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सट्टेबाजों के बाउंसर से लगातार ‘हिट-विकेट’ हो रही फतेहाबाद पुलिस
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Wed, 25 Jan 2017 12:27 AM IST
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सुमित सेठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद से क्रिकेट सट्टे को हटाने के पुलिसिया दावे अब खोखले से पड़ते जा रहे हैं। शहर और जिले में लगातार बढ़ते सट्टे को देखकर तो कम से कम यही लगता है। ऐसा मालूम पड़ता है कि कानून और अपराध के इस मैच में सट्टेबाजों की गुगली से पुलिस विभाग बार-बार बोल्ड हो रहा है। कार्यवाही के नाम पर पिछले दो माह में पुलिस ने तीन-चार मामलों को छोड़कर कोई छापा नहीं मारा है और ‘बड़ा तीर मारे’ तो जमाना बीत गया। ऐसा नहीं है कि जिले में क्रिकेट सट्टा बंद या कम हो गया हो, अलबत्ता पुलिसिया कार्यवाही जरूर धीमी और कुंद पड़ती जा रही है।
इंडिया-इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान की सीरीज पर रोजाना जिले में दो करोड़ से अधिक की शर्तें
क्रिकेट बुकियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो वर्तमान में चल रहे इंडिया-इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान की सीरीज पर जिलेभर में रोजाना दो करोड़ से अधिक का सट्टा लग रहा है। हालांकि इसके बावजूद पुलिस अभी तक कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर पाई है। इतना ही नहीं, हैरानी तो इस बात को लेकर भी है कि पुलिस ने बीते दो माह में होटलों को लेकर भी जांच नहीं की है और दो माह से ही इंडिया इंग्लैंड के मैच शुरू हुए हैं। ये दोनों बातें सट्टे के खिलाफ पुलिसिया दावों को लगातार कमजोर बना रही है। दो करोड़ रोजाना सट्टे के दावे तो सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय मैचों के आंकड़े हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया की घरेलू लीग में रोजाना दो-दो मैच होते हैं जिनपर लगने वाले सट्टे का कोई हिसाब ही नहीं है।
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अब चैंपियंस ट्राफी, फिर आईपीएल में अपने चरम पर होगा सट्टा
चैंपियंस ट्राफी शुरू होने जा रही है। हर दो साल में होने वाले इस टूर्नामेंट में विश्व कप जैसा ही क्रेज होता है क्योंकि इस टूर्नामेंट में सभी टीमें हिस्सा लेती हैं। ऐसे में इन मैचों पर सट्टा भी जमकर लगता है। लोकल सट्टा बाजार के सूत्रों की मानें तो अकेले फतेहाबाद शहर में इस दौरान सट्टे का आंकड़ा लगभग पचास करोड़ और जिले भर में तकरीबन 90 से सौ करोड़ के बीच पहुंच जाएगा। इसके बाद अप्रैल में आईपीएल शुरु होगा जिसकी लोकप्रियता का अंदाजा सभी को है। लगभग डेढ़ माह तक चलने वाले इस आईपीएल टूर्नामेंट के 60 से अधिक मैचों में अकेले फतेहाबाद जिले में ही लगभग दो सौ करोड़ का सट्टा लगने की संभावना है।
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ये हैं क्रिकेट सट्टे के लगातार बढ़ने की मुख्य वजह
क्रिकेट सट्टे के लगातार बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इसको लेकर कोई सख्त कार्यवाही नहीं होना है। सट्टे के मामले में पकड़े जाने पर जुआ खेलने की ही धारा लगती है जिसकी जमानत थाने में ही हो जाती है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि सुबह पकड़ा गया अपराधी दो-तीन घंटे बाद ही छूटकर घर पहुंच जाता है और वापिस जाकर फिर से सट्टा शुरु कर देता है। क्रिकेट सट्टे को लेकर कमजोर कानून पर कई बार उंगली उठती रहती हैं ।
पिछले दो माह में पुलिस के महज चार छापे
1. टोहाना के जमालपुर में तीन क्रिकेट बुकी पकड़े, 65 हजार जब्त
2. रतिया में क्रिकेट पर सट्टा लगाते एक काबू
3. फतेहाबाद में शिव चौक से एक युवक को घर से काबू किया
पुलिस पर भी उठते रहे हैं सवाल
हरेक अपराध को चंद दिनों में सुलझाने वाली फतेहाबाद पुलिस अब तक क्रिकेट सट्टे को फतेहाबाद शहर और जिले से खत्म नहीं कर पाई है जिसको लेकर पुलिस पर भी सवाल उठते रहे हैं। हालिया उदाहरण लें तो बीते दिनों भीवां बस्ती में शिव चौक के पास एक गली से सीआईए की टीम ने एक युवक को क्रिकेट सट्टा लगाते रंगें हाथों गिरफ्तार किया। सुबह सरेबाजार गिरफ्तार किए गए युवक के बारे में शाम तक ना तो सिटी पुलिस को पता था और ना ही सीआईए अधिकारी इस बारे में कोई जानकारी होने की बात कह रहे थे। शाम को जब सीआईए को जब इस बात की जानकारी मिली कि कुछ मीडियाकर्मियों ने पूरी छापामारी के फोटो लिए हैं तो जाकर सीआईए की ओर से सांय पांच बजे उक्त युवक की गिरफ्तारी दिखाई गई। इसके अलावा पुलिस ने एक बार भी ऐसा खुलासा नहीं किया है कि पूछताछ में किसी बुकी ने अपने किसी साथी या ऊपर वाले लिंक के बारे में कोई जानकारी दी हो। महज नंबर पूरे करने के लिए कई बार इन छोटी मछलियों को पकड़ा जाता है।
बड़े शहरों से जुड़े हैं क्रिकेट सट्टे के तार
क्रिकेट सट्टा बाजार के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो फतेहाबाद के सट्टा कारोबारियों के तार दिल्ली, भटिंडा, मुंबई, जालंधर, गंगानगर सहित देश के कई बड़े शहरों से जुड़े हैं। प्रत्येक शहर में एक प्रमुख बुकी (सटोरिया) होता है जो आगे सब-बुक देता है। अर्थात ये छोटे सटोरिए बड़े सटोरिए तक अपने-अपने इलाके की सारी शर्तों की जानकारी पहुंचाता है। जिले में फतेहाबाद, टोहाना, रतिया में क्रिकेट सट्टे का जोर ज्यादा है। फतेहाबाद की बात की जाए तो फतेहाबाद जिले में लगभग दो दर्जन से अधिक बुकीज हैं जो जिले भर में सौ के करीब सब-बुकीज के जरिए अपना पूरा नेटवर्क फैलाए हुए हैं।
सीधी बात : गंगाराम पूनियां, एएसपी, फतेहाबाद ।
प्रश्र : क्या वजह है कि पिछले तीन-चार माह में क्रिकेट सट्टे को लेकर पुलिस के पास कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है
उत्तर : ऐसा नहीं है, पिछले दिनों में हमने टोहाना, रतिया और फतेहाबाद में कुछ लोगों को पकड़ा है। ये निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है।
प्रश्र : जो नाम आपने गिनाएं हैं, उनमें एक भी बड़ा क्रिकेट सट्टेबाज नहीं है, बड़ी मछलियां नहीं हाथ आई
उत्तर : इस बारे में लगातार लगे हैं। छोटी छोटी कड़ियों को जोड़कर ही असल अपराधी तक पहुंचा जा सकता है।
प्रश्र : क्या आपके पास जिले के प्रमुख सट्टेबाजों के नाम भी हैं, या हवा में तीर मारा जाएगा।
उत्तर : जो भी अपराधी पकड़ा जाता है, अगर पूछताछ में वो कोई नाम लेता है तो उसका रिकार्ड रखा जाता है। इसी रिकार्ड के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
प्रश्र : कोई विशेष अभियान भी चलाया जाएगा, या जो चल रहा है, वैसे ही चलेगा
उत्तर : हमारी पहली प्राथमिकता अभी आने वाली इंडिया-इंग्लैंड टी-20 सीरीज है। हमें इनपुट मिला है कि इस बार बड़े पैमाने पर क्रिकेट सट्टेबाजी होनी है। इसको लेकर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मुखबिरों और पुलिसकर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है।
जनता भी चाहती है सट्टा मुक्त समाज
सट्टा एक दीमक की तरह समाज को खोखला करता जा रहा है। इसकी चपेट में ज्यादातर युवा ही आ रहे हैं तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं है। ऐसे में पुलिस को चाहिए कि सट्टा चाहे वो किसी भी स्वरूप में हो, इसका अंत किया जाए।
-सुमित सेठी, स्थानीय निवासी
सट्टे में पैसा लगाने या नशे की लत को पूरा करने के लिए ही युवक गलत धंधों की ओर मुड़ते हैं। अगर नशा और सट्टे की बीमारी को समाज से खत्म कर दिया जाए तो 40 फीसदी अपराध पर अंकुश लग सकता है।
-चिराग इंसा, स्थानीय निवासी
जनजागरण अभियान चलाया जाना चाहिए और इसको लेकर कमजोर कानून को सख्त कानून से बदला जाना चाहिए। जिन घरों के युवक इन गलत कामों में पड़ गए हैं, उनको त्वरित ऐशो-आराम की बजाए भविष्य की परेशानी और बदनामी को भी नजर में रखना चाहिए। तभी वो अपने घरों के युवकों को इस काम से दूर रख पाएंगे।
-विनोद कड़वासरा