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Jind News: तेज हवा के साथ बारिश, जमीन पर बिछी 50 हजार एकड़ धान की फसल
Tue, 07 Oct 2025 11:32 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 07 Oct 2025 11:32 PM IST
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07जेएनडी10: रामराजी ढुल।
जींद। जिले में दो दिन से तेज हवा के साथ हो रही बारिश किसानों पर दोहरी मार कर रही है। एक तरफ जहां खेतों में खड़ी लगभग 50 हजार एकड़ धान की फसल जमीन पर बिछ गई। वहीं दूसरी ओर मंडियों में पड़ी धान भी बारिश में भीग गई।
सोमवार को जिलेभर में हुई 10 मिमी बारिश में विशेष रूप से बासमती, 1718 और अन्य उच्च मूल्यवान किस्मों की धान प्रभावित हुई है जो किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। जिले में सबसे ज्यादा बारिश जुलाना में 25 मिमी, जींद में 18 मिमी, नरवाना में 16 मिमी, सफीदों में तीन मिमी, उचाना में पांच मिमी, पिल्लूखेड़ा में दो मिमी व अलेवा में सात मिमी हुई। कई क्षेत्रों में आंधी तेज होने के कारण खेतों में फसलें पूरी तरह गिर गई है।
खड़ी फसल गिरने से पैदावार पर कापी प्रभाव पड़ेगा। धान की कटाई करने में भी किसानों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। खड़ी हुई धान की फसल को मशीन व मजदूर आसानी से काटते हैं लेकिन धान गिरने से दोनों के लिए परेशानी बनी है।
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बासमती धान को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसकी लंबाई ज्यादा होती है। इसके चलते यह सबसे अधिक प्रभावित हुई। धान 1718 जैसी किस्में बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी होने के बावजूद मौसम की मार से नहीं बच सकीं।
किसानों का कहना है कि फसल गिरने से अनाज में कालापन आने का खतरा है जो निर्यात मूल्य को प्रभावित करेगा। अब यह प्राकृतिक आपदा और मुश्किलें बढ़ा रही है। मंडियों में स्थिति बरसात के बाद ज्यादा खराब होने का डर बना हुआ है। इस बारिश में जुलाना अनाज मंडी में सबसे ज्यादा धान भीगा।
भीग रही मंडियों में पड़ी धान
जिलेभर की मंडियों में मंगलवार तक 4.60 लाख क्विंटल धान की आवक हुई है जबकि 1.88 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई है। मंडियों में पूरी व्यवस्था न होने से बारिश के कारण लगातार धान भीग रही है। वहीं जींद मंडी में अब भी धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
बाक्स
सरकार को चाहिए कि किसानों की फसल की तत्काल विशेष गिरदावरी करवाए और मुआवजा दिया जाए। एक माह पहले हुई बरिश में भी जिले में हजारों एकड़ में धान खराब हो गई थी। उसका भी मुआवजा अब तक नहीं मिला है। अब खेत में खड़ी फसल बरसात व आंधी के कारण गिरकर खराब होने की कगार पर है। -रामराजी ढुल, प्रैस प्रवक्ता भाकियू
बाक्स
क्षति पूर्ति पोर्टल सरकार को खोलना चाहिए ताकि जिन किसानों की फसल बरसात व आंधी के कारण खराब हुई है। वह अपनी फसल के खराबे को पोर्टल पर अपलोड कर सकें। अभी तक सरकार ने पोर्टल को नहीं खोला है।-फुल सिंह श्योकंद।
बाक्स
फसल खराबे को लेकर अभी तक मुख्यालय से निर्देश नहीं आए हैं। मुख्यालय की तरफ से ही क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाएगा। अगर गिरदावरी के निर्देश मिले तो पटवारियों की ड्यूटी लगाकर किसानों की फसलों की जांच करवाई जाएगी।-राजकुमार, डीआरओ जींद
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सोमवार को जिलेभर में हुई 10 मिमी बारिश में विशेष रूप से बासमती, 1718 और अन्य उच्च मूल्यवान किस्मों की धान प्रभावित हुई है जो किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। जिले में सबसे ज्यादा बारिश जुलाना में 25 मिमी, जींद में 18 मिमी, नरवाना में 16 मिमी, सफीदों में तीन मिमी, उचाना में पांच मिमी, पिल्लूखेड़ा में दो मिमी व अलेवा में सात मिमी हुई। कई क्षेत्रों में आंधी तेज होने के कारण खेतों में फसलें पूरी तरह गिर गई है।
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खड़ी फसल गिरने से पैदावार पर कापी प्रभाव पड़ेगा। धान की कटाई करने में भी किसानों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। खड़ी हुई धान की फसल को मशीन व मजदूर आसानी से काटते हैं लेकिन धान गिरने से दोनों के लिए परेशानी बनी है।
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बासमती धान को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसकी लंबाई ज्यादा होती है। इसके चलते यह सबसे अधिक प्रभावित हुई। धान 1718 जैसी किस्में बैक्टीरियल ब्लाइट प्रतिरोधी होने के बावजूद मौसम की मार से नहीं बच सकीं।
किसानों का कहना है कि फसल गिरने से अनाज में कालापन आने का खतरा है जो निर्यात मूल्य को प्रभावित करेगा। अब यह प्राकृतिक आपदा और मुश्किलें बढ़ा रही है। मंडियों में स्थिति बरसात के बाद ज्यादा खराब होने का डर बना हुआ है। इस बारिश में जुलाना अनाज मंडी में सबसे ज्यादा धान भीगा।
भीग रही मंडियों में पड़ी धान
जिलेभर की मंडियों में मंगलवार तक 4.60 लाख क्विंटल धान की आवक हुई है जबकि 1.88 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई है। मंडियों में पूरी व्यवस्था न होने से बारिश के कारण लगातार धान भीग रही है। वहीं जींद मंडी में अब भी धान की सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है।
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सरकार को चाहिए कि किसानों की फसल की तत्काल विशेष गिरदावरी करवाए और मुआवजा दिया जाए। एक माह पहले हुई बरिश में भी जिले में हजारों एकड़ में धान खराब हो गई थी। उसका भी मुआवजा अब तक नहीं मिला है। अब खेत में खड़ी फसल बरसात व आंधी के कारण गिरकर खराब होने की कगार पर है। -रामराजी ढुल, प्रैस प्रवक्ता भाकियू
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क्षति पूर्ति पोर्टल सरकार को खोलना चाहिए ताकि जिन किसानों की फसल बरसात व आंधी के कारण खराब हुई है। वह अपनी फसल के खराबे को पोर्टल पर अपलोड कर सकें। अभी तक सरकार ने पोर्टल को नहीं खोला है।-फुल सिंह श्योकंद।
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फसल खराबे को लेकर अभी तक मुख्यालय से निर्देश नहीं आए हैं। मुख्यालय की तरफ से ही क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाएगा। अगर गिरदावरी के निर्देश मिले तो पटवारियों की ड्यूटी लगाकर किसानों की फसलों की जांच करवाई जाएगी।-राजकुमार, डीआरओ जींद

07जेएनडी10: रामराजी ढुल।

07जेएनडी10: रामराजी ढुल।