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बद्दोवाल टोल प्लाजा पहुंचे चढूनी, कहा-सरकार किसानों ने नाम करे जमीन
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बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह चढूनी। संवाद।
- फोटो : Jind
संवाद न्यूज एजेंसी
नरवाना। बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसान इंद्र का शव रखकर किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। दूसरे दिन भी प्रशासन तथा किसानों के बीच बातचीत हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। प्रशासन की तरफ से सहानुभूति जताई जा रही है लेकिन मांगों को स्वीकार नहीं किया गया है। वहीं सोमवार को धरने पर भाकियू के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह हमारे हिस्से की जमीन है, जो हमने पशु वगैराह चराने के लिए छोड़ रखी थी। सरकार को यह जमीन किसानों के नाम करनी चाहिए।
चढूनी ने कहा कि सरकार ने कानून बनाकर आज यह जमीन अपने पक्ष में कर ली है लेकिन यह किसानों का हक है। इसपर किसानों का ही अधिकार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जुल्म करना पाप है लेकिन इसको सहना महापाप है। किसानों का झगड़ा केवल सरकार के साथ अपना हक लेने के लिए है। सरकार किसानों के साथ बहुत बड़ा षड्यंत्र रच रही है। जल्द ही इसका भी खुलासा किया जाएगा।
मांगों पर अड़े रहे किसान
प्रशासन ने बातचीत करने का प्रयास किया था लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं। किसानों ने मृतक परिवार को 60 लाख रुपये, एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा जमीन की मलकियत किसान के नाम करने की अपनी मांग दोहराई। इस कारण पूरा दिन बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसानों का जमावड़ा लगा रहा। किसानों ने टोल को भी फ्री करवाए रखा। देर शाम तक 11 सदस्यीय कमेटी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची।
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प्रशासन की किसानों के साथ पूरी सहानुभूति है। शव का अंतिम संस्कार कर देना चाहिए। जायज मांगों पर प्रशासन बातचीत के लिए तैयार है लेकिन जमीन की मलकियत करना प्रशासन के हाथ में नहीं है। किसानों को भी समझना चाहिए।
-डॉ. राजेश खोथ, एसडीएम।
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नरवाना। बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसान इंद्र का शव रखकर किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। दूसरे दिन भी प्रशासन तथा किसानों के बीच बातचीत हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। प्रशासन की तरफ से सहानुभूति जताई जा रही है लेकिन मांगों को स्वीकार नहीं किया गया है। वहीं सोमवार को धरने पर भाकियू के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह हमारे हिस्से की जमीन है, जो हमने पशु वगैराह चराने के लिए छोड़ रखी थी। सरकार को यह जमीन किसानों के नाम करनी चाहिए।
चढूनी ने कहा कि सरकार ने कानून बनाकर आज यह जमीन अपने पक्ष में कर ली है लेकिन यह किसानों का हक है। इसपर किसानों का ही अधिकार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जुल्म करना पाप है लेकिन इसको सहना महापाप है। किसानों का झगड़ा केवल सरकार के साथ अपना हक लेने के लिए है। सरकार किसानों के साथ बहुत बड़ा षड्यंत्र रच रही है। जल्द ही इसका भी खुलासा किया जाएगा।
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मांगों पर अड़े रहे किसान
प्रशासन ने बातचीत करने का प्रयास किया था लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं। किसानों ने मृतक परिवार को 60 लाख रुपये, एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा जमीन की मलकियत किसान के नाम करने की अपनी मांग दोहराई। इस कारण पूरा दिन बद्दोवाल टोल प्लाजा पर किसानों का जमावड़ा लगा रहा। किसानों ने टोल को भी फ्री करवाए रखा। देर शाम तक 11 सदस्यीय कमेटी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंची।
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प्रशासन की किसानों के साथ पूरी सहानुभूति है। शव का अंतिम संस्कार कर देना चाहिए। जायज मांगों पर प्रशासन बातचीत के लिए तैयार है लेकिन जमीन की मलकियत करना प्रशासन के हाथ में नहीं है। किसानों को भी समझना चाहिए।
-डॉ. राजेश खोथ, एसडीएम।