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Jind News: मुआवजा नीति के विरोध में किसानों ने लघु सचिवालय पर उठाई आवाज
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25जेएनडी38: लघु सचिवालय में नारेबाजी करते हुए किसान। संवाद
- फोटो : संवाद
जींद। बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भूमि अधिग्रहण और राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) मुआवजा नीति के विरोध में सोमवार को जिले के बड़ौदा समेत नौगामा खाप के किसानों ने लघु सचिवालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के बैनर तले पहुंचे किसानों ने उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और 29 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना को तुरंत वापस लेने की मांग की।
किसान दिलबाग सिंह, विजय, जितेंद्र बड़ौदा, सुलतान सिंह, हरदवारी, नवीन, बलजीत सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई नई नीति पूरी तरह किसान विरोधी है। इससे किसानों की जमीनों का उचित मुआवजा प्रभावित होगा और उनकी संपत्ति की कीमत घट जाएगी।
किसानों ने कहा कि हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें खेतों और जमीनों के ऊपर से गुजरने के बाद जमीन की उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों कम हो जाते हैं, लेकिन नई नीति में वास्तविक नुकसान की अनदेखी की जा रही है। सरकार ने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया को इस प्रकार बदला है जिससे पावरग्रिड, एचवीपीएनएल और ट्रांसमिशन कंपनियों को फायदा पहुंचे।
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किसानों का कहना है कि नई व्यवस्था में केवल दो वैल्यूएशन रिपोर्टों को लॉटरी सिस्टम के माध्यम से शामिल किया जाएगा, जिससे वास्तविक बाजार दर दब जाएगी। इसके अलावा मार्केट रेट कमेटी की कार्यवाही में प्रभावित किसानों की भागीदारी लगभग समाप्त कर दी गई है। किसानों ने कहा कि पहले लागू नीति किसानों के हितों की रक्षा करती थी, लेकिन संशोधित नियम पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
उन्होंने मांग उठाई कि मुआवजा वास्तविक बाजार दर और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखकर तय किया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि कई जिलों में पहले से चल रही परियोजनाओं पर नई नीति को लागू करना गलत है और इससे किसानों के साथ भेदभाव होगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अधिसूचना वापस नहीं ली तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। किसानों ने मांग की कि प्रभावित किसानों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करते हुए स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाई जाए। साथ ही सभी जिलों में एक समान मुआवजा नीति लागू की जाए।
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किसान दिलबाग सिंह, विजय, जितेंद्र बड़ौदा, सुलतान सिंह, हरदवारी, नवीन, बलजीत सिंह ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई नई नीति पूरी तरह किसान विरोधी है। इससे किसानों की जमीनों का उचित मुआवजा प्रभावित होगा और उनकी संपत्ति की कीमत घट जाएगी।
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किसानों ने कहा कि हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनें खेतों और जमीनों के ऊपर से गुजरने के बाद जमीन की उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों कम हो जाते हैं, लेकिन नई नीति में वास्तविक नुकसान की अनदेखी की जा रही है। सरकार ने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया को इस प्रकार बदला है जिससे पावरग्रिड, एचवीपीएनएल और ट्रांसमिशन कंपनियों को फायदा पहुंचे।
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किसानों का कहना है कि नई व्यवस्था में केवल दो वैल्यूएशन रिपोर्टों को लॉटरी सिस्टम के माध्यम से शामिल किया जाएगा, जिससे वास्तविक बाजार दर दब जाएगी। इसके अलावा मार्केट रेट कमेटी की कार्यवाही में प्रभावित किसानों की भागीदारी लगभग समाप्त कर दी गई है। किसानों ने कहा कि पहले लागू नीति किसानों के हितों की रक्षा करती थी, लेकिन संशोधित नियम पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
उन्होंने मांग उठाई कि मुआवजा वास्तविक बाजार दर और भविष्य की विकास संभावनाओं को ध्यान में रखकर तय किया जाए। किसानों ने यह भी कहा कि कई जिलों में पहले से चल रही परियोजनाओं पर नई नीति को लागू करना गलत है और इससे किसानों के साथ भेदभाव होगा। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अधिसूचना वापस नहीं ली तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा। किसानों ने मांग की कि प्रभावित किसानों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करते हुए स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाई जाए। साथ ही सभी जिलों में एक समान मुआवजा नीति लागू की जाए।