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Jind News: तेज बारिश से कपास की फसल पर मंडराया खतरा
Sun, 31 Aug 2025 11:45 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:45 PM IST
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31जेएनडी11-बारिश के पानी से जल भराव में डूबी कपास की फसल। अधिकारी
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नरवाना। क्षेत्र में रविवार को हुई तेज बारिश के बाद खेतों में जलभराव हो गया है। जलभराव से खेतों में खड़ी फसलों पर नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। किसानों की चिंता कपास की फसल को लेकर ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि जलभराव लंबे समय तक रहने पर कपास के पौधे सूखने और फसल खराब होने का खतरा रहता है।
कृषि विभाग की टीम रविवार को खेतों में पहुंची। टीम ने दनौदा, धरौदी, ईस्माइलपुर, खानपुर, अमरगढ़, नेहरा और कर्मगढ़ सहित कई गांवों के खेतों का निरीक्षण किया। खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोर ने बताया कि क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश से कपास की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खेतों में पानी भर जाने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है।
डॉ. मोर ने किसानों को फसलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। जिन किसानों ने अपनी कपास की फसलों का बीमा करवा रखा है वे तुरंत 14447 नंबर पर कॉल करके खेतों में हुए जलभराव और संभावित नुकसान की जानकारी दें ताकि समय रहते बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू हो सके।
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वहीं, जिन किसानों ने बीमा नहीं करवाया है उन्हें भी भविष्य की क्षतिपूर्ति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। यदि सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाता है तो किसान तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इस तरह की प्राकृतिक आपदा से फसलों को बचाना मुश्किल है लेकिन किसान सतर्कता और समय पर सूचना देकर अपने नुकसान की भरपाई का रास्ता जरूर निकाल सकते हैं।
विभाग की ओर से भी लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि हर साल भारी बारिश के समय यही स्थिति बनती है। खेतों में निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पानी लंबे समय तक भरा रहता है जिससे फसलें खराब हो जाती हैं। किसानों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग भी की है। इस मौके पर एसडीओ डॉ. सुनील दलाल, तकनीकी सहायक डॉ. सुरेंद्र बूरा मौजूद रहे।
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कृषि विभाग की टीम रविवार को खेतों में पहुंची। टीम ने दनौदा, धरौदी, ईस्माइलपुर, खानपुर, अमरगढ़, नेहरा और कर्मगढ़ सहित कई गांवों के खेतों का निरीक्षण किया। खंड कृषि अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोर ने बताया कि क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश से कपास की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। खेतों में पानी भर जाने से पौधों की जड़ें खराब हो सकती हैं। उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है।
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डॉ. मोर ने किसानों को फसलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। जिन किसानों ने अपनी कपास की फसलों का बीमा करवा रखा है वे तुरंत 14447 नंबर पर कॉल करके खेतों में हुए जलभराव और संभावित नुकसान की जानकारी दें ताकि समय रहते बीमा क्लेम की प्रक्रिया शुरू हो सके।
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वहीं, जिन किसानों ने बीमा नहीं करवाया है उन्हें भी भविष्य की क्षतिपूर्ति के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। यदि सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाता है तो किसान तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इस तरह की प्राकृतिक आपदा से फसलों को बचाना मुश्किल है लेकिन किसान सतर्कता और समय पर सूचना देकर अपने नुकसान की भरपाई का रास्ता जरूर निकाल सकते हैं।
विभाग की ओर से भी लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि हर साल भारी बारिश के समय यही स्थिति बनती है। खेतों में निकासी की उचित व्यवस्था न होने से पानी लंबे समय तक भरा रहता है जिससे फसलें खराब हो जाती हैं। किसानों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग भी की है। इस मौके पर एसडीओ डॉ. सुनील दलाल, तकनीकी सहायक डॉ. सुरेंद्र बूरा मौजूद रहे।