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Jind News: दो दिवसीय एफएलएस कार्यशाला शुरू, बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति पर जोर
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04जेएनडी12: दो दिवसीय एफएलएस कार्यशाला में जानकारी देते हुए डॉ. जगमेंद्र । संवाद
जींद। जिला समन्वयक एफएलएन कार्यालय में सोमवार को फाउंडेशनल लिटरेसी स्टडी (एफएलएस) को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले भर से चयनित 25 फील्ड इन्वेस्टिगेटर्स ने भाग लिया।
डाइट प्राचार्य मुन्नी देवी ने कहा कि बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को समझने और उसमें आवश्यक सुधार करने की दिशा में एफएलएस एक महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक कदम है।
उन्होंने सभी फील्ड इन्वेस्टिगेटर्स को निर्देश दिए कि वे अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा, जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ करें। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन की सटीकता ही भविष्य में शिक्षा की नीतियों को प्रभावी बनाने का आधार बनेगी।
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प्राचार्य ने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ऑब्जर्वर की ड्यूटी लगाई गई है। ये ऑब्जर्वर निर्धारित 23 विद्यालयों में उपस्थित रहकर पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्म अवलोकन करेंगे। वे अपनी रिपोर्ट सीधे गूगल लिंक के माध्यम से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को भेजेंगे।
बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य
डाइट ईक्कस से सीएमडीए इंचार्ज डॉ. जगमेंद्र ने बताया कि जिले के 23 विद्यालयों का चयन इस मूल्यांकन के लिए किया गया है और उन्हें पहले ही सूचना भेज दी गई है। मूल्यांकन वाले दिन बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य है। क्योंकि अधिक उपस्थिति से ही अध्ययन के परिणाम सटीक और उपयोगी प्राप्त होंगे।
टैबलेट पर होगा डिजिटल मूल्यांकन
जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने डिजिटल मूल्यांकन की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने टैबलेट के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। साथ ही, फॉर्म भरने और रिपोर्टिंग से जुड़ी जटिलताओं को सरल तरीके से समझाया।
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डाइट प्राचार्य मुन्नी देवी ने कहा कि बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता को समझने और उसमें आवश्यक सुधार करने की दिशा में एफएलएस एक महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक कदम है।
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उन्होंने सभी फील्ड इन्वेस्टिगेटर्स को निर्देश दिए कि वे अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा, जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ करें। उन्होंने कहा कि इस अध्ययन की सटीकता ही भविष्य में शिक्षा की नीतियों को प्रभावी बनाने का आधार बनेगी।
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प्राचार्य ने बताया कि मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ऑब्जर्वर की ड्यूटी लगाई गई है। ये ऑब्जर्वर निर्धारित 23 विद्यालयों में उपस्थित रहकर पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्म अवलोकन करेंगे। वे अपनी रिपोर्ट सीधे गूगल लिंक के माध्यम से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को भेजेंगे।
बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य
डाइट ईक्कस से सीएमडीए इंचार्ज डॉ. जगमेंद्र ने बताया कि जिले के 23 विद्यालयों का चयन इस मूल्यांकन के लिए किया गया है और उन्हें पहले ही सूचना भेज दी गई है। मूल्यांकन वाले दिन बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य है। क्योंकि अधिक उपस्थिति से ही अध्ययन के परिणाम सटीक और उपयोगी प्राप्त होंगे।
टैबलेट पर होगा डिजिटल मूल्यांकन
जिला समन्वयक एफएलएन राजेश वशिष्ठ ने डिजिटल मूल्यांकन की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने टैबलेट के जरिए मूल्यांकन प्रक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। साथ ही, फॉर्म भरने और रिपोर्टिंग से जुड़ी जटिलताओं को सरल तरीके से समझाया।