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Jind News: संतुलित खाद प्रयोग से हो सकती है प्रति एकड़ 1500 रुपये तक बचत

Sat, 06 Jun 2026 12:17 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 12:17 AM IST
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Farmers obtained information about new farming techniques from agricultural experts.
फोटो 10 नरवाना। उझाना में किसान गोष्ठी में शामिल होते किसान। स्रोत विभाग।
नरवाना। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से गांव उझाना में किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में उझाना सहित आसपास के कई गांवों के किसानों ने भाग लिया और कृषि विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी हासिल की।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए मंडल कृषि अधिकारी सुनील दलाल और कृषि विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र बुरा ने किसानों से रासायनिक खादों का जरूरत से अधिक प्रयोग न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग करने से किसानों की प्रति एकड़ करीब 1200 से 1500 रुपये तक की बचत हो सकती है।
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साथ ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता भी बेहतर बनी रहती है। अधिकारियों ने कहा कि अधिक उत्पादन की दौड़ में कई किसान आवश्यकता से ज्यादा रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। लगातार अधिक मात्रा में रासायनिक खाद डालने से भूमि में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है और भविष्य में उत्पादन क्षमता घटने लगती है।
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इसका असर आगामी फसलों की गुणवत्ता और पैदावार पर भी पड़ता है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक खादों के उपयोग से फसलों में हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ सकती है जो मानव स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक है। किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए तथा गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक पोषक तत्वों का अधिक उपयोग करना चाहिए।

युवा किसानों को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि खेती का भविष्य नई पीढ़ी के हाथों में है। इसलिए युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी सजग रहना होगा। गोष्ठी के दौरान किसानों ने खाद प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों से जुड़े सवाल पूछे। कृषि विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का समाधान किया। किसानों ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की मांग भी उठाई।
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