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सीआरएसयू : जिम के सामान की खरीदारी में गोलमाल, यूनिवर्सिटी ने नकारा
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Wed, 24 Aug 2016 12:37 AM IST
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चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी में नियमों को ताक पर रखकर जिम के लिए सामान खरीदने का मामला सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से मामले का खुलासा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता ने यूनिवर्सिटी की परचेज कमेटी पर सांठ-गांठ कर जिम का सामान खरीदने की आड़ में चार लाख रुपये का घोटाला करने के आरोप लगाए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र भेजा है। वहीं, विश्वविद्यालय के उपकुलपति मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह ने आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता राजेश ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का खुलासा करते हुए कहा कि सीआरएसयू में विद्यार्थियों के लिए जो जिम स्थापित की गई है, उसमें रखा सामान नियमों को ताक पर रखकर खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि परचेज कमेटी में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है, वह यूनिवर्सिटी के स्थायी कर्मचारी नहीं हैं। इस परचेज कमेटी में शामिल दो सदस्य तो यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर हैं तथा एक कर्मचारी अनुबंध के आधार पर कार्यरत है। इस परचेज कमेटी ने बिना टेंडर निकाले जिम के लिए सामान खरीदा है। जिम का सामन खरीदने के लिए जो कोटेशन बनवाई गई हैं, वह भी ई-मेल के माध्यम से मंगवाई गई हैं। वहीं कोटेशन में मशीनों की कीमत ज्यादा दिखाई गई है।
वहीं जिम में सस्ती कीमत की मशीनें रखी गई हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि परचेज कमेटी ने दो अलग-अलग स्पोर्ट्स हाउस से जिम के लिए सामान खरीदा है। इसमें एक स्पोर्ट्स हाउस से 6,00,220 का तथा दूसरे से 12,40,414 का सामान खरीदा है। इन स्पोर्ट्स हाउस से जो मशीनें खरीद गई हैं, वह मार्केट रेट से काफी ज्यादा कीमत की दिखाई गई हैं। जबकि वास्तव में यह कीमत काफी कम हैं। राजेश ने आरोप लगाया कि इस मशीनों की खरीदारी में लगभग चार लाख रुपये का घोटाला हुआ है। वहीं जिस हाल में जिम स्थापित की गई है, वह हाल भी नियमों के अनुसार पूरे साइज का नहीं है। इस प्रकार जिम की आड़ में यूनिवर्सिटी में लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को पत्र लिखा गया है।
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राजेश नामक जो व्यक्ति गोलमाल के आरोप लगा रहे है, यह उनके पास यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए आया था लेकिन उसकी क्वालिफिकेशन पूरी नहीं थी। इसलिए इसे यहां नौकरी नहीं मिल पाई। नौकरी नहीं मिलने से खफा होकर यह व्यक्ति झूठे आरोप लगा रहा है। उनके पास सामान की खरीद के सभी बिल हैं। नियमों को मद्देनजर रखकर ही सारा सामान खरीदा गया है। वह मामले की जांच के लिए तैयार हैं। यदि यूनिवर्सिटी में किसी भी प्रकार का गोलमाल मिलता है, तो वह अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार हैं।
मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह, उपकुलपति, सीआरएसयू
आरटीआई कार्यकर्ता राजेश ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता के दौरान आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी का खुलासा करते हुए कहा कि सीआरएसयू में विद्यार्थियों के लिए जो जिम स्थापित की गई है, उसमें रखा सामान नियमों को ताक पर रखकर खरीदा गया है। उन्होंने बताया कि परचेज कमेटी में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है, वह यूनिवर्सिटी के स्थायी कर्मचारी नहीं हैं। इस परचेज कमेटी में शामिल दो सदस्य तो यूनिवर्सिटी में डेपुटेशन पर हैं तथा एक कर्मचारी अनुबंध के आधार पर कार्यरत है। इस परचेज कमेटी ने बिना टेंडर निकाले जिम के लिए सामान खरीदा है। जिम का सामन खरीदने के लिए जो कोटेशन बनवाई गई हैं, वह भी ई-मेल के माध्यम से मंगवाई गई हैं। वहीं कोटेशन में मशीनों की कीमत ज्यादा दिखाई गई है।
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वहीं जिम में सस्ती कीमत की मशीनें रखी गई हैं। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि परचेज कमेटी ने दो अलग-अलग स्पोर्ट्स हाउस से जिम के लिए सामान खरीदा है। इसमें एक स्पोर्ट्स हाउस से 6,00,220 का तथा दूसरे से 12,40,414 का सामान खरीदा है। इन स्पोर्ट्स हाउस से जो मशीनें खरीद गई हैं, वह मार्केट रेट से काफी ज्यादा कीमत की दिखाई गई हैं। जबकि वास्तव में यह कीमत काफी कम हैं। राजेश ने आरोप लगाया कि इस मशीनों की खरीदारी में लगभग चार लाख रुपये का घोटाला हुआ है। वहीं जिस हाल में जिम स्थापित की गई है, वह हाल भी नियमों के अनुसार पूरे साइज का नहीं है। इस प्रकार जिम की आड़ में यूनिवर्सिटी में लाखों रुपये का गोलमाल किया गया है। इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को पत्र लिखा गया है।
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राजेश नामक जो व्यक्ति गोलमाल के आरोप लगा रहे है, यह उनके पास यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए आया था लेकिन उसकी क्वालिफिकेशन पूरी नहीं थी। इसलिए इसे यहां नौकरी नहीं मिल पाई। नौकरी नहीं मिलने से खफा होकर यह व्यक्ति झूठे आरोप लगा रहा है। उनके पास सामान की खरीद के सभी बिल हैं। नियमों को मद्देनजर रखकर ही सारा सामान खरीदा गया है। वह मामले की जांच के लिए तैयार हैं। यदि यूनिवर्सिटी में किसी भी प्रकार का गोलमाल मिलता है, तो वह अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार हैं।
मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह, उपकुलपति, सीआरएसयू