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Jind News: जुलाना में बिजली कर्मचारियों ने की गेट मीटिंग, निजीकरण और पैरलल लाइसेंस देने के फैसले का किया विरोध
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21 जुलाना 01: गेट मिटिंग में भाग लेते बिजली कर्मचारी। संवाद
जुलाना। बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 22 से 24 अक्तूबर तक होने वाली तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल को लेकर जुलाना के बिजली निगम कार्यालय में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। मीटिंग की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के ब्लॉक प्रधान संजय गिल ने की।
इस दौरान बिजली कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताते हुए हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेने का ऐलान किया। गेट मीटिंग में किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र ढांडा और एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र गोयत भी मौजूद रहे। कर्मचारी नेताओं ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए पैरलल लाइसेंस देने तथा बिजली निगमों के निजीकरण को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विरोध जताया।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से बिजली निगमों के भविष्य और कर्मचारियों के हितों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।वीरेंद्र गोयत ने कहा कि बिजली निगम आम जनता को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। बिजली जैसी महत्वपूर्ण सेवा को निजी हाथों में सौंपने से कर्मचारियों के रोजगार और उपभोक्ताओं के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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उन्होंने कहा कि बिजली निगमों का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देना।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली निगमों को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार को कर्मचारियों की मांगों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण को बढ़ावा देने वाले फैसलों का विरोध जारी रहेगा।उन्होंने प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारियों से 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल में एकजुट होकर भाग लेने की अपील की।
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इस दौरान बिजली कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताते हुए हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेने का ऐलान किया। गेट मीटिंग में किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र ढांडा और एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र गोयत भी मौजूद रहे। कर्मचारी नेताओं ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए पैरलल लाइसेंस देने तथा बिजली निगमों के निजीकरण को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विरोध जताया।
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उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों से बिजली निगमों के भविष्य और कर्मचारियों के हितों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।वीरेंद्र गोयत ने कहा कि बिजली निगम आम जनता को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। बिजली जैसी महत्वपूर्ण सेवा को निजी हाथों में सौंपने से कर्मचारियों के रोजगार और उपभोक्ताओं के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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उन्होंने कहा कि बिजली निगमों का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि निजी कंपनियों को बढ़ावा देना।कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिजली निगमों को निजी हाथों में जाने से रोकने के लिए कर्मचारी लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार को कर्मचारियों की मांगों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि निजीकरण को बढ़ावा देने वाले फैसलों का विरोध जारी रहेगा।उन्होंने प्रदेश के सभी बिजली कर्मचारियों से 22 से 24 अक्टूबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल में एकजुट होकर भाग लेने की अपील की।