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Jind News: ऑनलाइन तबादला नीति से बाहर रखने की मांग लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सिविल सर्जन कार्यालय घेरा
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15जेएनडी17: अपनी मांगों को लेकर स्वास्थ्यकर्मी सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली को ज्ञापन सौंपते हुए।
- फोटो : credit
जींद। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन के आह्वान पर स्वास्थ्य कर्मचारियों ने वीरवार को जिला प्रधान प्रदीप लाठर की अगुवाई में सिविल सर्जन कार्यालय पर धरना दिया। कर्मचारियों ने ऑनलाइन तबादला नीति से बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों को बाहर रखने और विभाग की स्थानीय समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
सीएमओ डॉ. सुमन कोहली स्वास्थ्यकर्मियों का ज्ञापन लेने के लिए नहीं आई तो नाराज कर्मचारियों ने सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली के कार्यालय का घेराव कर उनके खिलाफ नारेबाजी की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि 31 अक्तूबर तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो नवंबर में कार्यालय के बाहर क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।
राज्य प्रेस सचिव संदीप कुंडू ने कहा कि ऑनलाइन तबादला नीति के तहत रेशनलाइजेशन के नाम पर कई जिलों में पद समाप्त किए गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का खतरा है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी मलेरिया, डेंगू की रोकथाम, सर्वेक्षण, टीकाकरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभाते हैं। बड़े पैमाने पर तबादलों से स्थानीय लोगों के साथ बना विश्वास प्रभावित होगा। जिला प्रधान प्रदीप लाठर, उपप्रधान नीलम और वित्त सचिव अमरजीत ने खाली पड़े हजारों पदों पर नियमित भर्ती की मांग की। उन्होंने कहा कि सीईटी पास एमपीएचडब्ल्यू डिप्लोमाधारक भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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स्थानीय समस्याओं का मांगपत्र सौंपा
कर्मचारियों ने कार्यालय के लिए जगह, हब कटर, एमसीपी कार्ड और जीवनरक्षक दवाइयों की उपस्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा वर्ष 2020-2023 और 2024-2027 की बकाया एलटीसी का भुगतान, एसीपी के मामले समय पर निदेशालय भेजने और उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करने की मांग उठाई।
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सीएमओ डॉ. सुमन कोहली स्वास्थ्यकर्मियों का ज्ञापन लेने के लिए नहीं आई तो नाराज कर्मचारियों ने सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली के कार्यालय का घेराव कर उनके खिलाफ नारेबाजी की। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि 31 अक्तूबर तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो नवंबर में कार्यालय के बाहर क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा।
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राज्य प्रेस सचिव संदीप कुंडू ने कहा कि ऑनलाइन तबादला नीति के तहत रेशनलाइजेशन के नाम पर कई जिलों में पद समाप्त किए गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का खतरा है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी मलेरिया, डेंगू की रोकथाम, सर्वेक्षण, टीकाकरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अहम भूमिका निभाते हैं। बड़े पैमाने पर तबादलों से स्थानीय लोगों के साथ बना विश्वास प्रभावित होगा। जिला प्रधान प्रदीप लाठर, उपप्रधान नीलम और वित्त सचिव अमरजीत ने खाली पड़े हजारों पदों पर नियमित भर्ती की मांग की। उन्होंने कहा कि सीईटी पास एमपीएचडब्ल्यू डिप्लोमाधारक भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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स्थानीय समस्याओं का मांगपत्र सौंपा
कर्मचारियों ने कार्यालय के लिए जगह, हब कटर, एमसीपी कार्ड और जीवनरक्षक दवाइयों की उपस्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। इसके अलावा वर्ष 2020-2023 और 2024-2027 की बकाया एलटीसी का भुगतान, एसीपी के मामले समय पर निदेशालय भेजने और उपस्वास्थ्य केंद्रों पर सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करने की मांग उठाई।