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दिन में संभाल रहे खेत-खलिहान, रात को हुक्के पर राजनीति चर्चा
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रात को पंचायती चुनाव को लेकर चर्चा करते मतदाता। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। पंचायती चुनाव ने अब जोर पकड़ लिया है। दिन हो या रात गलियारों में वोट मांगने वाले ही दिखाई दे रहे हैं। एक उम्मीदवार जा रहा है तो दूसरा आ रहा है। वहीं खरीफ की फसल का सीजन में रफ्तार पकड़े हुए है। धान की कटाई के साथ-साथ कपास की चुगाई का कार्य भी जोरों पर है।
इसके अलावा अगेती गेहूं और बरसीम की बिजाई को लेकर सिंचाई का कार्य भी चल रहा है। ऐसे में मतदाताओं को दिन-रात फुर्सत नहीं मिल रही है। दिन के समय खेत-खलिहानों का कार्य निपटाया जा रहा है और रात को लेट तक बैठकों में हुक्के पर राजनीति चर्चा होती है। अब हर गांव, हर मुहल्ले में यह हालात कहीं भी देखे जा सकते हैं। वोटों को लेकर उम्मीदवार भी लोगों से मिलने के लिए रात को भी पहुंच जाते हैं, क्योंकि खरीफ की फसलों का सीजन के चलते दिन के समय गांव में बहुत कम ही लोग मिलते हैं। ऐसे में उम्मीदवार दिन के साथ-साथ रात में भी मतदाताओं से उनके हक में वोट देने की अपील कर रहे हैं। वहीं लोग भी मतदाताओं के मूड अनुसार उम्मीदवारों के हार-जीत के राजनीति समीकरण बना रहे हैं। बैठकों और गलियारों में बस पंचायती चुनावों को लेकर ही चर्चा हो रही है। अभी धान की कटाई का काम 30 प्रतिशत रह गया है और कपास की चुगाई का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। यदि यह दोनों काम लेट हुए तो गेहूं की बिजाई का कार्य भी लेट हो जाएगा। इसको लेकर मतदाता फसल सीजन और चुनावी सीजन के बीच फंसे हुए हैं।
कपास चुगाई के लिए आदमी देे दो, चल पड़ेंगे वोट मांगने
धान की कटाई और कपास की चुगाई के कार्य के चलते उम्मीदवारों को वोट मांगने के लिए लोग भी नहीं मिल रहे हं। गांव के अधिकतर लोग खरीफ की फसलों का कार्य निपटाने में लगे हैं। इसको लेकर उम्मीदवारों के सामने यह समस्या आन पड़ी है। जब भी उम्मीदवार किसी को वोट मांगने के लिए साथ चलने को बोलते हैं तो उनसे यही जवाब मिलता है कि धान की कटाई या कपास की चुगाई के लिए मजदूर दे दो। फिर वह साथ में वोट मांगने के लिए चल पड़ेंगे। ऐसे में उम्मीदवारों को चुनाव से पहले ऐसे-ऐसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है।
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वोट के लिए खेतों तक पहुंच रहे उम्मीदवार
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सरपंच, ब्लॉक समिति मैंबर और जिला परिषद पार्षद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को वोटों के लिए मशक्त ज्यादा करनी पड़ रही है। उम्मीदवार गांवों के अलावा खेतों में जहां भी मतदाता दिखाई दे वहीं जाकर हाजिरी लगाई जा रही है। वोटरों के लिए उम्मीदवार कच्चे रास्तों और फसलों के बीच पैदल घूमते दिखाई दे रहे हैं। उम्मीदवार गांव-गांव जाकर घरों में डोर टू डोर कर खेतों में जाने के लिए भी अपना समय निकाल रहे हैं। हर तरह से मतदाताओं को लुभाया जा रहा है।
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इसके अलावा अगेती गेहूं और बरसीम की बिजाई को लेकर सिंचाई का कार्य भी चल रहा है। ऐसे में मतदाताओं को दिन-रात फुर्सत नहीं मिल रही है। दिन के समय खेत-खलिहानों का कार्य निपटाया जा रहा है और रात को लेट तक बैठकों में हुक्के पर राजनीति चर्चा होती है। अब हर गांव, हर मुहल्ले में यह हालात कहीं भी देखे जा सकते हैं। वोटों को लेकर उम्मीदवार भी लोगों से मिलने के लिए रात को भी पहुंच जाते हैं, क्योंकि खरीफ की फसलों का सीजन के चलते दिन के समय गांव में बहुत कम ही लोग मिलते हैं। ऐसे में उम्मीदवार दिन के साथ-साथ रात में भी मतदाताओं से उनके हक में वोट देने की अपील कर रहे हैं। वहीं लोग भी मतदाताओं के मूड अनुसार उम्मीदवारों के हार-जीत के राजनीति समीकरण बना रहे हैं। बैठकों और गलियारों में बस पंचायती चुनावों को लेकर ही चर्चा हो रही है। अभी धान की कटाई का काम 30 प्रतिशत रह गया है और कपास की चुगाई का कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। यदि यह दोनों काम लेट हुए तो गेहूं की बिजाई का कार्य भी लेट हो जाएगा। इसको लेकर मतदाता फसल सीजन और चुनावी सीजन के बीच फंसे हुए हैं।
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कपास चुगाई के लिए आदमी देे दो, चल पड़ेंगे वोट मांगने
धान की कटाई और कपास की चुगाई के कार्य के चलते उम्मीदवारों को वोट मांगने के लिए लोग भी नहीं मिल रहे हं। गांव के अधिकतर लोग खरीफ की फसलों का कार्य निपटाने में लगे हैं। इसको लेकर उम्मीदवारों के सामने यह समस्या आन पड़ी है। जब भी उम्मीदवार किसी को वोट मांगने के लिए साथ चलने को बोलते हैं तो उनसे यही जवाब मिलता है कि धान की कटाई या कपास की चुगाई के लिए मजदूर दे दो। फिर वह साथ में वोट मांगने के लिए चल पड़ेंगे। ऐसे में उम्मीदवारों को चुनाव से पहले ऐसे-ऐसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है।
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वोट के लिए खेतों तक पहुंच रहे उम्मीदवार
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे सरपंच, ब्लॉक समिति मैंबर और जिला परिषद पार्षद का चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को वोटों के लिए मशक्त ज्यादा करनी पड़ रही है। उम्मीदवार गांवों के अलावा खेतों में जहां भी मतदाता दिखाई दे वहीं जाकर हाजिरी लगाई जा रही है। वोटरों के लिए उम्मीदवार कच्चे रास्तों और फसलों के बीच पैदल घूमते दिखाई दे रहे हैं। उम्मीदवार गांव-गांव जाकर घरों में डोर टू डोर कर खेतों में जाने के लिए भी अपना समय निकाल रहे हैं। हर तरह से मतदाताओं को लुभाया जा रहा है।