फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   ex principle, arrest, curruption, jind

राजकीय कॉलेज के पूर्व प्राचार्य फर्जीवाड़े में फंसे

Sun, 11 Dec 2016 12:55 AM IST
jind
jind Updated Sun, 11 Dec 2016 12:55 AM IST
विज्ञापन
ex principle, arrest, curruption, jind
वेदप्रकाश श्योराण - फोटो : bureau
 राजकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पर हाउस रेंट और कंप्यूटर विभाग में प्राध्यापिका की नियुक्ति करने में फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा है। प्राचार्य पर कालेज में सरकारी आवास होने के बावजूद दो साल तक सरकारी खजाने से रेंट लेने का आरोप है। यह भी आरोप है कि प्राचार्य ने अपने कार्यकाल में कंप्यूटर विभाग में प्राध्यापिका की नियुक्ति गलत ढंग से की और सरकार द्वारा निर्धारित वेतन से ज्यादा का भुगतान किया। एक सहायक प्रोफेसर की ओर से लगाई गई आरटीआई में मिली जानकारी में यह फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद पुलिस ने कॉलेज के सहायक प्रोफेसर की शिकायत पर तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपी प्राचार्य फिलहाल रोहतक के एनआरएस कालेज में कार्यरत है।
विज्ञापन

राजकीय महाविद्यालय के सहायक प्रोफेसर नरेंद्र ने शहर थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि रोहतक निवासी वेदप्रकाश श्योराण अगस्त 2013 में राजकीय महाविद्यालय में प्राचार्य के पद पर नियुक्त हुए थे और दो मार्च 2015 तक कार्यरत रहे। महाविद्यालय में सरकारी आवास होने के बावजूद वह प्रतिदिन रोहतक से आते-जाते रहे।  लेकिन, इस दौरान एक लाख 18 हजार 436 रुपये की राशि मकान किराये के तौर पर सरकारी खजाने से निकलवा ली। मकान किराये के लिए राशि तो खाते से निकलवा ली, लेकिन उन्होंने किराये की कोई भी रसीद जमा नहीं करवाई। सरकारी नियमों के अनुसार सरकार जब किसी अधिकारी को मकान उपलब्ध करवाती है तो वह मकान किराये भत्ते का हकदार नहीं होता और उसे अपने हेडक्वार्टर पर रहना होता है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
विज्ञापन


प्राध्यापिका की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण ने कंप्यूटर विभाग में प्राध्यापिका की नियुक्ति में भी फर्जीवाड़ा किया है। प्राचार्य ने वर्ष 2014 में कंप्यूटर विभाग में गलत ढंग से रिसोर्स पर्सन की नियुक्ति की। सत्र 2013-14 में पढ़ाने के लिए की गई भर्ती के लिए अभ्यर्थी ने ना ही आवेदन जमा करवाया और ना ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुई। उनकी नियुक्ति के लिए प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण ने विभाग से कोई अनुमति नहीं ली और फर्जी तरीके से नियुक्ति कर दी। नियुक्ति के दूसरे माह ही अप्रैल 2014 में प्राचार्य ने नियमों की धज्जियां उड़ते हुए सरकार द्वारा निर्धारित 18 हजार रुपये वेतन से ज्यादा 19 हजार 750 रुपये की राशि का भुगतान किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


परीक्षाओं के दौरान भी कक्षाएं लगाती दिखाई
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने अप्रैल 2014 में दो बिल पास किए। इसमें एक बिल तो परीक्षाओं के दौरान कक्षाएं लगाने का  दिखाया है। इसमें 18 से 30 अप्रैल के दौरान 6750 रुपये का बिल बनाया है। जबकि इस दौरान विश्वविद्यालय की परीक्षाएं शुरू होने के कारण कॉलेज में कोई भी कक्षा नहीं लगी। इसी प्रकार 24 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2014 के दौरान कालेज की 50 छात्राओं का टूर नैनीताल, हरिद्वार व ऋषिकेश गया था। इस टूर में प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण व प्राध्यापिका ज्योति भी उसके साथ गई हुई थी, लेकिन रिकार्ड में दोनों को कहीं भी नहीं दिखाया गया। जबकि कालेज के टूर के दौरान लिए गए फोटो में दोनों कालेज की छात्राओं के साथ दिखाई दे रहे हैं। दूसरी तरफ प्राचार्य वेदप्रकाश ने इस दौरान प्राध्यापिका को चार-चार पीरियड पढ़ाते हुए दिखाकर उसके सरकारी खजाने से वेतन जारी किया हुआ है।


दो दिन रोहतक व जींद के कालेजों से लिया इकठ्ठा वेतन
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दो मार्च 2015 को प्राचार्य वेदप्रकाश का तबादला जींद के राजकीय कालेज से रोहतक के एनआरएस कालेज में हो गया। प्राचार्य वेदप्रकाश के तबादले के कुछ ही दिनों के बाद प्राध्यापिका ज्योति भी जींद कालेज को छोड़कर रोहतक के एनआरएस कालेज में चली गई। इस दौरान 20 व 21 मार्च 2015 को जींद के राजकीय कालेज के साथ-साथ प्राध्यापिका को रोहतक के एनआरएस कालेज में भी पढ़ाते हुए दिखाया है। इस दौरान प्राध्यापिका ज्योति को जींद के राजकीय कालेज व रोहतक के एनआरएस कालेज से एक साथ वेतन दिया गया। दोनों की जगह का वेतन प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण ने जारी किया हुआ है। इस प्रकार सरकारी खजाने को मोटा चूना लगाया है।


राजकीय कालेज के तत्कालीन प्राचार्य के खिलाफ शिकायत आई थी। इसमें सरकारी आवास होते हुए हाउस रेंट लेने और प्राध्यापिका की नियुक्ति में फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर प्राचार्य वेदप्रकाश श्योराण के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

कुलवंत सिंह, सिविल लाइन चौकी प्रभारी

आरोप निराधार, मैं फिर से जांच के लिए तैयार हूं : श्योराण
यह एक आरटीआई एक्टिविस्ट है, जो दूसरों का नाम उछालकर खुद को चर्चित रखता है। इस मामले की पहले भी जांच हो चुकी है और अब भी जांच के लिए पूरी तरह तैयार हूं। सभी आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। ऐसा कोई मामला नहीं है।
- डॉ. वेदप्रकाश श्योराण, प्राचार्य पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed