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निलंबित चिकित्सकों के पक्ष में उतरी एचसीएमएस
Updated Wed, 01 Jul 2015 12:28 AM IST
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सामान्य अस्पताल के दंत चिकित्सा डॉ. रमेश पांचाल और शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा वशिष्ठ के निलंबन के फैसले को हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन (एचसीएमएस) ने जल्द बाजी का फैसला बताया है।
स्वास्थ्य मंत्री के इस आदेश के विरोध में अब एचसीएमएस भी उतर आई है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने 26 जून को जींद के सामान्य अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था इस दौरान दोनों डॉक्टरों के निलंबन का आदेश दिया था। एचसीएमएस की जिला इकाई के सदस्यों ने इस मामले को अपनी राज्य कार्यकारिणी के समक्ष रखते हुए दोनों चिकित्सकों के निलंबन के आदेशों को वापस लेने की मांग की है।
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वहीं स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा अस्पताल से बाहर से दवाइयां लिखे जाने की शिकायत करने वाली महिला भी डॉ. सीमा वशिष्ठ के पक्ष में उतर आई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने उनकी शिकायत को बिना सही तरीके से समझे ही डॉ. सीमा वशिष्ठ को निलंबित कर दिया।
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एचसीएमएस के जिला प्रधान डॉ. देवेंद्र बिंदलिश, उपप्रधान डॉ. जेके मान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज एक अच्छे व ईमानदार मंत्री हैं लेकिन उनके द्वारा सामान्य अस्पताल के दो चिकित्सकों को निलंबित करने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। इससे सभी चिकित्सकों के मान-सम्मान को ठेस पहुंची है।
उन्होंने बिना जांच पड़ताल के ही दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल तथा शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा वशिष्ठ को निलंबित कर दिया। जबकि दोनों चिकित्सकों की कोई गलती नहीं थी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि दोनों चिकित्सक पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ड्यूटी करते हैं। डॉ. रमेश पांचाल द्वारा अपने सीनियर अधिकारी से छुट्टी की मंजूरी ली गई थी। वहीं डॉ. सीमा वशिष्ठ द्वारा जिस बच्चे के लिए दवाइयां लिखी गई थी उसका उपचार जनवरी से उनके पास चल रहा था और जिस समय डॉ. सीमा द्वारा मरीज को जो दवाइयां लिखी गई थी उस समय वह दवाइयां स्टॉक में उपलब्ध थी। स्टॉक रजिस्टर में दर्ज रिकार्ड के अनुसार वह दवाइयां मरीज को उपलब्ध भी कराई गई थी, उनके पास सबूत भी हैं।
यह बोली शिकायतकर्ता
गांव चाबरी निवासी उर्मीला ने कहा कि वह जनवरी 2015 से डॉ. सीमा वशिष्ठ के पास अपनी पोती जहानवी उर्फ ईशु का उपचार करा रही है। डॉ. सीमा द्वारा जो दवाइयां लिखी गई थी वह उन्हें अस्पताल के स्टोर से उपलब्ध हो गई थी। जिस दिन स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का दौरा किया उस दिन तो वह पेट दर्द की दवाई लेने के लिए अस्पताल आई थी। उर्मीला ने कहा कि उसने तो स्वास्थ्य मंत्री को सिर्फ यही शिकायत की थी कि अस्पताल के स्टोर में दवाइयों की व्यवस्था की जाए।
चिकित्सकों ने सुनाई व्यथा
बच्चे नहीं जा पाते कोचिंग
दंत चिकित्सक डॉ. रमेश पांचाल ने कहा कि उसने पूरी ईमानदारी से अपने मरीजों की सेवा की है। इसी कारण सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है लेकिन स्वास्थ्य मंत्री के दो सेकेंड के वर्ड ने उसके 19 वर्ष के कॅरियर पर धब्बा लगा दिया है। डॉ. पांचाल ने कहा कि सामाजिक अपमान की सजा जेल की सजा से भी बड़ी होती है और आज वह इसकी सजा भुगत रहे हैं। जबकि इसमें उसकी कोई गलती भी नहीं है। डॉ. पांचाल ने कहा कि आज समाज में उसकी प्रतिष्ठा दांव पर है। आज समाज में हो रही उसकी बदनामी के कारण न तो उसका बेटा स्वीमिंग के लिए जा पा रहा है और न ही उसकी बेटी कोचिंग अटेंड कर पा रही है। उसका पूरा परिवार सदमे में है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से मांग करते हुए कहा कि पहले इस पूरे मामले की जांच कराई जाए यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो विभाग जो सजा उसे देगा वह उसे मंजूर है।
घर से निकलना हो गया है बंद
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा वशिष्ठ ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जल्दबाजी में दिए गए आदेशों के कारण उनकी और परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। समाज में हो रही बदनामी के कारण उसकी सुबह की सैर भी छूट गई है। वह और उनका परिवार मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहा है। समाज में हो रही बदनामी के डर से उसके परिवार के सदस्य घर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं। डॉ. सीमा ने कहा कि बच्चे के उपचार के लिए जो दवा लिखी गई थी वह सोडियम वेल्प्रेट थी, जो उस वक्त अस्पताल के स्टॉक में भी मौजूद थी और स्टॉक रजिस्टर से मिले रिकार्ड के अनुसार वह दवाई उस मरीज को भी उपलब्ध कराई गई थी लेकिन स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जल्दबाजी में दिए गए आदेशों के कारण उनके कॅरियर पर दाग लग गया है।