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उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ आस्था के महापर्व छठ की हुई समाप्ति
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जयंती देवी मंदिर में छठ पूजा पर स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Jind
जींद। नहाय खाय से शुरू हुआ आस्था का महापर्व छठ सोमवार को जयंती देवी मंदिर स्थित सरोवर में श्रद्धालुओं द्वारा उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हो गया। छठ व्रत के चौथे दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत के पारण का विधान है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन तप और व्रत के माध्यम से हर साधक अपने घर-परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना करता है।
बिहार, उत्तर प्रदेश व झारखंड सहित देश के तमाम हिस्सों में मनाया जाने वाला यह पर्व छठी मैया और भगवान सूर्य की विशेष पूजा के लिए किया जाता है। श्रद्धालु मुकेश, विनय प्रसाद, अंशुमनत सिंह, गायत्री, सरला व पार्वती ने बताया कि भगवान सूर्य की महिमा तमाम पुराणों में बताई गई है। भगवान सूर्य एक ऐसे देवता हैं, जिनकी साधना भगवान राम और श्रीकृष्ण के पुत्र सांब तक ने की थी। सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक ग्रंथों में उगते हुए सूर्य की पूजा को अत्यंत ही शुभ और शीघ्र ही फलदायी बताई गई है, लेकिन छठ महापर्व पर की जाने वाली सूर्यदेव की पूजा एवं अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
भले ही दुनिया कहती है कि जो उदय हुआ है, उसका डूबना तय है, लेकिन लोक आस्था के छठ पर्व में पहले डूबते और बाद में दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का यही संदेश है कि जो डूबा है उसका उदय होना भी निश्चित है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्यपूर्वक अपना कर्म करते हुए अपने अच्छे दिनों के आने का इंतजार करें। निश्चित ही भगवान सूर्य की कृपा से सुख.समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलेगा।
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-नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर।
पूर्वांचल के लोगों ने उत्साह के साथ मनाया छठ पर्व
नरवाना में श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक छठ पूजा का त्योहार प्रवासी लोगों द्वारा उत्साह के साथ सिरसा ब्रांच नहर के किनारे मनाया गया। यह त्योहार शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होता है तथा चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन नहाए खाए, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है और अगले दिन उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देकर सूर्य की उपासना की जाती है। इस त्योहार पर जो कोई भी अपनी मनोकामना मांगता है, सूर्यदेव उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। संतान प्राप्ति, रोगों से छुटकारा पाना, घर में सुख समृद्धि की प्राप्ति करने के लिए छठ पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस त्योहार को दीनबंधु दुखहर्ता के रूप में भी देखा जाता है। हर प्रकार के दुखों को सूर्य देवता हरते हैं और लोगों के जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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बिहार, उत्तर प्रदेश व झारखंड सहित देश के तमाम हिस्सों में मनाया जाने वाला यह पर्व छठी मैया और भगवान सूर्य की विशेष पूजा के लिए किया जाता है। श्रद्धालु मुकेश, विनय प्रसाद, अंशुमनत सिंह, गायत्री, सरला व पार्वती ने बताया कि भगवान सूर्य की महिमा तमाम पुराणों में बताई गई है। भगवान सूर्य एक ऐसे देवता हैं, जिनकी साधना भगवान राम और श्रीकृष्ण के पुत्र सांब तक ने की थी। सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक ग्रंथों में उगते हुए सूर्य की पूजा को अत्यंत ही शुभ और शीघ्र ही फलदायी बताई गई है, लेकिन छठ महापर्व पर की जाने वाली सूर्यदेव की पूजा एवं अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि छठ व्रत की पूजा से साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
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भले ही दुनिया कहती है कि जो उदय हुआ है, उसका डूबना तय है, लेकिन लोक आस्था के छठ पर्व में पहले डूबते और बाद में दूसरे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का यही संदेश है कि जो डूबा है उसका उदय होना भी निश्चित है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों से घबराने के बजाय धैर्यपूर्वक अपना कर्म करते हुए अपने अच्छे दिनों के आने का इंतजार करें। निश्चित ही भगवान सूर्य की कृपा से सुख.समृद्धि और सौभाग्य का वरदान मिलेगा।
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-नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर।
पूर्वांचल के लोगों ने उत्साह के साथ मनाया छठ पर्व
नरवाना में श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक छठ पूजा का त्योहार प्रवासी लोगों द्वारा उत्साह के साथ सिरसा ब्रांच नहर के किनारे मनाया गया। यह त्योहार शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होता है तथा चार दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन नहाए खाए, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है और अगले दिन उगते हुए सूर्य को अघ्र्य देकर सूर्य की उपासना की जाती है। इस त्योहार पर जो कोई भी अपनी मनोकामना मांगता है, सूर्यदेव उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। संतान प्राप्ति, रोगों से छुटकारा पाना, घर में सुख समृद्धि की प्राप्ति करने के लिए छठ पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस त्योहार को दीनबंधु दुखहर्ता के रूप में भी देखा जाता है। हर प्रकार के दुखों को सूर्य देवता हरते हैं और लोगों के जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।