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Jind News: पांडु पिंडारा तीर्थ पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
Thu, 11 Jan 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 11 Jan 2024 11:56 PM IST
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पिंडारा तीर्थ में स्नान करते हुए श्रद्धालु।
जींद। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर वीरवार को पौष अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया तथा पिंडदान करके तर्पण किया। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर बुधवार को शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग तथा कीर्तन आदि का आयोजन चलता रहा। वीरवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्यान्ह के बाद तक चलता रहा।
तीर्थ पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्य देव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। कड़ाके की ठंड व धुंध के बीच सुबह ही श्रद्धालुओं का आवागमन तीर्थ पर शुरू हो गया। तीर्थ पर पुलिसकर्मी पूरा दिन तैनात रहे। महिला घाटों पर महिला पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई गई थी। घाटों पर आटे के पिंडों के कारण फिसलन पैदा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए घाटों पर पिंड डालने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के लिए वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को भी पुलिस ने संभाला।
मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीददारी
पिंडारा तीर्थ पर पौष अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी भी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़ लगाई हुई थी। इस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे।
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तीर्थ पर दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरोंं की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया तथा सूर्य देव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। कड़ाके की ठंड व धुंध के बीच सुबह ही श्रद्धालुओं का आवागमन तीर्थ पर शुरू हो गया। तीर्थ पर पुलिसकर्मी पूरा दिन तैनात रहे। महिला घाटों पर महिला पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई गई थी। घाटों पर आटे के पिंडों के कारण फिसलन पैदा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए घाटों पर पिंड डालने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाए रखने के लिए वाहनों की पार्किंग व्यवस्था को भी पुलिस ने संभाला।
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मेले में श्रद्धालुओं ने जमकर की खरीददारी
पिंडारा तीर्थ पर पौष अमावस्या पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी भी की। तीर्थ पर जगह-जगह लोगों ने सामान बेचने के लिए फड़ लगाई हुई थी। इस पर बच्चों तथा महिलाओं ने खरीददारी की। बच्चों ने जहां अपने लिए खिलौने खरीदे, वहीं बड़ों ने भी घर के लिए सामान खरीदे।
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