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पूर्व रजिस्ट्रार ने कुलपति की नियुक्ति पर उठाए सवाल
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नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोपों का सामना कर रहे चौधरी रणबीर सिंह विवि पर फिर से आरोप लगे हैं। विवि के पूर्व रजिस्ट्रार राजबीर सिंह मोर ने कुलपति की नियुक्ति को लेकर आरोप लगाया है। साथ ही अन्य नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होेंने अपनी तीन पन्नों की शिकायत राज्यपाल के सचिव व प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेज दी है।
पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजबीर सिंह मोर ने राज्यपाल के सचिव डॉ. जी. अनुपमा व प्रदेश सरकार की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को भेजी गई शिकायत में कहा है कि एक अखबार में नियुक्तियों को लेकर हो रहे फर्जीवाड़े की खबर पढ़ी। इससे उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि यहां तो खुद कुलपति की नियुक्ति ही अवैध है। डॉ. मोर ने पत्र में लिखा कि सीआरएसयू का पूर्व रजिस्ट्रार होने के नाते उनके पास कुलपति की नियुक्ति को लेकर कुछ तथ्य हैं। इनमें कुलपति प्रोफेसर राजबीर सिंह सोलंकी 8 जून 2016 को दिल्ली विवि के भीमराव आंबेडकर कॉलेज में वाणिज्य विषय के सह प्रोफेसर थे। 8 जून 2016 को उन्होंने चौधरी रणबीर सिंह विवि में प्रति नियुक्ति पर प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया। उस समय वे 62 वर्ष के थे। साथ ही उन्होंने अपने आवेदन में भी जन्मतिथि 4 जून 1954 लिखी है। इसके अनुसार वे 62 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। हरियाणा सरकार ने सेवानिवृत्ति की सभी विभागों में अधिक से अधिक आयु 60 वर्ष रखी है। विश्वविद्यालय के एक्ट में भी सेवा संपन्नता की अधिकतम उम्र 60 वर्ष है। पूर्व रजिस्ट्रार ने आरोप लगाए कि कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी ने भ्रष्ट आचरण की शुरूआत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त डॉ. डीपीएस वर्मा एवं एक अन्य को अपने आवेदन पत्र की स्क्रीनिंग समिति में भी शामिल करवा लिया। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु होने के कारण प्रोफेसर आरबी सोलंकी जींद विवि में प्रति नियुक्ति की योग्यता ही नहीं रखते थे। यूजीसी एवं विश्वविद्यालय के नियमानुसार प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए 400 एपीआई स्कोर होना चाहिए, लेकिन कुलपति ने एक भी अंक के लिए दावा नहीं किया। ऐसे में वे प्रोफेसर पद के लिए योग्य कैसे हो गए।
विवि में नहीं था वाणिज्य विभाग में पद
डॉ. राजबीर सिंह मोर ने अपनी शिकायत में कहा कि जिस समय प्रोफेसर आरबी सोलंकी को सीआरएसयू में नियुक्ति दी गई, तब विवि में वाणिज्य विभाग में कोई पद ही सृजित नहीं था। ऐसे में वे बिना सृजित पद के ही नियुक्त हो गए।
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विवि पर 70 लाख रुपये का बोझ
डॉ. राजबीर मोर ने अपने पत्र में कहा कि प्रोफेसर राजबीर सोलंकी की अनुचित नियुक्ति के कारण वेतन व प्रति नियुक्ति के नियमों के आधार पर पेंशन व अन्य के रूप में जींद विवि द्वारा इनके पूर्व महाविद्यालय को 70 लाख रुपये देने पड़े। यह विवि पर एक बड़ा बोझ था।
सरकार को अंधेरे में रखा
पूर्व रजिस्ट्रार के अनुसार पूर्व कुलपति डॉ. मेजर जनरल रणजीत सिंह का कार्यकाल पूरा होने के बाद तथ्यों को छुपाकर अपना नाम कार्यवाहक कुलपति के रूप में आगे किया। प्रोफेसर सोलंकी इसके लिए योग्य नहीं थे। विवि में दो स्थायी प्रोफेसर होते हुए उन्होंने खुद को वरिष्ठ बताया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यवाहक कुलपति के पद की योग्यता को आधार बनाकर खुद को कुलपति पद भी नियुक्त करवा लिया।
चहेतों को नियुक्त देने का आरोप
डॉ. मोर ने कहा कि खुद भ्रष्ट तरीके से पद हथियाने वाले कुलपति अब जल्दबाजी में शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे हैं। जबकि सेवाकाल छह महीने रहने पर भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाती है। कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी का कार्यकाल करीब चार महीने ही बचा है। ऐसे में कुलपति अपने चहेतों को नियुक्ति देंगे।
मुझे नहीं मिली शिकायत
यह शिकायत मुझे नहीं मिली है। राज्यपाल और प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को शिकायत भेजी गई है। ऐसे में वे ही इसकी जांच करेंगे। जो भी सच्चाई होगी सामाने आ जाएगी।
प्रोफेसर आरबी सोलंकी, कुलपति, सीआरएसयू।
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पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजबीर सिंह मोर ने राज्यपाल के सचिव डॉ. जी. अनुपमा व प्रदेश सरकार की मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा को भेजी गई शिकायत में कहा है कि एक अखबार में नियुक्तियों को लेकर हो रहे फर्जीवाड़े की खबर पढ़ी। इससे उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि यहां तो खुद कुलपति की नियुक्ति ही अवैध है। डॉ. मोर ने पत्र में लिखा कि सीआरएसयू का पूर्व रजिस्ट्रार होने के नाते उनके पास कुलपति की नियुक्ति को लेकर कुछ तथ्य हैं। इनमें कुलपति प्रोफेसर राजबीर सिंह सोलंकी 8 जून 2016 को दिल्ली विवि के भीमराव आंबेडकर कॉलेज में वाणिज्य विषय के सह प्रोफेसर थे। 8 जून 2016 को उन्होंने चौधरी रणबीर सिंह विवि में प्रति नियुक्ति पर प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया। उस समय वे 62 वर्ष के थे। साथ ही उन्होंने अपने आवेदन में भी जन्मतिथि 4 जून 1954 लिखी है। इसके अनुसार वे 62 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। हरियाणा सरकार ने सेवानिवृत्ति की सभी विभागों में अधिक से अधिक आयु 60 वर्ष रखी है। विश्वविद्यालय के एक्ट में भी सेवा संपन्नता की अधिकतम उम्र 60 वर्ष है। पूर्व रजिस्ट्रार ने आरोप लगाए कि कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी ने भ्रष्ट आचरण की शुरूआत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त डॉ. डीपीएस वर्मा एवं एक अन्य को अपने आवेदन पत्र की स्क्रीनिंग समिति में भी शामिल करवा लिया। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु होने के कारण प्रोफेसर आरबी सोलंकी जींद विवि में प्रति नियुक्ति की योग्यता ही नहीं रखते थे। यूजीसी एवं विश्वविद्यालय के नियमानुसार प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए 400 एपीआई स्कोर होना चाहिए, लेकिन कुलपति ने एक भी अंक के लिए दावा नहीं किया। ऐसे में वे प्रोफेसर पद के लिए योग्य कैसे हो गए।
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विवि में नहीं था वाणिज्य विभाग में पद
डॉ. राजबीर सिंह मोर ने अपनी शिकायत में कहा कि जिस समय प्रोफेसर आरबी सोलंकी को सीआरएसयू में नियुक्ति दी गई, तब विवि में वाणिज्य विभाग में कोई पद ही सृजित नहीं था। ऐसे में वे बिना सृजित पद के ही नियुक्त हो गए।
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विवि पर 70 लाख रुपये का बोझ
डॉ. राजबीर मोर ने अपने पत्र में कहा कि प्रोफेसर राजबीर सोलंकी की अनुचित नियुक्ति के कारण वेतन व प्रति नियुक्ति के नियमों के आधार पर पेंशन व अन्य के रूप में जींद विवि द्वारा इनके पूर्व महाविद्यालय को 70 लाख रुपये देने पड़े। यह विवि पर एक बड़ा बोझ था।
सरकार को अंधेरे में रखा
पूर्व रजिस्ट्रार के अनुसार पूर्व कुलपति डॉ. मेजर जनरल रणजीत सिंह का कार्यकाल पूरा होने के बाद तथ्यों को छुपाकर अपना नाम कार्यवाहक कुलपति के रूप में आगे किया। प्रोफेसर सोलंकी इसके लिए योग्य नहीं थे। विवि में दो स्थायी प्रोफेसर होते हुए उन्होंने खुद को वरिष्ठ बताया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यवाहक कुलपति के पद की योग्यता को आधार बनाकर खुद को कुलपति पद भी नियुक्त करवा लिया।
चहेतों को नियुक्त देने का आरोप
डॉ. मोर ने कहा कि खुद भ्रष्ट तरीके से पद हथियाने वाले कुलपति अब जल्दबाजी में शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे हैं। जबकि सेवाकाल छह महीने रहने पर भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाती है। कुलपति प्रोफेसर आरबी सोलंकी का कार्यकाल करीब चार महीने ही बचा है। ऐसे में कुलपति अपने चहेतों को नियुक्ति देंगे।
मुझे नहीं मिली शिकायत
यह शिकायत मुझे नहीं मिली है। राज्यपाल और प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को शिकायत भेजी गई है। ऐसे में वे ही इसकी जांच करेंगे। जो भी सच्चाई होगी सामाने आ जाएगी।
प्रोफेसर आरबी सोलंकी, कुलपति, सीआरएसयू।