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शरीर सजाने से महत्वपूर्ण है आत्मा को सजाना : नरेश चंद
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31जेएनडी15-जैन समाज तथा महिला मंडल मीनू धतरवाल को सम्म्मनित करते हुए।
नरवाना। पतराम नगर स्थित जैन स्थानक में पहुंचे संघ संचालक नरेश चंद महाराज ने प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शरीर और आत्मा के महत्व को समझो। जहाज डूब रहा हो तो जहाज की नहीं, कैप्टन की रक्षा करते हैं। इसी तरह शरीर को मजबूत ही रखना है पर आत्मा खतरे में हो तो आत्मा की रक्षा करनी है। उन्होंने कहा कि आत्मा को अपवित्र नहीं बनाना, इसे शुद्ध बनाना है।
उन्होंने कहा किसी भी तीर्थ स्थान पर जाओ तो व्यसन मुक्ति का संकल्प लेकर आओ। लोग तीर्थों पर जाते हैं, उनमें से 50 प्रतिशत भी यदि शराब छोड़ने का संकल्प ले तो जीवन के साथ-साथ देश भी पवित्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि शरीर तो गंदगी का ढेर है। इसे शुद्ध किया ही नहीं जा सकता, बल्कि इस पर लगाए जाने वाले क्रीम, पाउडर, साबुन तथा नए-नए कपड़े भी गंदे हो जाते हैं। शरीर को सजाने से भी ज्यादा आत्मा को सजाना महत्वपूर्ण है।
अजित मुनि ने कहा कि सभा में बिठमड़ा गांव से मीनु धतरवाल आई हैं। बिठमड़ा गांव की पहचान महान तपस्वी जैन संत सेवक राम महाराज के नाम से भी है। बिठमड़ा गांव की बेटी ने खो-खो की टीम में विजय हासिल करके भारत को चैंपियन बनाया है, वहीं उन्हें भी बेस्ट डिफेंडर अवॉर्ड मिला है। जैन समाज तथा महिला मंडल ने मीनू धतरवाल को सम्मानित किया।
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उन्होंने कहा किसी भी तीर्थ स्थान पर जाओ तो व्यसन मुक्ति का संकल्प लेकर आओ। लोग तीर्थों पर जाते हैं, उनमें से 50 प्रतिशत भी यदि शराब छोड़ने का संकल्प ले तो जीवन के साथ-साथ देश भी पवित्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि शरीर तो गंदगी का ढेर है। इसे शुद्ध किया ही नहीं जा सकता, बल्कि इस पर लगाए जाने वाले क्रीम, पाउडर, साबुन तथा नए-नए कपड़े भी गंदे हो जाते हैं। शरीर को सजाने से भी ज्यादा आत्मा को सजाना महत्वपूर्ण है।
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अजित मुनि ने कहा कि सभा में बिठमड़ा गांव से मीनु धतरवाल आई हैं। बिठमड़ा गांव की पहचान महान तपस्वी जैन संत सेवक राम महाराज के नाम से भी है। बिठमड़ा गांव की बेटी ने खो-खो की टीम में विजय हासिल करके भारत को चैंपियन बनाया है, वहीं उन्हें भी बेस्ट डिफेंडर अवॉर्ड मिला है। जैन समाज तथा महिला मंडल ने मीनू धतरवाल को सम्मानित किया।
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