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Jind News: होलाष्टक शुरू, होलिका दहन तक शुभ कार्यों पर रहेगी रोक
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24जेएनडी13: भारतेंदु शास्त्री।
जींद। होलाष्टक मंगलवार से शुरू हो गए हैं। अब शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। यह फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानि होलिका दहन तक चलते हैं। दो मार्च को होलिका दहन के बाद होलाष्टक समाप्त हो जाएंगे।
शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी पंडित भारतेंदु शांडिल्य ने बताया कि होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह मूंडन, नामकरण, गृह प्रवेश आदि के शुभ कार्य करना वर्जित है। होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस कारण शुभ कार्य वर्जित बताए गए है।
होलाष्टक की आठ रात्रियों का काफी अधिक महत्व है। इन आठ रात्रियों में की गई साधनाएं जल्द सफल होती हैं। इन रातों में तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधनाएं करते हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष की मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों की अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं।
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अष्टमी को चंद्र, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, पूर्णिमा को राहु उग्र स्थिति में रहता है। नौ ग्रहों की उग्र स्थिति की वजह से इन दिनों में मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है।
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शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी पंडित भारतेंदु शांडिल्य ने बताया कि होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह मूंडन, नामकरण, गृह प्रवेश आदि के शुभ कार्य करना वर्जित है। होलाष्टक में सभी ग्रह उग्र अवस्था में आ जाते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस कारण शुभ कार्य वर्जित बताए गए है।
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होलाष्टक की आठ रात्रियों का काफी अधिक महत्व है। इन आठ रात्रियों में की गई साधनाएं जल्द सफल होती हैं। इन रातों में तंत्र-मंत्र से जुड़े लोग विशेष साधनाएं करते हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष की मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों की अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग ग्रह उग्र स्थिति में रहते हैं।
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अष्टमी को चंद्र, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, पूर्णिमा को राहु उग्र स्थिति में रहता है। नौ ग्रहों की उग्र स्थिति की वजह से इन दिनों में मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जोड़ा जाता है।