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Jind News: प्रकृति के साथ समन्वय जरूरी, तभी टलेंगी प्राकृतिक आपदाएं
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फोटो 1 नरवाना। यज्ञ हवन करते हुए आर्य समाज के लोग। स्रोत समाज।
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नरवाना। आर्य समाज नरवाना में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण शुद्धि एवं समृद्धि की कामना को लेकर यज्ञ-हवन से हुई। धर्मपाल, यशपाल एवं डॉ. प्रताप सिंह ने भजन एवं गीतों के माध्यम से ईश्वर स्तुति, प्रार्थना और उपासना के साथ मातृभाषा व मातृ संस्कृति से जुड़कर आत्म उद्धार का संदेश दिया।
आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव जाति के उत्थान तथा प्राणी जगत के संरक्षण एवं संवर्धन में पर्वों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों से बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है। इसका प्रतिकूल असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, अनियंत्रित शहरीकरण और पर्यटन विकास प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। यदि समय रहते प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित नहीं किया गया तो प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला और गंभीर हो सकता है। मिथिलेश लेश शास्त्री ने कहा कि वैदिक संस्कृति में ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत सर्वहितकारी माना गया है। इस अवसर पर वेदपाल, किताब सिंह, संजीव, बलबीर सिंह और रामकुमार मौजूद रहे।
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आर्य समाज प्रधान चंद्रकांत आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव जाति के उत्थान तथा प्राणी जगत के संरक्षण एवं संवर्धन में पर्वों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि मानवीय गतिविधियों से बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है। इसका प्रतिकूल असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ा है।
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उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, अनियंत्रित शहरीकरण और पर्यटन विकास प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। यदि समय रहते प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित नहीं किया गया तो प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला और गंभीर हो सकता है। मिथिलेश लेश शास्त्री ने कहा कि वैदिक संस्कृति में ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत सर्वहितकारी माना गया है। इस अवसर पर वेदपाल, किताब सिंह, संजीव, बलबीर सिंह और रामकुमार मौजूद रहे।
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