{"_id":"6a3ec6d04909865ae202927d","slug":"her-journey-began-in-seventh-grade-and-today-handball-star-sushma-is-serving-in-the-railways-jind-news-c-199-1-jnd1005-155738-2026-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: सातवीं कक्षा से शुरू हुआ सफर, आज रेलवे में सेवाएं दे रहीं हैंडबॉल स्टार सुषमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: सातवीं कक्षा से शुरू हुआ सफर, आज रेलवे में सेवाएं दे रहीं हैंडबॉल स्टार सुषमा
विज्ञापन
फोटो 6 नरवाना। हैंडबॉल खेल प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाते हुए खिलाड़ी सुषमा। स्रोत खिलाड़ी।
नरवाना। दनौदा गांव की हैंडबॉल खिलाड़ी सुषमा ने संघर्ष और मेहनत के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गया है। सुषमा ने अपने खेल करियर की शुरुआत स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान की थी।
शुरुआती दौर में उन्होंने ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। निरंतर मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
उन्होंने 2018 में जकार्ता (इंडोनेशिया) और 2023 में चीन में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय हैंडबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया। दोनों प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई और देश का गौरव बढ़ाया।
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्तर पर भी सुषमा का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने 38वें नेशनल गेम्स में बीच हैंडबॉल में रजत पदक और इंडोर हैंडबॉल में स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा का नाम रोशन किया। नेशनल गेम्स देश की सबसे प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में से एक हैं जिनमें पदक जीतना बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उन्हें भारतीय रेलवे में नौकरी मिली। पिछले आठ वर्षों से वह रेलवे में कार्यरत रहते हुए खेलों में भी सक्रिय हैं और लगातार युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, मेहनत ही असली कुंजी है : कोच
सुषमा के कोच बिजेंद्र और राजेंद्र ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो खिलाड़ी नियमित अभ्यास, अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ते हैं वहीं देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुषमा ने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और हर चुनौती को अवसर में बदला। उनकी उपलब्धियां दिखाती हैं कि गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है बस सही मार्गदर्शन, मेहनत और आत्मविश्वास की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय खेल और शिक्षा पर ध्यान दें।
विज्ञापन
शुरुआती दौर में उन्होंने ब्लॉक स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। निरंतर मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
विज्ञापन
उन्होंने 2018 में जकार्ता (इंडोनेशिया) और 2023 में चीन में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय हैंडबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया। दोनों प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन ने टीम की सफलता में अहम भूमिका निभाई और देश का गौरव बढ़ाया।
विज्ञापन
राष्ट्रीय स्तर पर भी सुषमा का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने 38वें नेशनल गेम्स में बीच हैंडबॉल में रजत पदक और इंडोर हैंडबॉल में स्वर्ण पदक जीतकर हरियाणा का नाम रोशन किया। नेशनल गेम्स देश की सबसे प्रतिष्ठित खेल प्रतियोगिताओं में से एक हैं जिनमें पदक जीतना बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते उन्हें भारतीय रेलवे में नौकरी मिली। पिछले आठ वर्षों से वह रेलवे में कार्यरत रहते हुए खेलों में भी सक्रिय हैं और लगातार युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं, मेहनत ही असली कुंजी है : कोच
सुषमा के कोच बिजेंद्र और राजेंद्र ने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो खिलाड़ी नियमित अभ्यास, अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ते हैं वहीं देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुषमा ने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और हर चुनौती को अवसर में बदला। उनकी उपलब्धियां दिखाती हैं कि गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं है बस सही मार्गदर्शन, मेहनत और आत्मविश्वास की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय गंवाने के बजाय खेल और शिक्षा पर ध्यान दें।