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मेंथा की खेती कर अपने जीवन को महका रहे पांच दोस्त

Sun, 21 Feb 2021 10:53 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 10:53 PM IST
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Five friends fostering their lives by cultivating mentha
किसानों द्वारा सुगंधित पौधों का तेल निकाले के लिए लगाई गई मशीन। संवाद - फोटो : Jind
अमन कौशिक
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जींद (संवाद)। सुगंधित पौधों की खेती कर ढाबी टेकसिंह गांव में पांच दोस्त अपने जीवन को सुगंधित बना रहे हैं। ये दोस्त अलग-अलग जगह से हैं, लेकिन खेती ढाबी टेकसिंह गांव में करते हैं। उन्होंने 25 एकड़ जमीन में मेंथा नामक सुगंधित पौधे की खेती की है। वह पिछले पांच साल से वह मेंथा की खेती कर रहे हैं।
ढाबी टेकसिंह निवासी विनोद, नारायणगढ़ निवासी मिठनलाल सैनी, उझाना निवासी बलिंद्र कुमार, नारायाणनगढ़ निवासी आशोक ताराचंद व गढ़ी निवासी राजेश मिलकर यह खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह सब्जी उगाते थे, लेकिन ज्यादा मुनाफा नहीं होता था। फिर पांचों दोस्तों ने मिलकर मेंथा की खेती शुरू की। इनका तेल निकालकर बेचा जाता है, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो जाता है। उन्होंने कहा कि मेंथा की खेती पर 20 हजार रुपये की लागत लगती है। वहीं एक एकड़ से उन्हें 70 हजार रुपये की आमदनी होती है, जिसमें से खर्च निकालकर उन्हें प्रति एकड़ 50 हजार रुपये की बचत होती है।
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ढाबी टेकसिंह गांव के अन्य किसान भी इन पांच दोस्तों से प्रेरित होकर मेंथा की खेती कर रहे हैं। जिला बागवानी सलाहकार डॉ. असीम जांगड़ा के अनुसार सुगंधित पौधों की खेती प्रदेश में केवल जींद व अंबाला जिले में की जाती है। बागवानी विभाग द्वारा मेंथा सहित खसखस, तुलसी, नीबू घास व देसी गुलाब पर अनुदान राशि दी जाती है। यह अन्य फसलें भी सुगंधित फसलों के अंतर्गत आती हैं। डॉ. असीम जांगड़ा ने बताया कि यह फसल 110 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी खेती के लिए दूब के आकार जैसी जड़ आती हैं, जो जमीन में लगानी होती है और उसके बाद उसकी सिंचाई की जाती है। एक एकड़ में 70 से 80 किलोग्राम की फसल होती है। इन सुगंधित पौधों की फसल की खास बात यह भी है कि इसमें ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती।
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विभाग की ओर से दी जाती है अनुदान राशि
बागवानी विभाग की ओर से सुगंधित पौधों की खेती के लिए 16 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान राशि दी जाती है। एक किसान चार हेक्टेयर तक अनुदान राशि ले सकता है। प्रति एकड़ ढाई हजार बीज का खर्च आता है। ढाबी टेक सिंह गांव में लगभग 30 एकड़ में मेंथा की खेती की जाती है। इसकी पौध पर 2500 से तीन हजार रुपये खर्च आता है। एक एकड़ में 70 से 80 किलोग्राम की पैदावार हो जाती है। एक किलोग्राम का दाम 1150 रुपये है।
- डॉ. असीम जांगड़ा, जिला बागवानी सलाहकार जींद

ढाबी टेक सिंह गांव में मेंथा की खेती करते किसान। संवाद

ढाबी टेक सिंह गांव में मेंथा की खेती करते किसान। संवाद- फोटो : Jind

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