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देश की आत्मा को बचाने के लिए लड़ा जा रहा है धर्मयुद्ध : संधू

Wed, 17 Mar 2021 12:07 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 12:07 AM IST
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Crusade is being fought to save the soul of the country: Sandhu
खटकड़ टोल पर किसानों के बीच पहुंचे शहीद भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र संधू। संवाद - फोटो : Jind
कृषि कानूनों के खिलाफ खटकड़ टोल के पास धरना दे रहे किसानों के बीच शहीद भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र संधू पहुंचे। उनके यहां आने पर किसानोें ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
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यादवेंद्र संधू ने कहा कि देश के धरती पुत्र कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर दिल्ली के विभिन्न सीमाओं पर तीन महीने से संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान 300 के करीब किसानों की जान जा चुकी है। ये किसान योद्धा थे, जो मांगों को लेकर अपनी जान की कुर्बानी दे चुके हैं। देश की 70 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती हैं। देश की आत्मा को अगर देखना है तो गांव में जाना होता है। यह संघर्ष, लड़ाई, धर्मयुद्ध देश की आत्मा को बचाने के लिए लड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान भगत सिंह के सच्चे वारिस हैं, जो देश को बचाने के लिए घरों से निकले हैं।
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उन्होंने कहा कि कृषि कानून देश की फसल व नस्ल को बर्बाद करने के लिए बनाए गए हैं। स्वतंत्रता से पहले लाखों लोगों ने देश को आजाद करवाने के लिए कुर्बानी दी थी। उनकी एक ही मांग होती थी कि देश के अन्नदाता व मजदूर को उसका हक मिले। सत्ता परिवर्तन हो तो गया, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन नहीं करवा पाए। लोगों ने हर बार राजनेताओं पर भरोसा किया। चुन-चुनकर संसद में भेजा। संसद में जाकर कोई कांग्रेस का बन गया तो कोई भाजपा का या कोई दूसरी पार्टी का। कोई भी वहां जाकर किसान या सच्चा हिंदुस्तानी नहीं बन पाया। इसलिए किसानों को आज सड़कों पर आना पड़ रहा है।
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संधू ने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान-जय किसान का नारा दिया था। उस नारे का अनुसरण युवा पीढ़ियों ने किया। वह हिंदुस्तान जो अकाल के दंश में रहता था, जब गेहूं तक बाहर से लाना पड़ता था। ऐसी हरित क्रांति किसानों ने की कि आज देश में कोई भूखा नहीं सोता है। आज किसान की जमीन को उससे छीनने के लिए कृषि कानून लाए गए हैं। देश की आजादी से पहले अगर कोई कानून बनना चाहिए था तो एमएसपी पर बनना चाहिए था। इससे किसान को उसकी फसल का भाव दिया जाए। देश के हर किसान को एमएसपी मिले। आज उसको लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कल खटकड़ टोल प्लाजा से टिकरी बॉर्डर के लिए निकलेगा पैदल जत्था
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 18 मार्च को खटकड़ टोल प्लाजा से शहीद यादगार किसान-मजदूर पद यात्रा शुरू की जाएगी। इसमें युवा, किसान, मजदूर, महिलाएं व विद्यार्थी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।
किसान सभा के नेता रोहताश नगूरां व सीटू के जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि 18 मार्च को खटकड़ टोल प्लाजा से युवाओं का यह पैदल जत्था टिकरी बॉर्डर के लिए रवाना होगा। 18 मार्च को जींद स्थित नेहरू पार्क में एक जनसभा का आयोजन किया जाएगा। यहां से जत्था किनाना, गतौली व जुलाना होते हुए किलाजफरगढ़ पहुंचेगा। यहां पर जत्थे का रात्रि ठहराव होगा। कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि यह पैदल जत्था 23 मार्च को शहीद भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के शहादत दिवस पर टिकरी बॉर्डर पर पहुंचकर शहीदी दिवस मनाएगा।
इतिहास को दोहराएंगे किसान
कृषि कानूनों के विरोध में 82वें दिन नरवाना क्षेत्र के किसानों का धरना बद्दोवाल टोल प्लाजा पर जारी रहा। मंगलवार को धरने की अध्यक्षता भरपाई बद्दोवाल ने की। दबलैन, सुंदरपुरा, बडनपुर, उझाना, नेपेवाला, कोयल, धमतान, कालवन, लोन गांवों के लोग धरने में शामिल हुए।

किसान सभा के जिला सचिव चांद बहादुर कहा कि आज आंदोलनरत अन्नदाताओं को देशद्रोही, आतंकवादी, खालिस्तानी, सड़कछाप, आंदोलनजीवी और परजीवी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नेता बहादुर शाह जफर, नानासाहेब, अजीमुल्ला खान, मंगल पांडे, महारानी लक्ष्मी बाई, वीर कुंवर सिंह मौलाना, अहमद शाह सहित अन्य क्रांतिकारी वीरों ने किसानों के लिए आंदोलन किए थे। उन्होंने कहा कि जब भी हमारे देश की जनता किसी आंदोलन के लिए उठी है तो उसमें विजय करके की मानती है। किसान आंदोलन में भी वहीं इतिहास दोहराया जाएगा।
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