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अबोध शिशु बनकर मां को पुकारो, मां दौड़ी चली आएंगी : आचार्य पवन शर्मा
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15जेएनडी07: मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए आचार्य पवन शर्मा व अन्य श्रद्धालु। स्रोत: पुजारी
- फोटो : Samvad
जींद। माता वैष्णो देवी धाम में आयोजित नवर्ण महायज्ञ के चौथी दिन बुधवार रात आचार्य पवन शर्मा ने मां भवानी की ममता और भक्तों के प्रति उनके वात्सल्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मां को सच्चे मन से अबोध शिशु की तरह पुकारने की जरूरत है। जब भक्त निष्कपट भाव से मां की शरण में जाता है तो मां उसे अपने आंचल में समेटने के लिए अवश्य आती हैं। उन्होंने मां और संतान के अटूट प्रेम का उदाहरण देते हुए समझाया कि सच्ची भक्ति दिखावे में नहीं, बल्कि मन की निश्छल पुकार और पूर्ण समर्पण में निहित है।
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार छोटा बच्चा खिलौनों में लगा रहता है तो मां निश्चिंत होकर घर के काम करती रहती है।लेकिन जब वही बच्चा खिलौने छोड़कर व्याकुल होकर केवल मां-मां पुकारने लगता है और किसी की बात नहीं सुनता, तो मां अपने सारे काम छोड़कर दौड़ी चली आती है। वह बच्चे के आंसू पोंछकर उसे तुरंत अपने आंचल में छिपा लेती है।
उन्होंने कहा कि जगतजननी मां भवानी के साथ भी यही भाव जुड़ा है। मां हमारी बाहरी गतिविधियों के बजाय हमारी आंतरिक भावना को देखती हैं। सच्चे मन से की गई पुकार और निष्कपट भक्ति ही मां के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
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इस अवसर पर ट्रस्टी जैन धर्मार्थ अस्पताल के एससी जैन, हरीश एलाबादी, गौरव गुंबर, बीरबल पृथ्वी, विनोद जैन, गुलशन गांधी और अशोक आहूजा ने सपरिवार मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर महायज्ञ में आहुति अर्पित की। इस अवसर पर अनिल मंगला, नरेश अरोड़ा, कृष्ण गोपाल माटा, विकास ग्रोवर, राजबीर सिंह तंवर, अश्विनी वधवा, अशोक गुलाटी, सुरेश कोचर, तिलक जुनेजा, गुलशन कोचर, परमजीत सेठी, पूर्ण गिरधर, बिट्टू आहूजा और विनीत शर्मा मौजूद रहे।
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आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार छोटा बच्चा खिलौनों में लगा रहता है तो मां निश्चिंत होकर घर के काम करती रहती है।लेकिन जब वही बच्चा खिलौने छोड़कर व्याकुल होकर केवल मां-मां पुकारने लगता है और किसी की बात नहीं सुनता, तो मां अपने सारे काम छोड़कर दौड़ी चली आती है। वह बच्चे के आंसू पोंछकर उसे तुरंत अपने आंचल में छिपा लेती है।
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उन्होंने कहा कि जगतजननी मां भवानी के साथ भी यही भाव जुड़ा है। मां हमारी बाहरी गतिविधियों के बजाय हमारी आंतरिक भावना को देखती हैं। सच्चे मन से की गई पुकार और निष्कपट भक्ति ही मां के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
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इस अवसर पर ट्रस्टी जैन धर्मार्थ अस्पताल के एससी जैन, हरीश एलाबादी, गौरव गुंबर, बीरबल पृथ्वी, विनोद जैन, गुलशन गांधी और अशोक आहूजा ने सपरिवार मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर महायज्ञ में आहुति अर्पित की। इस अवसर पर अनिल मंगला, नरेश अरोड़ा, कृष्ण गोपाल माटा, विकास ग्रोवर, राजबीर सिंह तंवर, अश्विनी वधवा, अशोक गुलाटी, सुरेश कोचर, तिलक जुनेजा, गुलशन कोचर, परमजीत सेठी, पूर्ण गिरधर, बिट्टू आहूजा और विनीत शर्मा मौजूद रहे।