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झोपड़ी में आग लगने से एक ही परिवार के तीन बच्चे जिंदा जले
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Mon, 24 Apr 2017 12:29 AM IST
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घटना स्थल का जायजा लेते हुए पुलिस कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के हांसी रोड पर बाग में रहने वाले परिवार की झोपड़ी में आग लग गई। आग लगने के दौरान झोपड़ी में मजदूर का पूरा परिवार सो रहा था। आग से तीन बच्चे जल गए और उनकी मौत हो गई, जबकि दो बच्चे और उनकी मां बुरी तरह से झुलस गई। हादसे के दौरान परिवार के मुखिया की आंख खुलने कारण वह बाल-बाल बच गया। बाद में शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया। आग से गंभीर रूप से झुलसे परिवार के सदस्यों को नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया।
इसमें दो बच्चों और महिला की गंभीर हालात देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। घटना की सूचना पाकर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों का कब्जे में ले लिया और नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। झोपड़ी में आग लगने के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया, पुलिस इसकी जांच में जुटी है।
पुलिस के अनुसार अर्बन एस्टेट निवासी जयभगवान का हांसी रोड पर बेरियों का बाग है।
लगभग एक माह पहले बाग में मजदूरी करने के लिए गांव शिकारपुर जिला मुज्जफरनगर यूपी निवासी सानू अपने परिवार के सदस्यों के साथ आया था और उसने रहने के लिए बाग के अंदर ही पराली और पॉलीथिन के माध्यम से झोपड़ी बनाई थी। शनिवार रात को सानू अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पंखा चलाकर सो गया। मध्य रात को जब परिवार सो रहा था तो इसी दौरान अचानक झोपड़ी में आग लग गई और आग ने पूरी झोपड़ी को अपने लपेटे में ले लिया। इस दौरान आग की लगी तेज आंच से झोपड़ी के बाहरी हिस्से में सो रहे सानू की नींद खुल गई। जब उसने बाहर आकर देखा तो पूरी झोपड़ी आग से घिर चुकी थी। इसके बाद सानू ने परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर निकालना शुरू किया, वह अपने साले की 11 साल की बेटी फाकरीना, दो साल की बेटी जोया और पत्नी शकीरा को तो बाहर निकाल लिया। लेकिन झोपड़ी के अंदर सो रहे चार माह की बेटी जिया, चार साल का बेटा जिसान, बेटी अफसा को बाहर नहीं निकाल पाया और तीनों ही बच्चे अंदर जल गए।
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शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पास में लगे ट्यूबवेल से पानी लाकर झोपड़ी में लगी आग पर काबू पाया। इस दौरान दमकल विभाग की गाड़ी को भी सूचना दी, लेकिन जब तक वह पहुंच पाती तब तक आग सब कुछ नष्ट कर हो चुका था। बाद में आग से झुलसे सानू के साले की लड़की फाकरीना, जोया (2) और उसकी पत्नी शकीरा को एंबुलेंस के माध्यम से नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालात देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। बाद में घटना की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने सानू के बयान दर्ज करके नागरिक अस्पताल में शवों के पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।
बाग की रखवाली के लिए आया था सानू
गांव शिकारपुर यूपी निवासी सानू ने बताया कि उसका साला निसार कई वर्ष से जींद में रहता है और मजदूरी का कार्य करता है। पिछले दिनों उसके साले ने हांसी रोड पर स्थित बेरी के बाग में नौकरी दिलाई थी और उसके बाद से वहां पर नौकरी करता था। लेकिन अब बेरी का सीजन भी जा चुका था। इसके बाद वह मकानों के निर्माण में मजदूरी का कार्य करने लगा था। लेकिन रात को हुए हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
दो साल की बच्ची बची
रात को हुई आगजनी की घटना ने सानू के पूरे परिवार को उजाड़ दिया है। सानू ने बताया कि निकाह कई वर्ष पहले सकीरा से हुआ था। इसके बाद उसके चार बच्चे हुए थे। इसमें एक छह साल की बेटी अफशा, चार साल का बेटा जिसान और दो साल की बेटी जोया, चार माह बेटी जिया हुई थी। लेकिन इस हादसे में उसका बेटा जिसान, बेटी अफशा, चार माह की बेटी जिया जिंदा ही जल गए, जबकि वह अपने दो साल की बेटी जोया को बचाने में कामयाब हो गया, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस गई है। ऐसे में उसके परिवार में बेटी जोया और पत्नी सकीरा ही बची है। जबकि उनके पास उसके साले की बेटी फाकरीना भी रहती थी। जो हादसे में झुलस गई।
आग लगने के कारणों में उलझी पुलिस
झोपड़ी में आग लगने के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। परिवार के लोगों ने शुरुआत में कहा कि झोपड़ी के अंदर रखे फर्राटे पंखे में शार्ट सर्किट से आग लगी, लेकिन बाद में वह मना करने लगे। इसके बाद सानू ने कहा कि उनकी झोपड़ी के पास ही खाना बनाकर रखे चूल्हे में आग की चिंगारी बच गई थी, जो हवा के झोंके के कारण झोपड़ी में घुस गई और आग लग गई। लेकिन पुलिस आग लगने के कारणों का पता लगने में लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएफएल और पुलिस की टीम घटना स्थल पर पहुंची। जहां से टीम ने लगभग दो घंटे तक आग लगने के कारणों का पता लगने का प्रयास किया। इस दौरान टीम ने घटना स्थल से जली हुई झोपड़ी और आसपास के क्षेत्र के नमूने लिए है।
इसमें दो बच्चों और महिला की गंभीर हालात देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। घटना की सूचना पाकर शहर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शवों का कब्जे में ले लिया और नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। झोपड़ी में आग लगने के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया, पुलिस इसकी जांच में जुटी है।
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पुलिस के अनुसार अर्बन एस्टेट निवासी जयभगवान का हांसी रोड पर बेरियों का बाग है।
लगभग एक माह पहले बाग में मजदूरी करने के लिए गांव शिकारपुर जिला मुज्जफरनगर यूपी निवासी सानू अपने परिवार के सदस्यों के साथ आया था और उसने रहने के लिए बाग के अंदर ही पराली और पॉलीथिन के माध्यम से झोपड़ी बनाई थी। शनिवार रात को सानू अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ पंखा चलाकर सो गया। मध्य रात को जब परिवार सो रहा था तो इसी दौरान अचानक झोपड़ी में आग लग गई और आग ने पूरी झोपड़ी को अपने लपेटे में ले लिया। इस दौरान आग की लगी तेज आंच से झोपड़ी के बाहरी हिस्से में सो रहे सानू की नींद खुल गई। जब उसने बाहर आकर देखा तो पूरी झोपड़ी आग से घिर चुकी थी। इसके बाद सानू ने परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर निकालना शुरू किया, वह अपने साले की 11 साल की बेटी फाकरीना, दो साल की बेटी जोया और पत्नी शकीरा को तो बाहर निकाल लिया। लेकिन झोपड़ी के अंदर सो रहे चार माह की बेटी जिया, चार साल का बेटा जिसान, बेटी अफसा को बाहर नहीं निकाल पाया और तीनों ही बच्चे अंदर जल गए।
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शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पास में लगे ट्यूबवेल से पानी लाकर झोपड़ी में लगी आग पर काबू पाया। इस दौरान दमकल विभाग की गाड़ी को भी सूचना दी, लेकिन जब तक वह पहुंच पाती तब तक आग सब कुछ नष्ट कर हो चुका था। बाद में आग से झुलसे सानू के साले की लड़की फाकरीना, जोया (2) और उसकी पत्नी शकीरा को एंबुलेंस के माध्यम से नागरिक अस्पताल में पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालात देखते हुए पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। बाद में घटना की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने सानू के बयान दर्ज करके नागरिक अस्पताल में शवों के पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया।
बाग की रखवाली के लिए आया था सानू
गांव शिकारपुर यूपी निवासी सानू ने बताया कि उसका साला निसार कई वर्ष से जींद में रहता है और मजदूरी का कार्य करता है। पिछले दिनों उसके साले ने हांसी रोड पर स्थित बेरी के बाग में नौकरी दिलाई थी और उसके बाद से वहां पर नौकरी करता था। लेकिन अब बेरी का सीजन भी जा चुका था। इसके बाद वह मकानों के निर्माण में मजदूरी का कार्य करने लगा था। लेकिन रात को हुए हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
दो साल की बच्ची बची
रात को हुई आगजनी की घटना ने सानू के पूरे परिवार को उजाड़ दिया है। सानू ने बताया कि निकाह कई वर्ष पहले सकीरा से हुआ था। इसके बाद उसके चार बच्चे हुए थे। इसमें एक छह साल की बेटी अफशा, चार साल का बेटा जिसान और दो साल की बेटी जोया, चार माह बेटी जिया हुई थी। लेकिन इस हादसे में उसका बेटा जिसान, बेटी अफशा, चार माह की बेटी जिया जिंदा ही जल गए, जबकि वह अपने दो साल की बेटी जोया को बचाने में कामयाब हो गया, लेकिन वह गंभीर रूप से झुलस गई है। ऐसे में उसके परिवार में बेटी जोया और पत्नी सकीरा ही बची है। जबकि उनके पास उसके साले की बेटी फाकरीना भी रहती थी। जो हादसे में झुलस गई।
आग लगने के कारणों में उलझी पुलिस
झोपड़ी में आग लगने के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। परिवार के लोगों ने शुरुआत में कहा कि झोपड़ी के अंदर रखे फर्राटे पंखे में शार्ट सर्किट से आग लगी, लेकिन बाद में वह मना करने लगे। इसके बाद सानू ने कहा कि उनकी झोपड़ी के पास ही खाना बनाकर रखे चूल्हे में आग की चिंगारी बच गई थी, जो हवा के झोंके के कारण झोपड़ी में घुस गई और आग लग गई। लेकिन पुलिस आग लगने के कारणों का पता लगने में लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएफएल और पुलिस की टीम घटना स्थल पर पहुंची। जहां से टीम ने लगभग दो घंटे तक आग लगने के कारणों का पता लगने का प्रयास किया। इस दौरान टीम ने घटना स्थल से जली हुई झोपड़ी और आसपास के क्षेत्र के नमूने लिए है।