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जहां किया था कत्ल, वहीं फंदे पर झूल गया कैदी
jind/bureau
Updated Mon, 02 May 2016 12:12 AM IST
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मर्डर के आरोपी उम्रकैद के सजायाफ्ता खरल गांव निवासी रमेश ने शनिवार को वहीं फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली, जहां उसके हाथ से गांव के एक युवक का कत्ल हो गया था। रमेश के परिजनों ने शव का दाह संस्कार करने से साफ इंकार कर दिया।
पुलिस के समझाने पर रमेश के शव का दाह संस्कार गांव की पंचायत ने किया। रमेश ने शनिवार को गांव के खरीद केंद्र में खड़े पेड़ पर फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी। जानकारी के अनुसार साल 2007 में रमेश अपने गांव के एक युवक के साथ खरीद केंद्र में शराब पी रहा था।
किसी बात को लेकर दोनों में कहा सुनी हो गई, तो रमेश ने उसके सिर में ईंट मारी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने रमेश की कोई मदद नहीं की। जिस पर रमेश को उम्र कैद की सजा हो गई। गढ़ी थाना प्रभारी महेंद्र कुमार ने बताया कि एक भी परिजन उसे मिलने जेल में नहीं गया।
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कोई कानूनी मदद नहीं की। परिजनों समेत गांव के सभी लोग रमेश द्वारा किए मर्डर को गलत मानते थे। रमेश 28 अप्रैल को पैरोल पर आया, तो किसी भी परिजन से उससे रुख नहीं जोड़ा। दो दिन तक जब उसने देखा कि गांव का हर व्यक्ति उससे कनी काट रहा है, तो उसने नाराज होकर फांसी लगा ली। महेंद्र ने बताया कि परिजन उसका दाह संस्कार करने तक तैयार नहीं हुए, बाद में पंचायत को समझाया गया और पंचायत ने रमेश का दाह संस्कार किया। बाद में काफी लोग संस्कार में शामिल हो गए थे।
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पुलिस के समझाने पर रमेश के शव का दाह संस्कार गांव की पंचायत ने किया। रमेश ने शनिवार को गांव के खरीद केंद्र में खड़े पेड़ पर फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली थी। जानकारी के अनुसार साल 2007 में रमेश अपने गांव के एक युवक के साथ खरीद केंद्र में शराब पी रहा था।
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किसी बात को लेकर दोनों में कहा सुनी हो गई, तो रमेश ने उसके सिर में ईंट मारी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने रमेश की कोई मदद नहीं की। जिस पर रमेश को उम्र कैद की सजा हो गई। गढ़ी थाना प्रभारी महेंद्र कुमार ने बताया कि एक भी परिजन उसे मिलने जेल में नहीं गया।
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कोई कानूनी मदद नहीं की। परिजनों समेत गांव के सभी लोग रमेश द्वारा किए मर्डर को गलत मानते थे। रमेश 28 अप्रैल को पैरोल पर आया, तो किसी भी परिजन से उससे रुख नहीं जोड़ा। दो दिन तक जब उसने देखा कि गांव का हर व्यक्ति उससे कनी काट रहा है, तो उसने नाराज होकर फांसी लगा ली। महेंद्र ने बताया कि परिजन उसका दाह संस्कार करने तक तैयार नहीं हुए, बाद में पंचायत को समझाया गया और पंचायत ने रमेश का दाह संस्कार किया। बाद में काफी लोग संस्कार में शामिल हो गए थे।