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Jind News: किसानों को दी कीट व रोग प्रबंधन की जानकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र पांडु पिंडारा में सरसों फसल की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी विषय पर सोमवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रथम दिन प्रशिक्षण डॉ. प्रीति मलिक ने सरसों की उन्नत किस्मों, बीज उपचार तकनीक, बुवाई का सही समय, उचित बीज दर, सल्फर व जिंक की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
डॉ. सुभाष ने किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, समेकित कीट प्रबंधन, जैविक उपाय, फसल सुरक्षा रसायनों का सुरक्षित उपयोग और मौसम आधारित कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षित किया गया। दूसरे दिन प्रशिक्षण सहायक सुरेंद्र मित्तल ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को सरसों में लगने वाले प्रमुख रोग अल्टरनेरिया ब्लाइट, व्हाइट रस्ट के नियंत्रण उपायों की जानकारी दी।
समापन सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार ने किसानों को उन्नत तकनीकों को खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, जल प्रबंधन अपनाकर सरसों उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण अपनाने से सरसों की उपज में 20-25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
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जींद। कृषि विज्ञान केंद्र पांडु पिंडारा में सरसों फसल की उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी विषय पर सोमवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रथम दिन प्रशिक्षण डॉ. प्रीति मलिक ने सरसों की उन्नत किस्मों, बीज उपचार तकनीक, बुवाई का सही समय, उचित बीज दर, सल्फर व जिंक की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
डॉ. सुभाष ने किसानों को कीट एवं रोग प्रबंधन, समेकित कीट प्रबंधन, जैविक उपाय, फसल सुरक्षा रसायनों का सुरक्षित उपयोग और मौसम आधारित कृषि तकनीकों पर प्रशिक्षित किया गया। दूसरे दिन प्रशिक्षण सहायक सुरेंद्र मित्तल ने कार्यक्रम के दौरान किसानों को सरसों में लगने वाले प्रमुख रोग अल्टरनेरिया ब्लाइट, व्हाइट रस्ट के नियंत्रण उपायों की जानकारी दी।
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समापन सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र के जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार ने किसानों को उन्नत तकनीकों को खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, जल प्रबंधन अपनाकर सरसों उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।
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उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण अपनाने से सरसों की उपज में 20-25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।