींद अस्पताल की बात की जाए तो यहां 55 चिकित्सकों की आवश्यकता है, लेकिन इस समय 27 ही नियमित काम कर रहे हैं। पांच चिकित्सक एनएचएम के तहत कार्यरत हैं। तीन चिकित्सक अब अस्पताल को छोड़ गए हैं। इनमें एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. गितांशु, इमरजेंसी से डाॅ. पूनम व बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. सीमा वशिष्ठ का यहां से तबादला हो चुका है। मुख्यालय पर 200 बेड का अस्पताल बना हुआ है। वहीं, सफीदों, नरवाना तथा उचाना सब डिविजन पर 100-100 बेड के अस्पताल हैं।
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उधर, जुलाना, पिल्लूखेडा, अलेवा, उझाना समेत आठ स्थानों पर सीएचसी बनाए गए हैं। वहीं जिले में 26 पीएचसी बनाई गई हैं। 185 हेल्थ सेंटर बनाए गए हैं, जिन पर लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने का जिम्मा है। ऐसे में स्वत: अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना चिकित्सकों के मरीजों को कैसे स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
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बिना चिकित्सकों के कैसे चलेगा आईसीयू
नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में आईसीयू बनकर तैयार है, लेकिन चिकित्सकों के बिना इसे शुरू कर पाना मुश्किल है। आईसीयू के लिए 20 स्टाफ नर्स की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी। अस्पताल में पहले ही स्टाफ की कमी है। नागरिक अस्पताल में 151 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 99 ही कार्यरत हैं। आईसीयू चलाने के लिए हर समय कम से कम चार स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी चाहिए।
विशेषज्ञों चिकित्सकों की कमी के बावजूद भी उपचार की बेहतर सुविधाएं दी जा रही हैं। तीन चिकित्सकों का तबादला हुआ है। उन्हें रिलीव किया जा चुका है। स्वास्थ्य निदेशालय से समय-समय पर चिकित्सकों तथा अन्य कर्मचारियों की मांग की जाती है। -डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।

13जेएनडी09 : नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन। संवाद