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Jind News: हेपेटाइटिस की नहीं हो रही जांच, बिना सैंपल दिए लौट रहे लोग
Mon, 24 Apr 2023 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 24 Apr 2023 11:57 PM IST
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जींद। नागरिक अस्पताल में सोमवार को हेपेटाइटिस की जांच को लेकर सैंपल नहीं होने के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोमवार होने के चलते काफी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचे और ओपीडी पर्ची काउंटर पर लगी लंबी लाइनों में खड़े होकर स्लिप बनवाई, लेकिन जब वह सैंपल के लिए पहुंचे तो उनके सैंपल नहीं लिए गए। इसके चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। स्वास्थ्य अधिकारियों की बात पर विश्वास किया जाए तो सैंपल लेकर पीजीआई रोहतक और मेडिकल कॉलेज खानपुर भेजे जाते थे, लेकिन वहां से सैंपल नहीं भेजे जाने के आदेश हुए हैं। इसपर स्वास्थ्य अधिकारियों ने पत्र लिख कर उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है।
नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस बी, सी के उपचार को लेकर पहले सैंपल लेकर निजी लैब को भेजे जाते थे। इसके लिए मरीजों को कूपन जारी किया जाता था। लैब पर जाकर मरीज कूपन दिखा कर अपना सैंपल दे देता था। इसका भुगतान लैब को सरकार करती थी। कोरोना महामारी के दौरान जींद के उचाना में आरटीपीसीआर लैब स्थापित की गई। इसके बाद उचाना लैब में सैंपलों की जांच होने लगी। एक पखवाड़े से आउटसोर्स पर लगे लैब टेक्निशियन (एलटी) को नौकरी से हटाने के बाद अब यहां भी सैंपलों की जांच नहीं हो रही है।
हेपेटाइटिस बी, सी एक लक्षण रहित बीमारी है। जो ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक छिपी रहती है। लीवर में गंभीर संक्रमण होने के बाद ही इसके लक्षण दिखते हैं। इलाज नहीं मिलने से लीवर सिकुड़ जाता है। इस स्थिति को लीवर सिरोसिस कहते हैं। इसके अलावा मरीज को लीवर में कैंसर भी हो सकता है। वहीं क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी में शरीर इस वायरस से मुक्त नहीं हो पाता और यह विषाणु शरीर में ही पालता रहता है। लीवर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। ऐसे में इस बीमारी के लक्षणों को लेकर नागरिक अस्पताल में सैंपल लेकर जांच के लिए पीजीआई रोहतक या मेडिकल कॉलेज खानपुर भेजे जाते हैं। वहां काम की अधिकता होने के चलते सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। इस कारण सोमवार को आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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हेपेटाइटिस सी, बी नोडल अधिकारी डाॅ. बिजेंद्र ढांडा ने बताया कि सैंपलों को लेकर उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिख दिया है। रोहतक और खानपुर पीजीआई ने सैंपल लेने से मना कर दिया है। सैंपलिंग को लेकर जो दिशा-निर्देश होंगे, उसके आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
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नागरिक अस्पताल में हेपेटाइटिस बी, सी के उपचार को लेकर पहले सैंपल लेकर निजी लैब को भेजे जाते थे। इसके लिए मरीजों को कूपन जारी किया जाता था। लैब पर जाकर मरीज कूपन दिखा कर अपना सैंपल दे देता था। इसका भुगतान लैब को सरकार करती थी। कोरोना महामारी के दौरान जींद के उचाना में आरटीपीसीआर लैब स्थापित की गई। इसके बाद उचाना लैब में सैंपलों की जांच होने लगी। एक पखवाड़े से आउटसोर्स पर लगे लैब टेक्निशियन (एलटी) को नौकरी से हटाने के बाद अब यहां भी सैंपलों की जांच नहीं हो रही है।
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हेपेटाइटिस बी, सी एक लक्षण रहित बीमारी है। जो ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक छिपी रहती है। लीवर में गंभीर संक्रमण होने के बाद ही इसके लक्षण दिखते हैं। इलाज नहीं मिलने से लीवर सिकुड़ जाता है। इस स्थिति को लीवर सिरोसिस कहते हैं। इसके अलावा मरीज को लीवर में कैंसर भी हो सकता है। वहीं क्रॉनिक हेपेटाइटिस सी में शरीर इस वायरस से मुक्त नहीं हो पाता और यह विषाणु शरीर में ही पालता रहता है। लीवर पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। ऐसे में इस बीमारी के लक्षणों को लेकर नागरिक अस्पताल में सैंपल लेकर जांच के लिए पीजीआई रोहतक या मेडिकल कॉलेज खानपुर भेजे जाते हैं। वहां काम की अधिकता होने के चलते सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। इस कारण सोमवार को आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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हेपेटाइटिस सी, बी नोडल अधिकारी डाॅ. बिजेंद्र ढांडा ने बताया कि सैंपलों को लेकर उन्होंने उच्च अधिकारियों को लिख दिया है। रोहतक और खानपुर पीजीआई ने सैंपल लेने से मना कर दिया है। सैंपलिंग को लेकर जो दिशा-निर्देश होंगे, उसके आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।