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Jind News: दो शुभ योग में श्रद्धालु आज रखेंगे निर्जला एकादशी व्रत

Thu, 05 Jun 2025 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Thu, 05 Jun 2025 11:44 PM IST
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Devotees will keep Nirjala Ekadashi fast today in two auspicious yogas
05जेएनडी16: नवीन शास्त्री। स्वयं
जींद। आज निर्जला एकादशी है। हिंदू पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर हस्त नक्षत्र और व्यतीपात योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि एकादशी के व्रत से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। ऐसे में इस दिन श्रीहरि की पूजा करने के साथ-साथ विष्णु चालीसा का पाठ करने से सभी इच्छाएं पूरी और धन प्राप्ति के योग बनेंगे।
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सनातन धर्म में एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्रद्धालुओं द्वारा व्रत भी किया जाता है। ज्ये
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इस व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है। क्योंकि सभी अपनी रक्षा और श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी को पानी पिला कर सेवा करना पुण्य का भागीदार माना जाता है और इस से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
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यूं तो साल में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को सर्वोत्तम माना गया है। इस एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जानते हैं। श्रद्धालु इसी विश्वास को सार्थक करते हुए निर्जला एकादशी पर जगह-जगह मीठे पानी की छबीलें लगाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अराधना का भी विशेष महत्व है। साथ ही एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखने का महत्व है।

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सालभर में यही एकमात्र ऐसा व्रत है, जिसको करने से समस्त एकादशी का फल प्राप्त हो जाता है। यह व्रत बेहद कठिन होता है, क्योंकि इसमें निर्जला यानी बिना जल के व्रत करने का विधान है। भीम ने अपने पापों का प्रायश्चित करने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मात्र इसी एकादशी का व्रत किया था। इसके प्रभाव से उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल गए थे।
--नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर
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