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जिला परिषद चेयरपर्सन के लिए सरकार और भाजपा संगठन सक्रिय
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Fri, 28 Apr 2017 12:30 AM IST
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रेस्ट हाऊस में मीटिंग करने पहुंचे पार्षद।
- फोटो : jind
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जिला परिषद चेयरपर्सन के खिलाफ 20 पार्षदों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव के शपथ पत्र देने के बाद अब भाजपा का संगठन और सरकार दोनों सक्रिय हो गए हैं। एक मई को होने वाले मतदान में भाजपा समर्थक ही जिला परिषद का चेयरपर्सन बने, इसके लिए राजनीति तेज हो गई है। इसको लेकर भाजपा के प्रदेश महासचिव संजय भाटिया, प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, जिलाध्यक्ष अमरपाल राणा और उचाना से विधायक प्रेमलता ने पार्षदों का मन टटोला। इस दौरान कुल 21 पार्षद और उनके समर्थक मौजूद रहे। चुनाव से पहले अधिकतर पार्षद गुप्त स्थान पर होने के कारण मीटिंग में नहीं पहुंचे।
चेयरपर्सन के भविष्य को लेकर होने वाली मीटिंग के चलते वीरवार सुबह से ही पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में गहमागहमी रही। हालांकि मीटिंग में चेयरपर्सन से बगावत करने वाले पार्षद ही शामिल रहे, लेकिन सूत्रों के अनुसार एक पार्षद ऐसा भी आया, जो 12 अप्रैल को हुई जिला परिषद की मीटिंग में चेयरपर्सन के समर्थन में खड़ा था। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में करीब एक घंटे तक भाजपा नेताओं पार्षदों का मन टटोला। इस दौरान सभी पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अब पदमा सिंगला को चेयरपर्सन स्वीकार नहीं करेंगे। भाजपा नेताओं ने पार्षदों ने विरोध का कारण पूछा। इस पर पार्षदों ने कहा कि विकास कार्यों में भेदभाव के साथ-साथ पदमा सिंगला ने चेयरपर्सन रहते जातीय भेदभाव भी किया गया। इससे सभी पार्षद आहत हैं।
बॉक्स
अपना पक्ष मजबूत करने में लगे दोनों खेमे
हालांकि, चेयरपर्सन के खिलाफ 20 पार्षद शपथपत्र डीसी विनय सिंह को दे चुके हैं, इसके बावजूद दोनों ही पक्ष अपने-अपने अंक पूरे करने में लगे हैं। दरअसल पदमा सिंगला को कुर्सी बचाने के लिए महज नौ पार्षदों की जरूरत है। वहीं, विरोधी खेमे को उन्हें पद से हटाने के लिए विरोधियों को 18 पार्षदों की संख्या सदन में दिखानी होगी। हालांकि,जिला पार्षद चेयरपर्सन के समर्थन में अब तक पांच पार्षद माने जा रहे थे, लेकिन अब उनकी संख्या चार ही रह गई है। यदि चेयरपर्सन पदमा सिंगला नौ पार्षदों को मीटिंग से अनुपस्थित रखने में भी सफल हो जाती हैं तो उनकी कुर्सी पक्की रहेगी। अब इसके लिए जोड़-तोड़ चल रहा है।
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बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण
चेयरपर्सन पदमा सिंगला वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के खासमखास विनोद सिंगला की पत्नी हैं। नई बनने वाली चेयरपर्सन भी भाजपा समर्थक ही होगी, इसकी संभावनाएं प्रबल हैं। लेकिन, दोनों ही खेमों में राजनीतिक आस्थाएं भी बदल रही हैं। दोनों गुटों में सक्रिय लोग अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए कांग्रेस और इनेलो के वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके हैं।
12 पार्षद हुए शरीक
बैठक में चेयरपर्सन के विरोधी गुट के 12 पार्षद मौजूद रहे। इनमें एक पार्षद अभी विरोधी गुट में शामिल हुआ है। बैठक में सभी पार्षदों ने चेयरपर्सन पर आरोप लगाए कि उन्हें किसी भी सूरत में अब पदमा सिंगला चेयरपर्सन के रूप में स्वीकार नहीं हैं। इस पर संजय भाटिया ने कहा यदि उनकी कोई परेशानी है तो वे चेयरपर्सन के साथ बातचीत कर हल करवा देंगे, लेकिन पार्षद किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं हैं। बैठक में भाजपा के जिला प्रधान अमरपाल राणा भी मौजूद थे।
हाईकमान पर छोड़ा नए प्रधान का निर्णय
बैठक में सभी बिंदुओं पर खुलकर बात हुई है। वे किसी भी सूरत में अब पदमा सिंगला को चेयरपर्सन नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि नया चेयरमैन कौन बनेगा, इसका निर्णय उन्होंने भाजपा हाईकमान पर छोड़ दिया है। हाईकमान की तरफ से जिसका भी नाम रखा जाएगा, वे उस पर सहमत होंगे।
- उमेद सिंह रेढू, उप प्रधान जिला परिषद
मुख्यमंत्री के निर्देश पर आए थे भाटिया
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि जिला परिषद के घमासान को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश महासचिव संजय भाटिया जिला परिषद सदस्यों की नब्ज टटोलने जींद आए थे। अब वे मुख्यमंत्री को इसकी रिपोर्ट सौंपेंगे तथा उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मीटिंग में पार्षदों से बातचीत की गई है। अब पार्टी नेताओं के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। सभी पार्षदों में भाजपा में आस्था जताई है।
अमरपाल राणा, जिलाध्यक्ष भाजपा
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चेयरपर्सन के भविष्य को लेकर होने वाली मीटिंग के चलते वीरवार सुबह से ही पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में गहमागहमी रही। हालांकि मीटिंग में चेयरपर्सन से बगावत करने वाले पार्षद ही शामिल रहे, लेकिन सूत्रों के अनुसार एक पार्षद ऐसा भी आया, जो 12 अप्रैल को हुई जिला परिषद की मीटिंग में चेयरपर्सन के समर्थन में खड़ा था। पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में करीब एक घंटे तक भाजपा नेताओं पार्षदों का मन टटोला। इस दौरान सभी पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे अब पदमा सिंगला को चेयरपर्सन स्वीकार नहीं करेंगे। भाजपा नेताओं ने पार्षदों ने विरोध का कारण पूछा। इस पर पार्षदों ने कहा कि विकास कार्यों में भेदभाव के साथ-साथ पदमा सिंगला ने चेयरपर्सन रहते जातीय भेदभाव भी किया गया। इससे सभी पार्षद आहत हैं।
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अपना पक्ष मजबूत करने में लगे दोनों खेमे
हालांकि, चेयरपर्सन के खिलाफ 20 पार्षद शपथपत्र डीसी विनय सिंह को दे चुके हैं, इसके बावजूद दोनों ही पक्ष अपने-अपने अंक पूरे करने में लगे हैं। दरअसल पदमा सिंगला को कुर्सी बचाने के लिए महज नौ पार्षदों की जरूरत है। वहीं, विरोधी खेमे को उन्हें पद से हटाने के लिए विरोधियों को 18 पार्षदों की संख्या सदन में दिखानी होगी। हालांकि,जिला पार्षद चेयरपर्सन के समर्थन में अब तक पांच पार्षद माने जा रहे थे, लेकिन अब उनकी संख्या चार ही रह गई है। यदि चेयरपर्सन पदमा सिंगला नौ पार्षदों को मीटिंग से अनुपस्थित रखने में भी सफल हो जाती हैं तो उनकी कुर्सी पक्की रहेगी। अब इसके लिए जोड़-तोड़ चल रहा है।
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बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण
चेयरपर्सन पदमा सिंगला वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह के खासमखास विनोद सिंगला की पत्नी हैं। नई बनने वाली चेयरपर्सन भी भाजपा समर्थक ही होगी, इसकी संभावनाएं प्रबल हैं। लेकिन, दोनों ही खेमों में राजनीतिक आस्थाएं भी बदल रही हैं। दोनों गुटों में सक्रिय लोग अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए कांग्रेस और इनेलो के वरिष्ठ नेताओं से मिल चुके हैं।
12 पार्षद हुए शरीक
बैठक में चेयरपर्सन के विरोधी गुट के 12 पार्षद मौजूद रहे। इनमें एक पार्षद अभी विरोधी गुट में शामिल हुआ है। बैठक में सभी पार्षदों ने चेयरपर्सन पर आरोप लगाए कि उन्हें किसी भी सूरत में अब पदमा सिंगला चेयरपर्सन के रूप में स्वीकार नहीं हैं। इस पर संजय भाटिया ने कहा यदि उनकी कोई परेशानी है तो वे चेयरपर्सन के साथ बातचीत कर हल करवा देंगे, लेकिन पार्षद किसी भी सूरत में मानने को तैयार नहीं हैं। बैठक में भाजपा के जिला प्रधान अमरपाल राणा भी मौजूद थे।
हाईकमान पर छोड़ा नए प्रधान का निर्णय
बैठक में सभी बिंदुओं पर खुलकर बात हुई है। वे किसी भी सूरत में अब पदमा सिंगला को चेयरपर्सन नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि नया चेयरमैन कौन बनेगा, इसका निर्णय उन्होंने भाजपा हाईकमान पर छोड़ दिया है। हाईकमान की तरफ से जिसका भी नाम रखा जाएगा, वे उस पर सहमत होंगे।
- उमेद सिंह रेढू, उप प्रधान जिला परिषद
मुख्यमंत्री के निर्देश पर आए थे भाटिया
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि जिला परिषद के घमासान को शांत करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश महासचिव संजय भाटिया जिला परिषद सदस्यों की नब्ज टटोलने जींद आए थे। अब वे मुख्यमंत्री को इसकी रिपोर्ट सौंपेंगे तथा उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मीटिंग में पार्षदों से बातचीत की गई है। अब पार्टी नेताओं के साथ इस पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। सभी पार्षदों में भाजपा में आस्था जताई है।
अमरपाल राणा, जिलाध्यक्ष भाजपा