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सीआरएसयू : पूर्व रजिस्ट्रार के खिलाफ दस्तावेज गायब होने की पुलिस को दी जाएगी शिकायत
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विवि (सीआरएसयू) में दो साल पहले गायब हुए दस्तावेज के मामले में अब विवि प्रशासन पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजबीर मोर के खिलाफ पुलिस को शिकायत देगा। वीरवार को हुई कार्यकारी परिषद की मीटिंग में इसका फैसला लिया गया। बैठक में जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तय हुआ कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाए।
गौरतलब है कि फरवरी 2019 में विश्वविद्यालय में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती के लिए साक्षात्कार करवाए गए थे। आरोप है कि उसी समय इनके सील बंध लिफाफे गायब हुए हैं। उस समय डॉ. राजबीर मोर विवि में रजिस्ट्रार के पद पर थे। इस मामले की जांच से पहले पत्र लिख कर विवि द्वारा डॉ. राजबीर मोर को पत्र भेज कर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने यह सभी दस्तावेज उनके पास होने से मना कर दिया था। इसके बाद विवि ने इस मामले की जांच कमेटी से करवाने का फैसला लिया। जांच कमेटी ने रिपोर्ट वीसी को सौंप दी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डॉ. राजबीर मोर के खिलाफ देते हुए उन्हें दोषी माना है।
कार्यकाल पूरा होने पर नहीं ली एनओसी
विवि के रजिस्ट्रार प्रो. राजेश पूनिया ने बताया कि कार्यकारी परिषद की मीटिंग में फैसला लिया गया है कि पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. मोर द्वारा उनका कार्यकाल पूरा होने पर भी एनओसी व रिलीविंग नहीं ली। इसके बावजूद उन्होंने दूसरी जगह सेवा शुरू कर दी, जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा खुद ही एनओसी तैयार की गई। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। कागजात गुम होने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को लिखा जाएगा।
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मैं ईमानदार, भ्रष्टाचारियों का करूंगा मुकाबला : डॉ. मोर
सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। इससे साफ है कि वीसी और रजिस्ट्रार खुद ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। विवि में हुईं भर्तियों का कोई भी कागजात मेरे पास नहीं है। मेरा कार्यकाल पूरा होने पर कुलपति द्वारा ही फेयरवेल किया गया। उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। इसलिए किसी भी तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं है। जांच कमेटी के बारे में मैंने सदस्यों की जानकारी मांगी थी, जो नहीं दी गई। ऐसे में वे कमेटी के समक्ष पेश नहीं हुए। मेरी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की गई थी। मैं ईमानदार हूं और भ्रष्टाचारियों का डट कर मुकाबला करूंगा। यह लोग मेरी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. राजबीर मोर, पूर्व रजिस्ट्रार, सीआरएसयू।
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गौरतलब है कि फरवरी 2019 में विश्वविद्यालय में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर की भर्ती के लिए साक्षात्कार करवाए गए थे। आरोप है कि उसी समय इनके सील बंध लिफाफे गायब हुए हैं। उस समय डॉ. राजबीर मोर विवि में रजिस्ट्रार के पद पर थे। इस मामले की जांच से पहले पत्र लिख कर विवि द्वारा डॉ. राजबीर मोर को पत्र भेज कर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने यह सभी दस्तावेज उनके पास होने से मना कर दिया था। इसके बाद विवि ने इस मामले की जांच कमेटी से करवाने का फैसला लिया। जांच कमेटी ने रिपोर्ट वीसी को सौंप दी थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डॉ. राजबीर मोर के खिलाफ देते हुए उन्हें दोषी माना है।
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कार्यकाल पूरा होने पर नहीं ली एनओसी
विवि के रजिस्ट्रार प्रो. राजेश पूनिया ने बताया कि कार्यकारी परिषद की मीटिंग में फैसला लिया गया है कि पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. मोर द्वारा उनका कार्यकाल पूरा होने पर भी एनओसी व रिलीविंग नहीं ली। इसके बावजूद उन्होंने दूसरी जगह सेवा शुरू कर दी, जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। पूर्व रजिस्ट्रार द्वारा खुद ही एनओसी तैयार की गई। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। कागजात गुम होने के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को लिखा जाएगा।
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मैं ईमानदार, भ्रष्टाचारियों का करूंगा मुकाबला : डॉ. मोर
सरकार द्वारा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। इससे साफ है कि वीसी और रजिस्ट्रार खुद ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। विवि में हुईं भर्तियों का कोई भी कागजात मेरे पास नहीं है। मेरा कार्यकाल पूरा होने पर कुलपति द्वारा ही फेयरवेल किया गया। उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। इसलिए किसी भी तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं है। जांच कमेटी के बारे में मैंने सदस्यों की जानकारी मांगी थी, जो नहीं दी गई। ऐसे में वे कमेटी के समक्ष पेश नहीं हुए। मेरी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की गई थी। मैं ईमानदार हूं और भ्रष्टाचारियों का डट कर मुकाबला करूंगा। यह लोग मेरी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
- डॉ. राजबीर मोर, पूर्व रजिस्ट्रार, सीआरएसयू।