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सड़कों पर विपक्ष, लाइनों में लोग, बाजार बेहाल
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Mon, 28 Nov 2016 11:57 PM IST
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शहर में प्रदर्शन करते कांग्रेसी।
- फोटो : jind
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20 दिन पहले हुई नोट बंदी का असर अब भी हालात सामान्य नहीं हो रहे हैं। दो दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को जैसी ही बैंक खुले, लोग बैंकों और एटीएम की ओर दौड़े, लेकिन हालात पहले जैसे ही रहे। अधिकतर बैंकों और एटीएम में कैश नहीं मिल सका। हालांकि इसको लेकर कांग्रेस व इनेलो सहित कई दलों ने बंद का आह्वान किया था, लेकिन यह बेअसर रहा। वहीं, माकपा और कांग्रेस ने प्रदर्शन कर नोट बंदी पर रोष जताया।
इनेलो ने डीसी को ज्ञापन सौंपकर नोट बंदी में लोगों को राहत देने की मांग की। वहीं, दो की दिन छुट्टी के सोमवार को बैंक खुले तो लोगों की लंबी लाइन लग गई। बैंक और एटीएम खुलने से पहले ही सैकड़ों लोग लाइनों में लग गए। अधिकतर एटीएम दो घंटे में ही जवाब दे गए। एसबीआई, एसबीओपी और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों के पास ही कैश उपलब्ध रहा। जिले में 121 में से महज 38 एटीएम सोमवार को चले। इधर, व्यापारियों को अब भी मंदी की मार से उबरने का इंतजार है।
नोट बंदी को लेकर कांग्रेस नेता प्रमोद सहवाग और छोटा सिंह चौहान के नेतृत्व में झांझ गेट से नगर परिषद होते हुए घंटाघर तक बाजार में प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। कांग्रेसियों ने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री के कुप्रबंधन के कारण आज देश भर में लोग लाइनों में लगे हैं। सरकार को इसके लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।
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माकपा ने किया प्रदर्शन
नोट बंदी के दौरान लोगों को हो रही परेशानी के मुद्दे पर माकपा कार्यकर्ताओं ने भी नेहरू पार्क से शहर में प्रदर्शन किया। माकपा नेताओं ने कहा कि जब तक नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचती, पुराने नोटों का प्रचलन होना चाहिए। इन लोगों ने कहा कि अब तक देश भर में 75 से अधिक लोग लाइनों में लकर मर चुके हैं। सरकार के इस फैसले से छोटे दुकानदारों, मजदूरों और किसानों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है।
नोटबंदी के विरोध में इनेलो ने सौंपा उपायुक्त को ज्ञापन
इनेलो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा आरबीआई द्वारा 500 तथा एक हजार रुपये के नोटों के चलन को बंद करने पर विरोध जताते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इनेलो ने कहा कि कुल मुद्रा के नोटों के 86 प्रतिशत के चलन को अचानक बंद कर देने से किसान से लेकर छोटे व्यापारियों एवं मध्यमवर्गीय परिवारों से लेकर दिहाड़ीदार मजदूरों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इनेलो ने ज्ञापन के माध्यम से कॉ-आपरेटिव बैंकों में लेनदेन की प्रक्रिया पर लगाई गई पाबंदी हटाने, छोटे व्यापारियों, किसानों तथा मजदूरों की निकासी की सीमा दोगुनी करने की मांग की। इस मौके पर विधायक परमेंद्र सिंह ढुल भी मौजूद रहे।
दुकानें खुली, कारोबार बंद
विपक्ष के बंद के आह्वान के बाद हालांकि बाजार खुले रहे, लेकिन करेंसी संकट के करण ग्राहक नहीं पहुंचे। ऐेसे में दुकान खोलकर भी व्यापारी कारोबार नहीं कर पाए। जूता व्यापारी सुशील शर्मा के अनुसार नवंबर के महीने में कारोबार सबसे अधिक रहता था, लेकिन इस बार करीब 30 प्रतिशत काम ही आ रहा है।
बैंकों में मारामारी
नरवाना: दो दिन की छुट्टी होने के बाद सोमवार को शहर के सभी बैंक खुले, लेकिन बैंक खुलते ही उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लग गईं। इससे पूरे दिन सभी बैंकों में मारामारी रही और आधे से ज्यादा लोगों को बिना कैश ही घर वापस लौटना पड़ा। अधिकतर बैंकों के एटीएम भी ठप रहे। ऐसे में लोग कैश लेने के लिए दर-दर भटकते रहे। एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक ओल्ड कोर्ट रोड पर होने के कारण वाहनों से जाम लगा रहा। उपभोक्ताओं ने बताया कि कैश जरूरत के हिसाब से नहीं मिल रहा है। घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
एटीएम-बैंकों में लाइनें नहीं हो रहीं कम
उचाना। एक हजार, पांच सौ के नोटों के बाद बैंक में जमा करवाने, खातों में जमा राशि को लेने के लिए बैंकों, एटीएम में लोगों की लाइनें कम नहीं हो रही हैं। दो दिनों के बैंकों के अवकाश के बाद सोमवार को बैंक खुलने से पहले ही सुबह लोग बैंकों के बाहर लाइनों में लग गए। कई लोग तो उनमें ऐसे थे, जिन्हें शुक्रवार को बैंक में लाइन में लगने के बाद नकदी नहीं मिली थी। घर के कामकाज छोड़ कर महिलाएं, दुकानें छोड़ कर दुकानदार, खेती छोड़ कर किसान लाइनों में लगे नजर आए।
छुट्टी के बाद खुले बैंक नहीं मिला कैश
सफीदों। दो दिन बैंकों की छुटी होने के बाद सोमवार को लोगों को काफी उम्मीद थी, लेकिन सोमवार को भी निराशा हाथ लगी। लोग घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन कैश नहीं मिल पाया। वहीं, पीएनबी ने कैश नहीं होने का पर्चा गेट पर लगाया तो लोगों में रोष देखा गया। केनरा बैंक में 12 बजे ही उपभोक्ताओं को कैश खत्म होने की बात कहकर बैंक से बाहर निकाल दिया गया, जिसके बाद उपभोक्ताओं ने बैंक कर्मचारियों व सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। उपभोक्ताओं ने कहा कि वे बैंक के पिछले कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बैंक मेें कैश नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस घर भेज दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक कर्मियों द्वारा अपने चहेतों को कैश दिया जा रहा है।
शादी के कार्ड भी बने बेमानी
गांव सिंघाना निवासी चैन सिंह अपने लड़के की शादी खर्च के लिए दस हजार रुपये निकलवाने के लिए केनरा बैंक के कई दिनों से चक्कर लगा रहा है। ऐसे में ढाई लाख मिलना तो दूर बैंक कर्मियों द्वारा उसे दस हजार रुपये भी नहीं दिए जा रहे हैं। चैन सिंह ने कहा कि उसके लड़के की आठ दिसंबर की शादी है, लेकिन शादी की तैयारियां करने के लिए उसके पास एक पैसा भी नहीं है। वे जब भी बैंक में आते है, बैंक कर्मी उन्हें कैश खत्म होने की बात कहते हैं। वहीं, बैंक प्रबंधक दीपक के अनुसार कैश अधिक नहीं आने से परेशानी हो रही है। आज उनके पास चार लाख रुपये कैश भेजा गया था, जो दोपहर 12 बजे तक खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा कि चैन सिंह सप्ताह पहले 11 हजार रुपये ले चुका है। बैंक किसी चहेतों को कैश नहीं दे रहा।
आरबीआई के नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
सफीदों की नगरपालिका स्थित स्टेट बैंक आफ पटियाला आरबीआई की हिदायतों की धज्जियां उड़ा रहा है। बैंक में सिर्फ दो ही लाइनें बनवाई गई हैं। इससे बुजुर्गों को लाइन में खड़े रहने से परेशानी हो रही है। बैंक में पहुंची ओमपति, गोपाल सिंह, भजन सिंह आदि ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले तो बैंक के बाहर लाइन मेें एक घंटे तक खड़ा किया जा रहा है। उसके बाद बैंक के अंदर भी अन्य लोगों की लाइन में खड़ा किया जा रहा है। साथ ही बैंक में एंट्री नहीं किए जाने से चेक लगाने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।
शाखा प्रबंधक मयंक हीरा के अनुसार कैश काउंटर पर तैनात कर्मी के परिवार में किसी की मौत हो कई थी। उसके जाने के बाद बैंक में उपभोक्ताओं के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई थी। इस कारण उपभोक्ताओं को बाहर निकाला गया था। सुरक्षा कर्मी को बोलकर बुजुर्गों की अलग लाइन के लिए आदेश दे दिए हैं।
आज कैश नहीं आने के कारण पर्चे लगाए गए हैं। उन्होंने दस करोड़ की डिमांड भेजी थी, लेकिन कैश बिल्कुल भी नहीं भेजा गया। शुक्रवार को कैश भेजा गया था, जिसमें उन्होंने 900 उपभोक्ताओं से लेन-देन किया था। मंगलवार को कैश आने की संभावना है।
प्रदीप शर्मा, प्रबंधक पीएनबी
जुलाना में दो घंटे में खत्म हुआ कैश
जुलाना। नोटबंदी के फैसले के 20 दिन बाद भी लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कैश कम होने के कारण बैंकों से कैश दो घंटे में ही खत्म हो जाता है। बैंकों में भारी भीड़ को बेकाबू करने में पुलिसकर्मियों के भी पसीने छूटते नजर आए। जुलाना निवासी सतीश, करसोला निवासी रामकेश का कहना है कि बैंक में कैश कम आ रहा हैं और सुबह 11 बजे ही कैश खत्म हो जाता है। उन्हें बिना रुपये लिए ही बैंक से बैरंग लौटना पड़ रहा है। उधर, कस्बे के एक मात्र डाकघर में एक सप्ताह से कैश नहीं आ रहा है।
बैंक में छह लाख रुपये ही कैश था, जो लोगों को दे दिया गया है। बैंक में दो हजार के नोट ही आ रहे हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। शाम को करीब छह बजे कैश आएगा, जिसे सुबह लोगों को दिया जाएगा। ज्यादा मांग करने के बावजूद कम कैश मिल रहा है।
सुनील कुमार, डिप्टी मैनेजर ओबीसी, जुलाना
डाकघर में बैंक मैनेजर से पांच लाख की डिमांड करने पर भी मात्र दो से तीन लाख रुपये ही मिल रहे थे। अभी एक सप्ताह से डाकघर में कैश ही नहीं आ रहा है। बैंक मैनेजर से बार बार मांग करने पर भी कैश नही मिल पा रहा है।
सुनील कुमार, पोस्टमास्टर जुलाना
जनता ने सिरे नकारकर विपक्ष
विपक्ष के भारत बंद के आह्वान पर भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष पुष्पा तायल ने कहा कि तमाम परेशानी उठाकर भी देश की जनता ने विपक्ष को नकार दिया है। देश की जनता ने पूर्ण रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होने का प्रमाण दे दिया है।
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इनेलो ने डीसी को ज्ञापन सौंपकर नोट बंदी में लोगों को राहत देने की मांग की। वहीं, दो की दिन छुट्टी के सोमवार को बैंक खुले तो लोगों की लंबी लाइन लग गई। बैंक और एटीएम खुलने से पहले ही सैकड़ों लोग लाइनों में लग गए। अधिकतर एटीएम दो घंटे में ही जवाब दे गए। एसबीआई, एसबीओपी और पीएनबी जैसे बड़े बैंकों के पास ही कैश उपलब्ध रहा। जिले में 121 में से महज 38 एटीएम सोमवार को चले। इधर, व्यापारियों को अब भी मंदी की मार से उबरने का इंतजार है।
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नोट बंदी को लेकर कांग्रेस नेता प्रमोद सहवाग और छोटा सिंह चौहान के नेतृत्व में झांझ गेट से नगर परिषद होते हुए घंटाघर तक बाजार में प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। कांग्रेसियों ने कहा कि सरकार और प्रधानमंत्री के कुप्रबंधन के कारण आज देश भर में लोग लाइनों में लगे हैं। सरकार को इसके लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।
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माकपा ने किया प्रदर्शन
नोट बंदी के दौरान लोगों को हो रही परेशानी के मुद्दे पर माकपा कार्यकर्ताओं ने भी नेहरू पार्क से शहर में प्रदर्शन किया। माकपा नेताओं ने कहा कि जब तक नई करेंसी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचती, पुराने नोटों का प्रचलन होना चाहिए। इन लोगों ने कहा कि अब तक देश भर में 75 से अधिक लोग लाइनों में लकर मर चुके हैं। सरकार के इस फैसले से छोटे दुकानदारों, मजदूरों और किसानों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है।
नोटबंदी के विरोध में इनेलो ने सौंपा उपायुक्त को ज्ञापन
इनेलो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा आरबीआई द्वारा 500 तथा एक हजार रुपये के नोटों के चलन को बंद करने पर विरोध जताते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इनेलो ने कहा कि कुल मुद्रा के नोटों के 86 प्रतिशत के चलन को अचानक बंद कर देने से किसान से लेकर छोटे व्यापारियों एवं मध्यमवर्गीय परिवारों से लेकर दिहाड़ीदार मजदूरों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इनेलो ने ज्ञापन के माध्यम से कॉ-आपरेटिव बैंकों में लेनदेन की प्रक्रिया पर लगाई गई पाबंदी हटाने, छोटे व्यापारियों, किसानों तथा मजदूरों की निकासी की सीमा दोगुनी करने की मांग की। इस मौके पर विधायक परमेंद्र सिंह ढुल भी मौजूद रहे।
दुकानें खुली, कारोबार बंद
विपक्ष के बंद के आह्वान के बाद हालांकि बाजार खुले रहे, लेकिन करेंसी संकट के करण ग्राहक नहीं पहुंचे। ऐेसे में दुकान खोलकर भी व्यापारी कारोबार नहीं कर पाए। जूता व्यापारी सुशील शर्मा के अनुसार नवंबर के महीने में कारोबार सबसे अधिक रहता था, लेकिन इस बार करीब 30 प्रतिशत काम ही आ रहा है।
बैंकों में मारामारी
नरवाना: दो दिन की छुट्टी होने के बाद सोमवार को शहर के सभी बैंक खुले, लेकिन बैंक खुलते ही उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें लग गईं। इससे पूरे दिन सभी बैंकों में मारामारी रही और आधे से ज्यादा लोगों को बिना कैश ही घर वापस लौटना पड़ा। अधिकतर बैंकों के एटीएम भी ठप रहे। ऐसे में लोग कैश लेने के लिए दर-दर भटकते रहे। एसबीआई और पंजाब नेशनल बैंक ओल्ड कोर्ट रोड पर होने के कारण वाहनों से जाम लगा रहा। उपभोक्ताओं ने बताया कि कैश जरूरत के हिसाब से नहीं मिल रहा है। घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
एटीएम-बैंकों में लाइनें नहीं हो रहीं कम
उचाना। एक हजार, पांच सौ के नोटों के बाद बैंक में जमा करवाने, खातों में जमा राशि को लेने के लिए बैंकों, एटीएम में लोगों की लाइनें कम नहीं हो रही हैं। दो दिनों के बैंकों के अवकाश के बाद सोमवार को बैंक खुलने से पहले ही सुबह लोग बैंकों के बाहर लाइनों में लग गए। कई लोग तो उनमें ऐसे थे, जिन्हें शुक्रवार को बैंक में लाइन में लगने के बाद नकदी नहीं मिली थी। घर के कामकाज छोड़ कर महिलाएं, दुकानें छोड़ कर दुकानदार, खेती छोड़ कर किसान लाइनों में लगे नजर आए।
छुट्टी के बाद खुले बैंक नहीं मिला कैश
सफीदों। दो दिन बैंकों की छुटी होने के बाद सोमवार को लोगों को काफी उम्मीद थी, लेकिन सोमवार को भी निराशा हाथ लगी। लोग घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन कैश नहीं मिल पाया। वहीं, पीएनबी ने कैश नहीं होने का पर्चा गेट पर लगाया तो लोगों में रोष देखा गया। केनरा बैंक में 12 बजे ही उपभोक्ताओं को कैश खत्म होने की बात कहकर बैंक से बाहर निकाल दिया गया, जिसके बाद उपभोक्ताओं ने बैंक कर्मचारियों व सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। उपभोक्ताओं ने कहा कि वे बैंक के पिछले कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन बैंक मेें कैश नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस घर भेज दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक कर्मियों द्वारा अपने चहेतों को कैश दिया जा रहा है।
शादी के कार्ड भी बने बेमानी
गांव सिंघाना निवासी चैन सिंह अपने लड़के की शादी खर्च के लिए दस हजार रुपये निकलवाने के लिए केनरा बैंक के कई दिनों से चक्कर लगा रहा है। ऐसे में ढाई लाख मिलना तो दूर बैंक कर्मियों द्वारा उसे दस हजार रुपये भी नहीं दिए जा रहे हैं। चैन सिंह ने कहा कि उसके लड़के की आठ दिसंबर की शादी है, लेकिन शादी की तैयारियां करने के लिए उसके पास एक पैसा भी नहीं है। वे जब भी बैंक में आते है, बैंक कर्मी उन्हें कैश खत्म होने की बात कहते हैं। वहीं, बैंक प्रबंधक दीपक के अनुसार कैश अधिक नहीं आने से परेशानी हो रही है। आज उनके पास चार लाख रुपये कैश भेजा गया था, जो दोपहर 12 बजे तक खत्म हो चुका था। उन्होंने कहा कि चैन सिंह सप्ताह पहले 11 हजार रुपये ले चुका है। बैंक किसी चहेतों को कैश नहीं दे रहा।
आरबीआई के नियमों की उड़ रहीं धज्जियां
सफीदों की नगरपालिका स्थित स्टेट बैंक आफ पटियाला आरबीआई की हिदायतों की धज्जियां उड़ा रहा है। बैंक में सिर्फ दो ही लाइनें बनवाई गई हैं। इससे बुजुर्गों को लाइन में खड़े रहने से परेशानी हो रही है। बैंक में पहुंची ओमपति, गोपाल सिंह, भजन सिंह आदि ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले तो बैंक के बाहर लाइन मेें एक घंटे तक खड़ा किया जा रहा है। उसके बाद बैंक के अंदर भी अन्य लोगों की लाइन में खड़ा किया जा रहा है। साथ ही बैंक में एंट्री नहीं किए जाने से चेक लगाने वाले उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।
शाखा प्रबंधक मयंक हीरा के अनुसार कैश काउंटर पर तैनात कर्मी के परिवार में किसी की मौत हो कई थी। उसके जाने के बाद बैंक में उपभोक्ताओं के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई थी। इस कारण उपभोक्ताओं को बाहर निकाला गया था। सुरक्षा कर्मी को बोलकर बुजुर्गों की अलग लाइन के लिए आदेश दे दिए हैं।
आज कैश नहीं आने के कारण पर्चे लगाए गए हैं। उन्होंने दस करोड़ की डिमांड भेजी थी, लेकिन कैश बिल्कुल भी नहीं भेजा गया। शुक्रवार को कैश भेजा गया था, जिसमें उन्होंने 900 उपभोक्ताओं से लेन-देन किया था। मंगलवार को कैश आने की संभावना है।
प्रदीप शर्मा, प्रबंधक पीएनबी
जुलाना में दो घंटे में खत्म हुआ कैश
जुलाना। नोटबंदी के फैसले के 20 दिन बाद भी लोगों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कैश कम होने के कारण बैंकों से कैश दो घंटे में ही खत्म हो जाता है। बैंकों में भारी भीड़ को बेकाबू करने में पुलिसकर्मियों के भी पसीने छूटते नजर आए। जुलाना निवासी सतीश, करसोला निवासी रामकेश का कहना है कि बैंक में कैश कम आ रहा हैं और सुबह 11 बजे ही कैश खत्म हो जाता है। उन्हें बिना रुपये लिए ही बैंक से बैरंग लौटना पड़ रहा है। उधर, कस्बे के एक मात्र डाकघर में एक सप्ताह से कैश नहीं आ रहा है।
बैंक में छह लाख रुपये ही कैश था, जो लोगों को दे दिया गया है। बैंक में दो हजार के नोट ही आ रहे हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। शाम को करीब छह बजे कैश आएगा, जिसे सुबह लोगों को दिया जाएगा। ज्यादा मांग करने के बावजूद कम कैश मिल रहा है।
सुनील कुमार, डिप्टी मैनेजर ओबीसी, जुलाना
डाकघर में बैंक मैनेजर से पांच लाख की डिमांड करने पर भी मात्र दो से तीन लाख रुपये ही मिल रहे थे। अभी एक सप्ताह से डाकघर में कैश ही नहीं आ रहा है। बैंक मैनेजर से बार बार मांग करने पर भी कैश नही मिल पा रहा है।
सुनील कुमार, पोस्टमास्टर जुलाना
जनता ने सिरे नकारकर विपक्ष
विपक्ष के भारत बंद के आह्वान पर भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष पुष्पा तायल ने कहा कि तमाम परेशानी उठाकर भी देश की जनता ने विपक्ष को नकार दिया है। देश की जनता ने पूर्ण रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होने का प्रमाण दे दिया है।