{"_id":"6994a383a109bf8ee20724e9","slug":"daughters-created-history-in-village-danoda-kalan-jind-news-c-199-1-jnd1010-148691-2026-02-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: गांव दनौदा कलां में बेटियों ने रचा इतिहास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: गांव दनौदा कलां में बेटियों ने रचा इतिहास
Tue, 17 Feb 2026 10:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 17 Feb 2026 10:51 PM IST
विज्ञापन
17जेएनडी20: दनौदा कलां के ऐतिहासिक चबूतरे पर राजा हरिश्चंद्र का सांग करती हुई एसडी महिला महाविद
नरवाना। दनौदा कलां में परंपरा और परिवर्तन का अद्भुत संगम देखने को मिला। बिनैण खाप के ऐतिहासिक चबूतरे पर पहली बार बेटियों ने मंच संभालते हुए राजा हरिश्चंद्र का सांग प्रस्तुत किया।
सदियों से पुरुष प्रधान मानी जाने वाली सांग परंपरा में छात्राओं की पहल ने सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख दी। गांव में कई दिनों से गौशाला के समर्थन और सामाजिक जागरूकता को लेकर सांग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। एसडी महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने राजा हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित सांग का मंचन किया।
छात्राओं ने सशक्त अभिनय, भाव-भंगिमा, प्रभावशाली संवाद अदायगी और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से सत्य, त्याग और धर्मनिष्ठा की प्रतिमूर्ति राजा हरिश्चंद्र के चरित्र को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही छात्राएं मंच पर उतरीं, ग्रामीणों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। प्रस्तुति में आत्मविश्वास और दृढ़ता साफ झलक रही थी।
विज्ञापन
बुजुर्गों ने इसे सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया जबकि युवाओं ने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम करार दिया। हरियाणा की प्राचीन लोकनाट्य परंपरा में सांग का विशेष महत्व रहा है।
लोकभाषा, गीत-संगीत और संवादों के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक कथाओं को जन-जन तक पहुंचाने का यह सशक्त माध्यम रहा है। परंपरागत रूप से इस मंच पर पुरुषों का वर्चस्व रहा लेकिन दनौदा के चबूतरे पर बेटियों ने रुढ़ियों को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम की। ग्रामीणों ने कहा कि बेटियां अब शिक्षा, खेल, प्रशासन और कला के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
दनौदा का यह आयोजन उसी बदलते दौर की झलक है जहां समाज बेटियों को बराबरी का मंच देने के लिए तैयार है। कार्यक्रम के दौरान पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इस अवसर पर खाप प्रधान रघुवीर नैन, बलवान नैन, मियां सिंह, पप्पू फौजी, खाप प्रवक्ता संदीप दनौदा, बलजीत नैन, बीरा नैन, सतपाल नैन, जयभगवान नैन, संदीप चौहान, कृष्ण घनघस, कुलदीप मास्टर, राममेहर नैन, मेहंदर नैन, बलजीत उर्फ मालू, सरदार हरचरण, जयवीर नैन, नरसी आदि मौजूद रहे।
दनौदा कलां गांव की यह पहल केवल सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं, बल्कि समानता और नई सोच की मजबूत शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। बिनैण खाप के चबूतरे से उठी यह नई आवाज आने वाले समय में अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
विज्ञापन
सदियों से पुरुष प्रधान मानी जाने वाली सांग परंपरा में छात्राओं की पहल ने सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख दी। गांव में कई दिनों से गौशाला के समर्थन और सामाजिक जागरूकता को लेकर सांग कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। एसडी महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने राजा हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित सांग का मंचन किया।
विज्ञापन
छात्राओं ने सशक्त अभिनय, भाव-भंगिमा, प्रभावशाली संवाद अदायगी और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से सत्य, त्याग और धर्मनिष्ठा की प्रतिमूर्ति राजा हरिश्चंद्र के चरित्र को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम के दौरान जैसे ही छात्राएं मंच पर उतरीं, ग्रामीणों ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। प्रस्तुति में आत्मविश्वास और दृढ़ता साफ झलक रही थी।
विज्ञापन
बुजुर्गों ने इसे सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव का संकेत बताया जबकि युवाओं ने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम करार दिया। हरियाणा की प्राचीन लोकनाट्य परंपरा में सांग का विशेष महत्व रहा है।
लोकभाषा, गीत-संगीत और संवादों के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक और ऐतिहासिक कथाओं को जन-जन तक पहुंचाने का यह सशक्त माध्यम रहा है। परंपरागत रूप से इस मंच पर पुरुषों का वर्चस्व रहा लेकिन दनौदा के चबूतरे पर बेटियों ने रुढ़ियों को तोड़ते हुए नई मिसाल कायम की। ग्रामीणों ने कहा कि बेटियां अब शिक्षा, खेल, प्रशासन और कला के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।
दनौदा का यह आयोजन उसी बदलते दौर की झलक है जहां समाज बेटियों को बराबरी का मंच देने के लिए तैयार है। कार्यक्रम के दौरान पूरे गांव में उत्साह का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इस अवसर पर खाप प्रधान रघुवीर नैन, बलवान नैन, मियां सिंह, पप्पू फौजी, खाप प्रवक्ता संदीप दनौदा, बलजीत नैन, बीरा नैन, सतपाल नैन, जयभगवान नैन, संदीप चौहान, कृष्ण घनघस, कुलदीप मास्टर, राममेहर नैन, मेहंदर नैन, बलजीत उर्फ मालू, सरदार हरचरण, जयवीर नैन, नरसी आदि मौजूद रहे।
दनौदा कलां गांव की यह पहल केवल सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं, बल्कि समानता और नई सोच की मजबूत शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। बिनैण खाप के चबूतरे से उठी यह नई आवाज आने वाले समय में अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।