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Jind News: निपुण आकलन में चौथी के बच्चे कमजोर, गणित में दक्षता 50.2 प्रतिशत

Mon, 19 Oct 2026 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:00 AM IST
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Fourth-grade students are weak in the proficiency assessment, with 50.2% proficiency in mathematics.
18जेएनडी04: निपुण आकलन के तहत पढ़ाई करते बच्चे। स्रोत: अध्यापक
जींद। प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की सीखने की क्षमता का स्तर कक्षा बढ़ने के साथ गिर रहा है। निपुण हरियाणा मिशन के तहत अगस्त में हुए आवधिक आकलन-प्रथम (पीए-1) के परिणामों में यह जानकारी मिली है। जिले में बालवाटिका-3 के बच्चों का औसत दक्षता स्तर 78.9 प्रतिशत रहा, जबकि चौथी कक्षा में यह घटकर 53 प्रतिशत रह गया।
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चौथी कक्षा में गणित की दक्षता 50.2 प्रतिशत और अंग्रेजी की महज 47.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन नतीजों ने बच्चों की बुनियादी समझ मजबूत करने और कमजोर विषयों पर अतिरिक्त मेहनत कराने की जरूरत उजागर की है। बालवाटिका-3 से चौथी कक्षा तक नामांकित 25,752 बच्चों में से 23,273 का आकलन किया गया। इस तरह परीक्षा में 90.4 प्रतिशत बच्चों की भागीदारी रही। आकलन का उद्देश्य बच्चों की दक्षताओं की पहचान कर उनके अनुरूप शिक्षण की योजना बनाना है।
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कक्षा बढ़ी तो घटा दक्षता का स्तर
आकलन के अनुसार पहली कक्षा में औसत दक्षता 75 प्रतिशत, दूसरी में 75.4 और तीसरी में 69.2 प्रतिशत रही। चौथी कक्षा में यह गिरकर 53 प्रतिशत पर पहुंच गई। चौथी में हिंदी का प्रदर्शन 61.5 प्रतिशत रहा, जबकि गणित और अंग्रेजी में बच्चे काफी पीछे रहे। अंग्रेजी में कहानी समझने और महत्वपूर्ण जानकारी पहचानने की दक्षता 53.7 प्रतिशत तथा अपने विचारों पर अनुच्छेद लिखने का स्तर 41 प्रतिशत दर्ज किया गया। गणित में आकृतियों की प्रतिबिंब और घूर्णन बनाने की दक्षता केवल 35.5 प्रतिशत रही।
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कमजोर बच्चों के लिए चलेगा उपचारात्मक शिक्षण
तीसरी कक्षा में मौखिक पठन प्रवाह के तहत 2,746 बच्चों का आकलन हुआ। इनमें 49.3 प्रतिशत बच्चे प्रति मिनट कम से कम 45 शब्द पढ़ने के स्तर पर पहुंचे, जबकि 6.7 प्रतिशत बच्चे पांच या उससे कम शब्द पढ़ सके। रिपोर्ट के आधार पर शिक्षकों को कमजोर दक्षताओं की पहचान कर दोबारा अभ्यास कराने, जीरो पीरियड में उपचारात्मक शिक्षण और साप्ताहिक प्रगति समीक्षा पर जोर दिया गया है।

बाक्स
पीए-1 के परिणामों का उपयोग विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार शिक्षण सुधारने में किया जाएगा। उद्देश्य केवल परीक्षा के आंकड़े सुधारना नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक समझ, पढ़ने-लिखने और गणितीय दक्षताओं को मजबूत करना है। -राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन
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