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स्वच्छता रैंकिंग में 112 अंकों का सुधार टॉप सूची में आने को बेहतर की दरकार
ब्यूरो अमर उजाला जींद
Updated Fri, 05 May 2017 12:05 AM IST
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बस स्टैंड के सामने बना गया स्थायी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट्स।
- फोटो : amarujala beuro
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की सर्वे टीम द्वारा पांच माह पहले किए गए सर्वे के बाद देश के स्वच्छ शहरों में जींद को 265वां स्थान मिला है। प्रदेश में जींद जिला सातवें स्थान पर रहा है। पिछले साल जारी हुई स्वच्छता लिस्ट में जींद का देश में 377वां स्थान था, लेकिन इस बार जींद शहर ने 112 स्थानों का सुधार करते हुए 265वां स्थान हासिल किया है। जींद शहर ने हिसार और रोहतक जैसे शहरों को सफाई के मामले में पछाड़ दिया है। स्वच्छता सर्वे की आबादी के हिसाब से देखा जाए तो दो लाख से कम आबादी वाले शहरों में जींद प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि इस कैटगरी में थानेसर ने पहला स्थान प्राप्त किया है। सबसे ज्यादा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, शहर में लगभग सभी घरों में शौचालय सुविधा का होना और लोगों का खुले में शौच मुक्त होने के कारण जींद शहर की रैंकिंग में सुधार हुआ है।
दो हजार में से मिले 874 अंक
ज्ञात रहे कि 17 जनवरी को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की सर्वे टीम शहर में पहुंची थी। इस दौरान टीम तीन दिन तक शहर में रहकर जींद शहर स्वच्छता सर्वे मानकों पर कितना खरा उतरा है, उसका आंकलन किया गया। आंकलन कर कुल दो हजार अंकों में से नंबर देकर उसकी स्वच्छता की रेटिंग का निर्धारण किया गया। इन दो हजार में से जींद शहर को कुल 874 अंक मिले हैं।
रैंकिंग बढ़ाने में ये रहे मददगार
1. स्वच्छ ग्राहीयों ने बढ़ाई स्वच्छता : डीसी विनय सिंह के नेतृत्व में शहर की सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हर सप्ताह एक जगह पर स्वच्छता अभियान चलता है। शहर की सुंदरता को विराम लगा रहे जगहों पर चिह्नित कर उनकी सफाई की गई। प्रशासन व सामाजिक संगठनों के इस अभियान से रैंकिंग में सुधार लगाने में काफी हद तक कामयाब रहे।
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2. कूड़ा कलेक्शन : शहर में कूड़ा कलेक्शन में जींद शहर में काफी बेहतर है। शहर के सभी 31 वार्डों में नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों सफाई में लगे रहते हैं। इसके अलावा शहर में 39 जगहों पर स्थायी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंटस बनाए हुए हैं। इससे जगह-जगह पर पड़ने वाले कूड़े से काफी हद तक राहत मिली है।
3. खुले में शौचमुक्त की तरफ अग्रसर : जींद शहर के लगभग सभी क्षेत्रों में शौचालय बने हुए हैं। शहर की कुछ ही बाहरी कालोनियों में खुले में शौच जाने की दिक्कत है, लेकिन प्रशासन ने उसके लिए भी शौच मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया हुआ है।
4. शहर में कम प्रदूषण : जींद शहर व आसपास के क्षेत्र में बहुत ही कम फैक्टरी बनी हुई हैं। इस कारण शहर में प्रदूषण भी कम है।
रैंकिंग को इन्होंने लगाया ब्रेक
1. कूड़े का निस्तारण नहीं : शहर से प्रतिदिन 70 टन से अधिक कूड़ा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण के लिए कोई भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं है। इसके कारण शहर के पास में ही कूड़ा डाला जाता है। इससे शहर की स्वच्छता को नुकसान पहुंचता है।
2. जागरूकता का अभाव : शहर में हर रोज कूड़ा उठाया जाता है। कूड़ा डालने के लिए स्थायी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट्स बनाए गए हैं। इसके बाद भी लोग कूड़े को प्वाइंट्स में डालने की बजाय सड़कों पर ही फैंक देते हैं। इससे शहर की सुंदरता को नुकसान हो रहा है।
3. खस्ताहाल सीवरेज व्यवस्था : शहर की स्वच्छता को सबसे ज्यादा नुकसान खस्ताहाल सीवरेज व्यवस्था पहुंचा रही है। कई वार्डों में सीवरेज के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी गलियों में भरा रहता है। इससे शहर की सुंदरता स्वच्छता प्रभावित हो रही है।
4. सफाई कर्मचारियों का अभाव : शहर के क्षेत्र व जनसंख्या के हिसाब नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों का अभाव है। शहर में सफाई के लिए लगभग साढ़े तीन सौ कर्मचारी तैनात हैं। इन पर ही शहर के 31 वार्डों की सफाई का जिम्मा है। शहर की स्वच्छता के लिए सफाई कर्मियों की नियुक्ति जरूरी है।
सार्वजनिक शौचालयों का होगा निर्माण
नगर परिषद जींद के मुख्य सफाई निरीक्षक बलबीर श्योकंद के मुताबिक, शहर में रैंकिंग में सुधार करने के लिए नगर परिषद ने प्लान तैयार किया है। शहर में जरूरत के स्थान पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। शहर की बाहरी कालोनियों में शौच मुक्त होने से बची हुई है। इसके लिए नगर परिषद ने नगर पार्षदों के साथ मिलकर सुबह व शाम को अभियान चलाया हुआ है। जो भी व्यक्ति बाहर शौचालय जाते हुए पकड़ा जाता है, उसको समझाया जाता है। इसके अलावा बाहरी कालोनियों में शौचालय निर्माण के लिए सर्वे किया जा रहा है। शहर में सब्जी मंडी व बस स्टैंड के आसपास के क्षेत्र में गंदगी रहती है। उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
सफाई व्यवस्था पर लगभग एक करोड़ रुपये सालाना खर्च
शहर में सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर परिषद की तरफ से लगभग आठ लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूरे वर्ष में यह आंकड़ा लगभग एक करोड़ रुपये पहुंच जाता है। यह खर्च सफाई कर्मचारियों से वेतन से अलग से रखा जाता है। इस राशि को केवल शहर की सफाई में प्रयोग होने वाले संसाधनों पर खर्च किया जाता है।
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दो हजार में से मिले 874 अंक
ज्ञात रहे कि 17 जनवरी को केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की सर्वे टीम शहर में पहुंची थी। इस दौरान टीम तीन दिन तक शहर में रहकर जींद शहर स्वच्छता सर्वे मानकों पर कितना खरा उतरा है, उसका आंकलन किया गया। आंकलन कर कुल दो हजार अंकों में से नंबर देकर उसकी स्वच्छता की रेटिंग का निर्धारण किया गया। इन दो हजार में से जींद शहर को कुल 874 अंक मिले हैं।
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रैंकिंग बढ़ाने में ये रहे मददगार
1. स्वच्छ ग्राहीयों ने बढ़ाई स्वच्छता : डीसी विनय सिंह के नेतृत्व में शहर की सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि हर सप्ताह एक जगह पर स्वच्छता अभियान चलता है। शहर की सुंदरता को विराम लगा रहे जगहों पर चिह्नित कर उनकी सफाई की गई। प्रशासन व सामाजिक संगठनों के इस अभियान से रैंकिंग में सुधार लगाने में काफी हद तक कामयाब रहे।
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2. कूड़ा कलेक्शन : शहर में कूड़ा कलेक्शन में जींद शहर में काफी बेहतर है। शहर के सभी 31 वार्डों में नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों सफाई में लगे रहते हैं। इसके अलावा शहर में 39 जगहों पर स्थायी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंटस बनाए हुए हैं। इससे जगह-जगह पर पड़ने वाले कूड़े से काफी हद तक राहत मिली है।
3. खुले में शौचमुक्त की तरफ अग्रसर : जींद शहर के लगभग सभी क्षेत्रों में शौचालय बने हुए हैं। शहर की कुछ ही बाहरी कालोनियों में खुले में शौच जाने की दिक्कत है, लेकिन प्रशासन ने उसके लिए भी शौच मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया हुआ है।
4. शहर में कम प्रदूषण : जींद शहर व आसपास के क्षेत्र में बहुत ही कम फैक्टरी बनी हुई हैं। इस कारण शहर में प्रदूषण भी कम है।
रैंकिंग को इन्होंने लगाया ब्रेक
1. कूड़े का निस्तारण नहीं : शहर से प्रतिदिन 70 टन से अधिक कूड़ा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण के लिए कोई भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं है। इसके कारण शहर के पास में ही कूड़ा डाला जाता है। इससे शहर की स्वच्छता को नुकसान पहुंचता है।
2. जागरूकता का अभाव : शहर में हर रोज कूड़ा उठाया जाता है। कूड़ा डालने के लिए स्थायी कूड़ा कलेक्शन प्वाइंट्स बनाए गए हैं। इसके बाद भी लोग कूड़े को प्वाइंट्स में डालने की बजाय सड़कों पर ही फैंक देते हैं। इससे शहर की सुंदरता को नुकसान हो रहा है।
3. खस्ताहाल सीवरेज व्यवस्था : शहर की स्वच्छता को सबसे ज्यादा नुकसान खस्ताहाल सीवरेज व्यवस्था पहुंचा रही है। कई वार्डों में सीवरेज के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी गलियों में भरा रहता है। इससे शहर की सुंदरता स्वच्छता प्रभावित हो रही है।
4. सफाई कर्मचारियों का अभाव : शहर के क्षेत्र व जनसंख्या के हिसाब नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों का अभाव है। शहर में सफाई के लिए लगभग साढ़े तीन सौ कर्मचारी तैनात हैं। इन पर ही शहर के 31 वार्डों की सफाई का जिम्मा है। शहर की स्वच्छता के लिए सफाई कर्मियों की नियुक्ति जरूरी है।
सार्वजनिक शौचालयों का होगा निर्माण
नगर परिषद जींद के मुख्य सफाई निरीक्षक बलबीर श्योकंद के मुताबिक, शहर में रैंकिंग में सुधार करने के लिए नगर परिषद ने प्लान तैयार किया है। शहर में जरूरत के स्थान पर सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। शहर की बाहरी कालोनियों में शौच मुक्त होने से बची हुई है। इसके लिए नगर परिषद ने नगर पार्षदों के साथ मिलकर सुबह व शाम को अभियान चलाया हुआ है। जो भी व्यक्ति बाहर शौचालय जाते हुए पकड़ा जाता है, उसको समझाया जाता है। इसके अलावा बाहरी कालोनियों में शौचालय निर्माण के लिए सर्वे किया जा रहा है। शहर में सब्जी मंडी व बस स्टैंड के आसपास के क्षेत्र में गंदगी रहती है। उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
सफाई व्यवस्था पर लगभग एक करोड़ रुपये सालाना खर्च
शहर में सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए नगर परिषद की तरफ से लगभग आठ लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। पूरे वर्ष में यह आंकड़ा लगभग एक करोड़ रुपये पहुंच जाता है। यह खर्च सफाई कर्मचारियों से वेतन से अलग से रखा जाता है। इस राशि को केवल शहर की सफाई में प्रयोग होने वाले संसाधनों पर खर्च किया जाता है।