जींद। भारतीय शिक्षण मंडल हरियाणा व चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग ने श्रीमद्भागवत गीता अमृतवाणी मानव जीवन का महादर्शन विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कराया। यह कार्यक्रम ऑनलाइन ही किया गया। वीरवार को सम्मेलन के समापन अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर बीके कुठियाला ने कहा कि गीता जीवन योजना की शिक्षा देती है।
प्रोफेसर बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि गीता मस्तिष्क में उठने वाले सभी संघर्षों, द्वंद्वों और आसक्तियों को नष्ट कर जीवन के प्रति सही समझ विकसित करने में सहायक है। मनुष्य जैसे-जैसे प्रकृति के साथ दुर्व्यवहार करता है, अपने लिए अनेक समस्याओं और चुनौतियों के ही बीज बोता है। मानव जीवन का उद्देश्य नर से नारायण बनने का है, जिसका आधार प्रकृति के साथ पारस्परिक निर्भरता है। यदि जीवन में गीता का अध्ययन करें और उसका पालन करें, तो दैनिक जीवन की कई समस्याओं को मिटाया जा सकता है। इस दौरान स्वामी ज्ञानराज माणिक महाराज ने कहा जीवन में गीता अध्ययन न केवल लौकिक दृष्टि से अपितु आध्यात्मिक रूप से भी विशेष महत्वपूर्ण है। गीता की शिक्षाओं से संसार की कठिन समस्याओं को हल किया जा सकता है। कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ बतौर मुख्यातिथि जुड़े। उन्होंने कहा कि गीता की शिक्षाएं मानव जीवन में हर कदम पर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता, भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति के साथ-साथ जीवन की प्रत्येक परिस्थिति के लिए मार्गदर्शक है। व्यक्तिगत, सामाजिक व वैश्विक समस्याओं का हल इसमें निहित है। अंग्रेजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. ज्योति श्योराण ने बताया कि सम्मेलन में 500 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। भारत के 18 से अधिक राज्यों के साथ-साथ अमेरिका, इंग्लैंड, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश सहित 120 से अधिक शोध-पत्रों को प्रस्तुत किया गया।