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जिले में पांच हजार एकड़ में जलभराव, फसलों पर संकट

Thu, 22 Jul 2021 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jul 2021 12:12 AM IST
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Crisis on waterlogged crops in 5 thousands acres in the district
बुढा खेड़ा में असंध ड्रेन ओवरफ्लो होकर खेतों में भरा पानी। संवाद - फोटो : Jind
एक सप्ताह में जिले में हुई 122.42 एमएम बारिश ने उचाना, अलेवा, पिल्लूखेड़ा व सफीदों क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है। जिले में करीब पांच हजार एकड़ खेतों में जलभराव है। इससे प्रशासन द्वारा बाढ़ राहत के लिए की गई तैयारियों की भी पोल खुल गई है। खेतों में अधिक जलभराव होने के कारण किसान बुधवार को बेरीखेड़ा पंप हाउस पर पहुंचे, जहां सिर्फ एक ही पंप चलता मिला। वहीं जेनरेटर रूम बंद होने व कर्मचारी न होने पर लोगों ने रोष जताया।
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दूसरी तरफ भाजपा के जिलाध्यक्ष राजू मोर ने भी सफीदों व पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में जलभराव का दौरा किया। उचाना क्षेत्र में गिरदावरी के लिए प्रशासनिक टीम को जाना था, लेकिन ईद की छुट्टी होने के कारण यह टीम नहीं गई। ऐसे में अब किसानों को पानी की निकासी का इंतजार है। इन ब्लॉक की पांच हजार एकड़ से अधिक फसल में पानी भरा हुआ है।
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हालांकि बारिश के मौसम से पहले प्रशासन द्वारा तमाम इंतजाम करने का दवा किया गया, लेकिन दो ही बारिश में इन तैयारियों की पोल खुल गई है। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी भारी जलभराव हुआ है। इससे करीब पांच हजार एकड़ फसल पानी में भर गया है। इसकी निकासी के लिए प्रशासन द्वारा काम तो किया जा रहा है, लेकिन यह इतना धीमा है कि किसान परेशान हैं। काफी किसानों ने महंगे ठेके पर खेत लेकर फसल लगाई है और यह पानी में डूब रही है।
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छात्तर, थूआ, संडील मांडी व लोधर में भी जलभराव से संकट
दूसरी ओर उचाना व अलेवा क्षेत्र के गांव छात्तर, थूआ, संडील, मांडी व लोधर में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। जाखोली माइनर में अधिक पानी आने के कारण पांच दिन पहले संडील व मांडी गांव में जलभराव की स्थिति बनी थी, लेकिन इसके बाद हुई बारिश में कई ओर गांवों में भी फसल डूब गई हैं।
दो महीने पहले की थी बेटी की शादी, कर्ज उतारना है
दो महीने पहले बेटी की शादी की है। इसमें कुछ कर्ज किया है। तीन एकड़ खेत ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई है। कर्ज उतारने के लिए रात दिन खेत में मेहनत की, लेकिन अब जलभराव से फसल पर संकट है।
- सत्यवान, किसान गांव कुचराना कलां।
क्रेडिट कॉर्ड का लोन भरना है
मैं अपनी दो एकड़ की खेती करता हूं। गेहूं की फसल में खेती का खर्च पूरा होता है। धान से होने वाली बचत से किसान क्रेडिट कार्ड का कर्ज चुकाना होता है, लेकिन इस बार यह पानी में डूब गई है। पता नहीं क्या होगा।
- सुभाष, किसान गांव छात्तर।
करवाई जा रही है व्यवस्था
जलभराव की जानकारी है। इस पर पहले पानी निकासी की व्यवस्था करवाई जा रही है। इसके लिए सभी अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं। विशेष गिरदावरी की भी योजना बनाई गई है। किसान अपनी खराब हुई फसल की सूचना संबंधित एसडीएम को जरूर दें।
- डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
किसानों ने नारेबाजी कर जताया रोष
पिल्लूखेड़ा। असंध ड्रेन ओवरफ्लो होने से बुधवार को बुढा खेड़ा, बेरी खेड़ा, रजाना कलां, मुआना, रिटोली व जामनी गांव की ढाई हजार एकड़ धान की फसल बरसाती पानी में डूब गई। ड्रेन की सफाई नहीं होने से नाराज किसानों ने बेरी खेड़ा व रिटौली पंप हाउस पर पहुंचकर नारेबाजी कर रोष जताया।
बुढा खेड़ा निवासी किसान राजबीर शर्मा, कर्मबीर कश्यप, संजय, महेंद्र, अनिल, सोनू, बनिल बेरी खेड़ा, रिंकू, नवीन, मुआना गौरव, सुरेश, रामकेश, हंस राज, रजाना कलां से परमीत, सुमित, सुभाष, गजे सिंह, अजय व बलिंद्र रिटोली ने बताया कि असंध ड्रेन ओवरफ्लो होने से उनकी धान की फसल पानी में डूब गई। किसानों ने कहा कि प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहा है। यदि प्रशासन पंप हाउस पर अतिरिक्त पंप लगाकर 24 घंटे पानी को निकाले और मनरेगा के तहत इन ड्रेन की सफाई करवाए तो उनकी समस्या का कुछ हद तक समाधान हो सकता है। वहीं रजाना कलां के किसानों में परमीत व सुमित का कहना था कि रिटोली पंप हाउस इस समय कोई काम नहीं कर रहा। विभाग ने समय रहते कदम उठाने चाहिए थे। नहरी विभाग के जेई रवि ने बताया कि बेरी खेड़ा व रिटोली पंप हाउसों पर बिजली की मोटरों में कुछ खराबी आई हुई है, जल्दी ही मोटर को ठीक करवाकर पानी की निकासी की जाएगी।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने किया जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा
वहीं सफीदों क्षेत्र में हुए जलभराव के बाद भाजपा के जिलाध्यक्ष राजू मोर ने कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान रिटोल, रजाना सहित कई गांवों का दौरा किया। किसानों ने पानी की निकासी नहीं होने की समस्या बताई। इस पर उन्होंने अधिकारियों को फोन कर उचित व्यवस्था करने को कहा।

रिटोली में ड्रेन ओवरफ्लों होने से डूबी धान की फसल।

रिटोली में ड्रेन ओवरफ्लों होने से डूबी धान की फसल। - फोटो : Jind

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