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स्वतंत्रता आंदोलन में आधुनिक संतों का योगदान : सीताराम
Thu, 22 Feb 2024 10:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 22 Feb 2024 10:51 PM IST
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22जेएनडी34-श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय में पहुंचे सीताराम व्यास का स्वागत करते हुए। स्वयं
जींद। श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय में सामाजिक जागरूकता एवं संस्कृति उत्थान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रधान ऋषिकांत ने की। इसमें मुख्यातिथि के रूप में सीताराम व्यास और विशिष्ट अतिथि स्वामी सूर्यानंद सरस्वती तथा दलबीर सैनी रहे। संरक्षक फूलकुमार शास्त्री ने रामराय गांव और तीर्थ के ऐतिहासिक महत्व के बताया।
प्रधान ऋषिकांत ने अब तक की उपलब्धियों तथा समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए संस्था की भविष्य की योजनाओं से अवगत करवाया। आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। स्वामी सूर्यानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज के उत्थान में सहायक है। ये कार्यक्रम लगातार करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा अपने योगदान का आशीर्वाद दिया। मुख्यातिथि सीताराम व्यास ने स्वतंत्रता आंदोलन में आधुनिक संतों के योगदान के विषय पर बताया। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ साथ संतों की स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष भूमिका रही। सभी संतों ने धार्मिकता के साथ साथ सामाजिक बुराइयों तथा स्वतंत्रता के लिए आंदोलन कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश हर तरह से समृद्ध था। इसके लिए मुख्य भूमिका हमारी शिक्षा नीति एवम सांस्कृतिक धरोहर की रही। गुलामी के समय अंग्रेजों ने देश को कमजोर करने के लिए बहुत प्रयास किया। हर गुरुकुल में सनातन की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने मैकाले की शिक्षा नीति से देश को सांस्कृतिक तथा सामाजिक तौर पर तोड़कर गुलाम बनाए रखने की बात की। आज हमें अपने देश तथा समाज को मजबूत बनाने के लिए। संतों के दिखाए मार्ग पर चलने की बात कही। उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, आदि सभी संतों का जिक्र किया तथा सभी से आह्वान किया की सामाजिक बुराइयों को समाप्त कर हम सब मिलकर अपनी संस्कृति व देश को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।
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प्रधान ऋषिकांत ने अब तक की उपलब्धियों तथा समाज और संस्कृति के उत्थान के लिए संस्था की भविष्य की योजनाओं से अवगत करवाया। आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। स्वामी सूर्यानंद सरस्वती ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज के उत्थान में सहायक है। ये कार्यक्रम लगातार करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा अपने योगदान का आशीर्वाद दिया। मुख्यातिथि सीताराम व्यास ने स्वतंत्रता आंदोलन में आधुनिक संतों के योगदान के विषय पर बताया। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ साथ संतों की स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष भूमिका रही। सभी संतों ने धार्मिकता के साथ साथ सामाजिक बुराइयों तथा स्वतंत्रता के लिए आंदोलन कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश हर तरह से समृद्ध था। इसके लिए मुख्य भूमिका हमारी शिक्षा नीति एवम सांस्कृतिक धरोहर की रही। गुलामी के समय अंग्रेजों ने देश को कमजोर करने के लिए बहुत प्रयास किया। हर गुरुकुल में सनातन की शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने मैकाले की शिक्षा नीति से देश को सांस्कृतिक तथा सामाजिक तौर पर तोड़कर गुलाम बनाए रखने की बात की। आज हमें अपने देश तथा समाज को मजबूत बनाने के लिए। संतों के दिखाए मार्ग पर चलने की बात कही। उन्होंने स्वामी रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती, राजाराम मोहन राय, आदि सभी संतों का जिक्र किया तथा सभी से आह्वान किया की सामाजिक बुराइयों को समाप्त कर हम सब मिलकर अपनी संस्कृति व देश को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

22जेएनडी34-श्री ब्राह्मण संस्कृत महाविद्यालय में पहुंचे सीताराम व्यास का स्वागत करते हुए। स्वयं
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