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Jind News: देसी गाय की खरीद पर मिलेगा 25 हजार तक का अनुदान
Tue, 07 Feb 2023 01:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 07 Feb 2023 01:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक अनुदान देने और जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम किसानों को निशुल्क उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इस योजना से किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ-साथ स्वदेशी गाय खरीदने में मदद मिलेगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि देश में हरियाणा पहला राज्य होगा, जहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की पहल की गई है। प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान-पान को बदलना है। प्राकृतिक खेती का प्रदर्शन प्लांट लगाने वाले किसानों के लिए पोर्टल बनाया जाएगा। इस पर जमीन की पूरी जानकारी देने के साथ-साथ किसान स्वेच्छा से फसल विविधीकरण अपनाने के बारे में जानकारी देंगे।
इस प्रकार विभाग के पास पूरी जानकारी होगी तो उसकी आसानी से मॉनिटरिंग की जा सकेगी। प्राकृतिक खेती के तहत किसी भी तरीके के कृषि रसायन या उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर करती है। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रदेशभर में प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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जींद। प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देसी गाय की खरीद पर 25 हजार रुपये तक अनुदान देने और जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए चार बड़े ड्रम किसानों को निशुल्क उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इस योजना से किसानों को प्राकृतिक खेती के साथ-साथ स्वदेशी गाय खरीदने में मदद मिलेगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि देश में हरियाणा पहला राज्य होगा, जहां प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की पहल की गई है। प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान-पान को बदलना है। प्राकृतिक खेती का प्रदर्शन प्लांट लगाने वाले किसानों के लिए पोर्टल बनाया जाएगा। इस पर जमीन की पूरी जानकारी देने के साथ-साथ किसान स्वेच्छा से फसल विविधीकरण अपनाने के बारे में जानकारी देंगे।
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इस प्रकार विभाग के पास पूरी जानकारी होगी तो उसकी आसानी से मॉनिटरिंग की जा सकेगी। प्राकृतिक खेती के तहत किसी भी तरीके के कृषि रसायन या उर्वरक का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर करती है। सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को प्रदेशभर में प्रोत्साहित किया जा रहा है।
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