जहां से कोरोना का रिकॉर्ड होता है अपलोड वहां छलकते हैं जाम, सब कुछ कहती है ये तस्वीर...
- आठ बजकर 36 मिनट पर सूचना देने के एक घंटे बाद आई पुलिस
- कोरोना से संबंधित रिकॉर्ड अपलोड करने का कार्य करते हैं कर्मचारी
- पुलिस कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी ने पुलिस चौकी में शिकायत देने को कहा
- पुलिस ने कार्यालय से बरामद की शराब की बोतल व खाने पीने का सामान
विस्तार
नागरिक अस्पताल के जिस विभाग के जिम्मे कोरोना रोकथाम की जिम्मेदारी है, उसी में 5-6 कर्मचारी नियमित रूप से शराब पीते हैं। इसकी सूचना किसी ने बुधवार रात को 8 बजकर 36 मिनट पर पुलिस नियंत्रण कक्ष में दे दी। सूचना मिलने के बाद एक घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस से पहले मीडिया कर्मियों के पहुंचने पर शराब पी रहे कर्मचारी भाग खड़े हुए। वहीं पुलिस नियंत्रण कक्ष में तैनात कर्मचारी ने सूचना देने वाले से कहा कि इसकी शिकायत अस्पताल चौकी में दे दो। इससे पुलिस और अस्पताल प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
बुधवार रात 8 बजकर 36 मिनट पर पुलिस नियंत्रण कक्ष में सूचना दी गई कि नागरिक अस्पताल के आईडीएसपी (एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम) कार्यालय में पांच-छह कर्मचारी शराब पी रहे हैं। इसके बाद पुलिस चौकी में कॉल कर सूचना देने वाले का नाम पूछा, मगर उसने नहीं बताया। जिस कमरे में कोरोना से संबंधित रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाता है, उसे कुछ कर्मचारी शराब पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
किसी व्यक्ति ने कंट्रोल रूम पर फोन कर पुलिस को सूचना देने के साथ मीडिया को भी इसकी जानकारी दे दी। पुलिस तो नहीं पहुंची, मगर मीडिया के लोग पहुंच गए। उन्हें देखकर शराब पी रहे पांच कर्मचारी भाग खड़े हुए। काफी देर तक पुलिस नहीं पहुंची तो मीडिया कर्मचारियों ने पुलिस को बुलाया तो वह साढ़े नौ बजे पहुंची।
सिविल लाइन थाना के एएसआई दीपक मौके पर पहुंचे और कंप्यूटर के सामने से शराब से भरे गिलास, शराब की बोतल और खाने-पीने का सामान कब्जे में ले लिया। यहां मौजूद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने कहा कि ये कर्मचारी हर रोज रात को 11 बजे तक शराब पीते हैं। वह कार्यालय को ताला लगाने के लिए इनके उठने का इंतजार करता रहता है।
कोरोना से संबंधित रिकॉर्ड किया जाता है ऑनलाइन
आईडीएसपी के इस कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर बैठते हैं। यहां पर कोरोना से संबंधित रिकॉर्ड को अपलोड किया जाता है। शराब के नशे में रिकॉर्ड गलत भी हो सकता है। सरकार तथा प्रशासन, जहां कोरोना से संबंधित मामलों में बड़ी सावधानी बरत रहा है, वहीं इन कंप्यूटर ऑपरेटरों को न तो प्रशासन का भय है और न ही सरकार का। इनको कोरोना से कोई लेना-देना नहीं है। ये कंप्यूटर ऑपरेटर शाम को यहां पर खुलकर शराब पीते हैं।
डीसी की चेतावनी का भी नहीं असर
कोरोना रिपोर्ट समय पर अपलोड नहीं होने से डीसी डॉ. आदित्य दहिया पहले ही कंप्यूटर ऑपरेटरों को चेतावनी दे चुके हैं। दो बार बैठक लेकर डीसी ने इन कर्मचारियों को फटकार भी लगाई है लेकिन उनकी फटकार का इन कर्मचारियों पर कोई असर नहीं है। सिविल सर्जन भी बार-बार इन कर्मचारियों को कोरोना से संबंधित रिपोर्ट समय पर अपलोड करने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन इनके शराब के नशे के आगे कोई भी बड़ा नहीं है।
रात को मिली भरी बोतल, थाना प्रभारी बोले खाली मिली
जिस समय पुलिस नागरिक अस्पताल पहुंची तो वहां पर कमरे में शराब की आधी शराब से भरी बोतल, शराब के दो भरे गिलास बरामद हुए। पुलिस ने इस सब की वीडियो भी बनाई है। इसके बावजूद गुरुवार को सिविल लाइन थाना प्रभारी हरिकिशन ने बताया कि खाली बोतल मिली है। ऐसे में साफ होता है कि पुलिस की भी मंशा कार्रवाई की नहीं लग रही है।
इससे पहले भी अस्पताल में मिल चुकी हैं शराब की बोतलें
इससे पहले भी नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग की छत पर शराब की खाली बोतलें मिली थीं। लगभग छह महीने पहले जब चिकित्सकों की एक टीम ने अस्पताल की छत की जांच की थी तो वहां पर काफी आपत्तिजनक चीजें तथा शराब की खाली बोतलें मिली थीं। इस मामले में भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
सिविल सर्जन और पुलिस को शिकायत का इंतजार
सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि उनके पास इस तरह के मामले की सूचना आई है। किसी ने अभी तक शिकायत नहीं दी है। अगर शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी। वहीं सिविल लाइन थाना प्रभारी हरिकिशन ने कहा कि पुलिस ने मौके से शराब की बोतल व कुछ खाने-पीने का सामान बरामद किया है। पुलिस ने रपट लिख ली है। किसी की शिकायत आई तो कार्रवाई की जाएगी।
स्पष्टीकरण मांगा है
गुरुवार शाम को साढ़े सात बजे जब मैं घर गया तो यहां दो लोग कंप्यूटर पर काम कर रहे थे। सुबह पता चला कि रात को यहां किसी ने शराब पी है। मामला संज्ञान में आते ही आईडीएसपी ब्रांच से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि रात को यहां कौन-कौन लोग थे और क्या कर रहे थे। यदि कर्मचारियों पर शराब पीने का आरोप सही सिद्ध होता है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन, आईडीएसपी।
एक्सपर्ट व्यू: सरकारी कार्यालय में शराब पीना अपराध
सरकारी कार्यालय में शराब पीना अपराध है। सबसे पहले आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज होना चाहिए। वहीं पुलिस को सूचना देने वाले का नाम नहीं पूछा जा सकता। यहां तक कि पुलिस भी अपनी रिपोर्ट यही दर्ज करती है कि मुखबिर खास से सूचना मिली है। वकील भी मुखबिर का नाम नहीं पूछ सकता। यदि पुलिसकर्मी ने सूचना देने वाले से नाम पूछा है तो यह गलत है। हां यदि सूचना गलत निकले तो सूचना देने वाले के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। विनोद बंसल, वरिष्ठ वकील।